क्या यूपी सरकार इस नौजवान फौजी को इंसाफ दिला पाएगी ? Justice for sena

क्या यूपी सरकार इस वीर जवान को इंसाफ दिला पाएगी? हाथरस के अखिलेश सिंह की शहादत और अपराधियों की हिमाकत

बॉर्डर पर देश की सुरक्षा करने वाला एक फौजी जब अपने ही घर के पास अपराधियों की गोलियों का शिकार हो जाए, तो सवाल व्यवस्था पर उठना लाजिमी है। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पुलिस प्रशासन के इकबाल पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण: अपराधियों की बर्बरता

5 फरवरी 2026 की यह घटना हाथरस के सदाबाद थाना क्षेत्र के समदपुर गांव की है। भारतीय सेना के 28 वर्षीय जवान अखिलेश सिंह, जो आगरा कैंट में तैनात थे, अपनी कोर्ट पेशी के बाद घर लौट रहे थे। रास्ते में चंद्रा फार्म हाउस के पास अपराधियों ने उन्हें घेर लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अपराधियों ने अखिलेश की गाड़ी में पहले टक्कर मारी और फिर उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। जान बचाने के लिए अखिलेश खेतों की तरफ भागे, लेकिन पीछा कर रहे 5-6 अपराधियों ने उन पर 8 से 10 राउंड फायरिंग की, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

मानवता को शर्मसार करने वाली हरकत

हैरानी और गुस्से की बात यह है कि हत्या के बाद अपराधी भागे नहीं, बल्कि सीधे जवान के घर पहुंचे। वहां उन्होंने अखिलेश की बुजुर्ग मां से कहा, “हमने तुम्हारे बेटे को ढेर कर दिया है, जाकर उसे उठा लो।” इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे गांव को धमकी दी कि अगर किसी ने शव को छुआ या परिवार का साथ दिया, तो उनका भी वही हश्र होगा।

विवाद की जड़: प्रेम विवाह और रंजिश

इस पूरी घटना के पीछे 3 साल पुरानी एक रंजिश बताई जा रही है। अखिलेश की बहन डॉली कुमारी के अनुसार, अखिलेश ने 3 साल पहले निधि नाम की युवती से प्रेम विवाह किया था। निधि, मथुरा की रहने वाली थी लेकिन उसका ननिहाल उसी समदपुर गांव में विक्रम नामक व्यक्ति के घर था।

विक्रम, जो इलाके का एक हिस्ट्रीशीटर बताया जाता है, इस शादी के खिलाफ था। हालांकि निधि के सगे माता-पिता ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया था, लेकिन विक्रम इसे अपनी ‘प्रतिष्ठा’ पर चोट मान रहा था। उसने पहले भी अखिलेश पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे और लगातार जान से मारने की धमकी दे रहा था।

परिवार की स्थिति और मांग

अखिलेश के पिता देवेंद्र सिंह, जो खुद एक रिटायर्ड सैनिक हैं, घटना के समय जम्मू में थे। घर पर केवल उनकी पत्नी थी। अखिलेश का डेढ़ साल का एक बेटा भी है। जवान की पत्नी निधि का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव इस कायरतापूर्ण कृत्य से सदमे में है।

पिता देवेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भावुक अपील करते हुए कहा:

“जैसे इन अपराधियों ने मिलकर मेरे निहत्थे बेटे को मारा है, मैं चाहता हूं कि सरकार इनका कठोरता से न्याय करे। मेरे बेटे के पास उस वक्त हथियार नहीं था, वरना वह अकेला ही इन सब पर भारी पड़ता।”

प्रशासन के सामने चुनौतियां

फिलहाल पुलिस ने विक्रम, विशाल, हेमंत, राजा और गब्बर समेत करीब 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि, घटना के बाद से ही मुख्य आरोपी का पूरा परिवार फरार है, जिससे यह साफ होता है कि यह हत्या पूरी तरह से नियोजित (Pre-planned) थी।

मुख्य सवाल जो जनता पूछ रही है:

    एक हिस्ट्रीशीटर के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए कि वह दिनदहाड़े जवान की हत्या कर घर जाकर धमकी दे?
    क्या उत्तर प्रदेश का ‘बुलडोजर मॉडल’ इन अपराधियों के घरों तक पहुंचेगा?
    सीमा पर रक्षा करने वाले परिवारों को अपने ही गांव में सुरक्षा क्यों नहीं मिल पा रही?

निष्कर्ष

यह घटना सिर्फ एक फौजी की हत्या नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। अखिलेश सिंह जैसे जवान देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं, और जब उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो समाज का विश्वास डगमगाने लगता है। अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर टिकी हैं कि क्या वे इस वीर जवान के परिवार को समय पर न्याय दिला पाते हैं या नहीं।