क्या गीता माँ ने की फ़राह खान के भाई से शादी ? गीता कपूर के लाल सिंदूर ने खोल दी पोल!

गीता मां: चकाचौंध के पीछे का अनकहा सच
बॉलीवुड की गलियों में एक ऐसी शख्सियत है जिसे पूरा देश और पूरी फिल्म इंडस्ट्री ‘मां’ कहकर पुकारती है। वह नाम है गीता कपूर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस महिला को लाखों बच्चे अपनी मां मानते हैं, वह असल जिंदगी में अपने लिए एक सच्चे साथी को क्यों नहीं पा सकी? साजिद खान के साथ उनके रिश्ते की वह कौन सी रहस्यमयी कहानी है जिसे समय के साथ दफन कर दिया गया? आइए, आज गीता कपूर की जिंदगी के उन पन्नों को पलटते हैं जो अब तक अनछुए रहे हैं।
१. आसमान छूने का सपना और जमीनी हकीकत
गीता कपूर का जन्म ५ जुलाई १९७३ को मुंबई के एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन में उनका सपना डांस की दुनिया में नाम कमाना नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों में उड़ना था। वह एक एयर होस्टेस बनना चाहती थीं। लेकिन किस्मत की पटकथा कुछ और ही थी। आँखों की रोशनी कम होने के कारण उनका यह सपना टूट गया।
उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। महज १५ साल की उम्र में, जब बच्चे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, गीता ने परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उठाने का फैसला किया। डांस उनके लिए कोई जुनून नहीं, बल्कि घर चलाने की एक मजबूरी बनकर आया था।
२. बैकग्राउंड डांसर से फराह खान की ‘पहली औलाद’ तक
गीता ने अपने करियर की शुरुआत मशहूर कोरियोग्राफर फराह खान के ग्रुप में एक बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की। उन्होंने श्रीदेवी जैसे बड़े सितारों के पीछे डांस किया। फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के गाने ‘तुझे याद ना मेरी आई’ में वह राजस्थानी वेशभूषा में नजर आई थीं।
फराह खान उनके लिए सिर्फ एक गुरु नहीं, बल्कि एक मां जैसी बन गईं। गीता फराह को ‘मम्मा’ कहकर बुलाती हैं। फराह ने भी एक शो में कहा था, “मेरे तीन बच्चे हैं, लेकिन गीता कपूर मेरी पहली औलाद है।” फराह की छत्रछाया में गीता ने ‘शीला की जवानी’ जैसे आइकॉनिक गानों पर काम किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई।
३. साजिद खान: वह रिश्ता जो शादी तक न पहुँच सका
गीता कपूर की निजी जिंदगी हमेशा सुर्खियों में रही। सबसे बड़ा नाम जो उनसे जुड़ा, वह था फराह खान के भाई साजिद खान। साजिद और गीता के अफेयर की चर्चा बॉलीवुड के गलियारों में आग की तरह फैली थी।
साजिद खान ने खुद ‘सुपर डांसर’ के सेट पर कबूल किया था कि उन्होंने गीता को कई बार शादी के लिए प्रपोज किया था। गीता भी साजिद को पसंद करती थीं, लेकिन साजिद की ‘प्लेबॉय’ वाली छवि और उनके अस्थिर/चरित्र के कारण गीता ने कदम पीछे खींच लिए। वह एक गंभीर रिश्ता चाहती थीं, जबकि साजिद उस समय इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी वजह से यह रिश्ता टूट/गया।
४. अन्य अफवाहें: टेरेंस लुईस और राजीव खिंची
साजिद के अलावा, ‘डांस इंडिया डांस’ के मंच पर उनकी और टेरेंस लुईस की केमिस्ट्री ने भी खूब चर्चा बटोरी। यहाँ तक कि गीता की मां भी चाहती थीं कि वे दोनों शादी कर लें। लेकिन गीता और टेरेंस ने हमेशा इसे एक गहरी दोस्ती ही बताया।
२०११ के आसपास, उनका नाम राजीव खिंची के साथ जुड़ा। इंटरनेट पर उनकी रोमांटिक/तस्वीरें वायरल हुईं और दावा किया गया कि उन्होंने गुपचुप शादी कर ली है। लेकिन २०१४ में गीता ने इन खबरों का खंडन किया। बताया जाता है कि इस रिश्ते/के/अंत के बाद गीता काफी समय तक गहरे दुख में रहीं।
५. मांग में सिंदूर का रहस्य
मई २०२१ में गीता ने अपनी एक फोटो पोस्ट की जिसमें उनकी मांग में सिंदूर लगा था। इंटरनेट पर तूफान आ गया कि क्या गीता मां ने साजिद या टेरेंस से शादी कर ली है? बाद में गीता ने सफाई दी कि वह एक शिव/भक्त हैं और आस्था के प्रतीक के रूप में सिंदूर लगाती हैं। साथ ही, वह फोटो एक विशेष एपिसोड के लिए ‘रेखा जी’ को ट्रिब्यूट देने के लिए थी।
६. ५२ की उम्र में बेबाक बयान: “मैं कोई कुंवारी नहीं हूँ”
मार्च २०२६ में, ५२ साल की उम्र में गीता ने एक पॉडकास्ट में जो कहा, उसने समाज को हिला कर रख दिया। उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा कि वह सिंगल जरूर हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक/जरूरतों को कभी नहीं दबाया। उन्होंने कहा, “मैं कोई नन या कुंवारी नहीं हूँ। मैं लोगों से मिलती हूँ, डेट करती हूँ और शारीरिक/संबंधों में भी रही हूँ।”
उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप का समर्थन करते हुए कहा कि आज के दौर में कमिटमेंट से ज्यादा कंपैटिबिलिटी जरूरी है। यह बयान उनकी ‘मां’ वाली पारंपरिक छवि के बिल्कुल विपरीत था, लेकिन इसने उनकी आधुनिक और स्वतंत्र सोच को दुनिया के सामने रखा।
७. एक कड़वा मोड़: वर्सोवा एक्सीडेंट
११ मार्च २०१५ की सुबह गीता की जिंदगी में एक अंधेरा मोड़ लेकर आई। उनकी बेकाबू कार ने एक व्यक्ति को टक्कर मार दी थी। हालांकि, उन्होंने भागने के बजाय इंसानियत दिखाई, घायल को अस्पताल पहुँचाया और उसके इलाज का ७ लाख रुपये का खर्च खुद उठाया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद २०२४ में उन्हें इस केस से राहत मिली।
निष्कर्ष: अपनी शर्तों पर जीने वाली ‘मां’
गीता कपूर की कहानी सिर्फ डांस स्टेप्स की कहानी नहीं है। यह उस लड़की की कहानी है जिसने परिवार के लिए अपने सपनों की बलि/चढ़ा दी। उन्होंने कभी शादी नहीं की, लेकिन लाखों बच्चों को अपना प्यार देकर ‘गीता मां’ बनीं। उनके अफेयर्स और रिश्तों की अफवाहें तो बहुत उड़ीं, लेकिन उनका सबसे सच्चा रिश्ता हमेशा उनके काम और जिम्मेदारियों से रहा।
आज वह मुख्यधारा की कोरियोग्राफी छोड़कर नए हुनर को तराशने में खुश हैं। वह साबित करती हैं कि एक महिला की सफलता और पूर्णता के लिए शादी ही एकमात्र विकल्प नहीं है।
अगर आप भी गीता मां के संघर्ष और उनकी बेबाकी का सम्मान करते हैं, तो उनकी कहानी को साझा करना न भूलें।
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