करोड़पति ने गरीब लड़की के गले में अपना खोया हार देखा — फिर उसने जो किया, उसने सबको हैरान कर दिया!

किस्मत का खेल: एक हार, एक बेटी और अधूरी रात की सच्चाई
प्रस्तावना
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो आपके दिल की गहराइयों को छू लेगी और आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि किस्मत के खेल कितने अनोखे होते हैं। यह कहानी है करोड़पति व्यापारी करण, गरीब लड़की ईशा, उसकी बेटी वीरा और उन सबके बीच बंधी एक अमिट डोर की। इसमें प्यार, दर्द, संघर्ष, विश्वासघात और अंत में सच्चाई की जीत है।
1. करण की बेचैनी और वीरा का आंसू
करण एक बहुत बड़े व्यापारी थे। उनके पास दौलत, शोहरत, इज्जत सब कुछ था, लेकिन दिल में एक अधूरापन था। उनकी मां की एक निशानी—सोने का हार—कई साल पहले कहीं खो गया था। करण उसे हर जगह ढूंढते रहे, लेकिन वह कभी नहीं मिला। उस हार से उनकी मां की यादें जुड़ी थीं, और करण अक्सर उसकी याद में खो जाते थे।
एक दिन अपने ऑफिस से लौटते वक्त उनकी नजर सड़क किनारे बैठी एक छोटी बच्ची पर पड़ी—वीरा। वह बहुत जोर-जोर से रो रही थी। करण का दिल पसीज गया। उन्होंने गाड़ी रुकवाई और उसके पास गए। बच्ची के गले में वही सोने का हार था, जो करण के परिवार की निशानी थी। करण के होश उड़ गए, दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
करण ने डर और उत्सुकता से पूछा, “बेटी, यह हार तुम्हारे पास कहां से आया?”
वीरा ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा, “यह मेरे पापा का है। मम्मी ने दिया है। मैं इसे किसी को नहीं दूंगी।”
करण एक पल को पत्थर से बन गए। उनके दिमाग में सवालों का तूफान था: यह बच्ची कौन है? उसके पिता कौन हैं? यह हार उसके पास कैसे आया?
2. ईशा की कहानी: संघर्ष और उम्मीद
अब कहानी पीछे जाती है—ईशा की ओर। ईशा एक सुंदर, नेकदिल लेकिन बहुत गरीब लड़की थी। उसकी सहेली एकता ही उसका सहारा थी। दोनों एक छोटे से कमरे में रहती थीं, कई बार भूखे पेट सो जातीं। ईशा हमेशा कहती थी, “एक दिन मेरी किस्मत जरूर बदलेगी।”
एक दिन ईशा को एक बड़े होटल में इंटरव्यू देने जाना था। एकता ने उसे शुभकामनाएं दीं। इंटरव्यू में ईशा का चयन हो गया। दोनों सहेलियां खुशी से नाच उठीं। एकता ने जश्न मनाने के लिए क्लब चलने की जिद की।
क्लब में ईशा ने साधारण कपड़े पहने थे। वह बहुत थकी हुई थी, सिरदर्द की दवा खा चुकी थी। दवा का असर हुआ और उसे बहुत नींद आने लगी। वह क्लब के ऊपर होटल के एक कमरे में चली गई, जो गलती से करण का कमरा था।
3. अधूरी रात: नशा, कमजोरी और एक भूल
उस रात करण भी क्लब में थे। अपने बिजनेस पार्टनर के धोखे से दुखी, उन्होंने बहुत शराब पी ली थी। जब वे अपने कमरे में पहुंचे, तो अंधेरे में बिस्तर पर ईशा को देखा। नशे की हालत में उन्हें लगा कि कोई दोस्त उनका मन बहलाने के लिए किसी को भेज गया है। ईशा गहरी नींद में थी, करण भी होश में नहीं थे। उस रात एक भूल हो गई, जिसका एहसास दोनों को अगले दिन हुआ।
सुबह ईशा की आंख खुली, उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था। उसने देखा कि बिस्तर पर एक सुंदर सोने का हार और कुछ पैसे पड़े थे। ईशा को लगा उसकी इज्जत का सौदा हो गया। वह रोती हुई घर लौट गई।
4. गर्भ, दर्द और अकेलापन
एक महीने बाद ईशा को अपने शरीर में बदलाव महसूस हुआ। एकता के साथ क्लीनिक गई। वहां पता चला कि वह गर्भवती है। ईशा के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह अनजान बच्चे की मां बनने जा रही थी।
ईशा ने खुद से वादा किया, “मैं तुम्हें बहुत प्यार दूंगी, तुम्हारी हिफाजत करूंगी।” एकता ने उसे संभाला, लेकिन जल्द ही उसकी शादी हो गई और वह शहर छोड़ गई। ईशा अब बिल्कुल अकेली थी।
5. नौकरी छूटना और संघर्ष
ईशा होटल में काम करती रही, लेकिन गर्भ की वजह से कमजोरी बढ़ने लगी। एक दिन मेहमान की शिकायत पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया। अब उसके पास कोई सहारा नहीं था। उसने छोटे-छोटे काम किए, बर्तन धोए, झाड़ू-पोछा किया।
वीरा का जन्म हुआ। ईशा ने उसे अकेले पाला। वीरा मासूम और सुंदर थी, उसकी मुस्कान में ईशा का सारा दर्द गायब हो जाता। पांच साल बाद, ईशा अब एक मजबूत मां बन चुकी थी।
6. वीरा का सवाल और एक हार की कहानी
एक शाम वीरा ने पूछा, “मम्मी, मेरे पापा कहां हैं?”
ईशा का दिल कांप गया। उसने कबर्ड से वह हार निकाला और वीरा को पहनाया। “बेटा, यह तुम्हारे पापा की निशानी है।”
वीरा ने वादा किया कि वह इस हार की हमेशा रक्षा करेगी।
7. करण का अधूरापन और तान्या का झूठ
करण के पिता ने शादी के लिए दबाव डाला। करण ने तान्या से शादी का विचार किया। तान्या बहुत अमीर और घमंडी थी। उसकी सहेली स्नेहा ने सलाह दी कि वह करण से झूठ बोले कि वह गर्भवती है। तान्या ने झूठ बोला, करण खुश हुआ।
8. किस्मत का मोड़: वीरा की मुलाकात करण से
एक दिन ईशा बहुत बीमार थी। वीरा दवाई लेने गई। करण वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने वीरा को रोते देखा और उसके गले में वही हार पहना देखा। करण ने पूछा, “यह हार तुम्हारे पास कहां से आया?” वीरा ने बताया, “यह मेरे पापा का है।”
करण सब समझ गए। वे वीरा के साथ उसके घर गए, ईशा बेहोश पड़ी थी। करण ने उसकी मदद की। उनकी आंखें मिलीं, उन्हें पांच साल पुरानी रात याद आ गई। करण को एहसास हुआ कि वीरा उनकी अपनी बेटी है।
9. सच्चाई की जीत और तान्या की हार
करण ने ईशा और वीरा को अपने घर ले जाने का फैसला किया। तान्या ने उन्हें देखकर गुस्से में ईशा और वीरा को धक्के देकर घर से निकाल दिया। भगदड़ में वीरा को चोट लगी। करण का गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने तान्या का झूठ पकड़ लिया और उसे हमेशा के लिए घर से निकाल दिया।
करण ने ईशा से माफी मांगी। ईशा ने करण को माफ कर दिया। करण ने वादा किया, “अब हम एक सच्चा परिवार बनकर जिएंगे।”
10. नया परिवार, नई सुबह
करण ने ईशा और वीरा को अपने घर में सम्मान और प्यार दिया। उन्होंने वीरा को अपनी बेटी की तरह अपनाया। ईशा को पहली बार जिंदगी में सुकून मिला। करण ने अपनी अधूरी जिंदगी को पूरा पाया।
ईशा ने अपने पुराने दर्द को भूलकर करण को माफ कर दिया। वीरा ने अपने पिता को पा लिया। अब तीनों एक सच्चा परिवार बन गए।
11. समाज की नजरें और सच्चाई का उजाला
शहर में यह खबर फैल गई कि करोड़पति करण ने एक गरीब लड़की और उसकी बेटी को अपनाया है। कुछ लोग ताने मारते, कुछ तारीफ करते। लेकिन करण और ईशा को अब फर्क नहीं पड़ता था। वे जानते थे कि सच्चाई कभी छुपती नहीं।
करण ने अपनी मां की निशानी वीरा को दी और कहा, “अब यह हार तुम्हारी है। यह हमारे परिवार की पहचान है।”
12. उपसंहार: किस्मत का खेल और सच्चाई की जीत
यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार कभी झूठ पर नहीं टिकता। किस्मत हमें वहीं ले जाती है, जहां हमारी मंजिल होती है। सच्चाई कभी छुपती नहीं, और हर बुरे वक्त के बाद एक सुनहरी सुबह जरूर आती है।
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