”जिस लड़के को ‘फटीचर’ कहा, वही निकला कंपनी का मालिक! 😱 अंत हिला देगा!

संस्कारों की जड़ें और अहंकार का महल
भाग 1: एक मामूली गलती, एक बड़ा तूफान
रॉयलॉक होटल का आलीशान हॉल झूमरों की रोशनी से जगमगा रहा था। शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन और रईस हस्तियां वहाँ मौजूद थीं। इसी भीड़ में सत्यम भी था, जो अपनी एक पुरानी फाइल सीने से चिपकाए इंटरव्यू के लिए आया था। उसके कपड़े सादे थे, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।
तभी अचानक सत्यम के हाथ से पानी का एक गिलास छलक गया। पानी की कुछ बूंदें वहां खड़ी रिया सिंघानिया के महंगे डिजाइनर गाउन पर गिर गईं। रिया, जो शहर के सबसे बड़े रईस विक्रम सिंघानिया की इकलौती बेटी थी, गुस्से से आगबबूला हो गई।
“अंधे हो क्या? या गरीबी की वजह से नजर भी कमजोर हो गई है? इस गाउन की कीमत तुम्हारी साल भर की कमाई से ज्यादा है!” रिया की आवाज हॉल में गूंजी।
सत्यम ने बड़ी विनम्रता से कहा, “आई एम सॉरी मैम। मेरा ध्यान नहीं था। लाइये, मैं साफ कर देता हूँ।” उसने अपना रुमाल निकाला।
“खबरदार जो मुझे हाथ भी लगाया!” रिया ने चिल्लाते हुए उसका रुमाल झपटकर जमीन पर फेंक दिया। “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे अपना यह दो टके का रुमाल दिखाने की? गार्ड्स! इस कचरे को बाहर फेंको!”
गार्ड्स ने सत्यम को पकड़ लिया। जाने से पहले सत्यम ने शांत स्वर में कहा, “मैम, कपड़े गंदे हों तो धोये जा सकते हैं, लेकिन सोच गंदी हो जाए तो दुनिया का कोई भी साबुन उसे साफ नहीं कर सकता। और रही बात औकात की, तो वह वक्त बताता है, इंसान नहीं।”
भाग 2: दो अलग दुनिया, एक ही छत
सत्यम को होटल से बाहर निकाल दिया गया। धूप तेज थी, उसने अपना वह सस्ता रुमाल उठाया, धूल झाड़ी और जेब में रख लिया। वह रुमाल उसकी मां के हाथ का बुना हुआ था, जिसकी कीमत रिया कभी नहीं समझ सकती थी।
तभी सत्यम का फोन बजा। स्क्रीन पर नाम था—’विक्रम सिंघानिया’। सत्यम ने फोन साइलेंट किया और आगे बढ़ गया।
उधर 40वें फ्लोर पर, सिंघानिया ग्रुप के बोर्ड रूम में तनाव था। विक्रम सिंघानिया अपनी डूबती हुई कंपनी को बचाने के लिए एक ‘साइलेंट इन्वेस्टर’ का इंतजार कर रहे थे। रिया भी वहां मौजूद थी, जो अभी भी नीचे हुए वाकये से चिड़चिड़ी थी।
“डैड, आज हम किससे मिलने वाले हैं?” रिया ने लापरवाही से पूछा।
विक्रम ने गंभीर होकर कहा, “एसपी वेंचर्स के मालिक से। वह कोई साधारण इन्वेस्टर नहीं है। अगर उसने आज फंडिंग नहीं की, तो हमारा यह साम्राज्य कल मिट्टी में मिल जाएगा। वह बहुत यंग है और सुना है बहुत ही जमीन से जुड़ा हुआ है।”
भाग 3: नकाब हटा और सच सामने आया
तभी बोर्ड रूम का दरवाजा खुला। पीए ने घोषणा की, “मिस्टर सत्यम प्रकाश पधारे हैं।”
रिया के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी, किसी राजकुमार जैसे इन्वेस्टर को देखने की उम्मीद में। लेकिन जैसे ही सत्यम अंदर आया, रिया की मुस्कान जम गई। वही चेक शर्ट, वही धूल भरे जूते और वही सादगी।
“तुम!” रिया अपनी कुर्सी से उछल पड़ी। “सिक्योरिटी! इसे अंदर किसने आने दिया?”
लेकिन रिया के होश तब उड़ गए जब उसने देखा कि उसके डैड और बोर्ड के बाकी 12 सम्मानित सदस्य अपनी कुर्सियों से खड़े होकर सत्यम का अभिवादन कर रहे थे।
“स्वागत है सत्यम सर!” विक्रम सिंघानिया ने हाथ बढ़ाते हुए कहा।
सत्यम ने हाथ मिलाने के बजाय हाथ जोड़कर नमस्ते किया और कहा, “ट्रैफिक में नहीं सर, कचरे में फंस गया था। कुछ लोग रास्तों को साफ रखने के बजाय इंसानों को साफ करने में यकीन रखते हैं।”
विक्रम का चेहरा पीला पड़ गया। रिया को अब समझ आया कि जिस ‘दो टके के लड़के’ को उसने बाहर फिकवाया था, दरअसल उसी के हाथ में उसकी पूरी सल्तनत की चाबी थी।
भाग 4: न्याय की शर्त
सत्यम ने मेज पर अपनी फाइल रखी। उसने स्पष्ट कर दिया कि वह कंपनी को बचाएगा, लेकिन एक शर्त पर।
“विक्रम सर, आपकी कंपनी की जड़ें सड़ चुकी हैं क्योंकि मैनेजमेंट में अहंकार भर गया है। मेरी शर्त यह है कि मिस रिया आज के बाद डायरेक्टर नहीं रहेंगी।”
“क्या!” रिया चिल्लाई।
सत्यम ने जारी रखा, “इन्हें अगले 6 महीने तक कंपनी के वेयरहाउस (गोदाम) में एक साधारण इंटर्न की तरह काम करना होगा। ये मजदूरों के साथ काम करेंगी, उनके साथ कैंटीन में खाना खाएंगी और मेहनत की रोटी का स्वाद चखेंगी। अगर इन्होंने यह मंजूर किया, तो ही मैं चेक साइन करूँगा।”
विक्रम के पास कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने अपनी बेटी की तरफ देखा और कहा, “रिया, कल सुबह 9 बजे वेयरहाउस में रिपोर्ट करना।”
भाग 5: तपस्या और परिवर्तन
अगले 6 महीने रिया के लिए नर्क जैसे थे। एसी में रहने वाली लड़की अब टीन की छत के नीचे पसीने में तरबतर होकर डिब्बे उठाती थी। शुरुआत में वह बहुत रोई, बहुत नफरत की, लेकिन धीरे-धीरे उसे वहां के लोगों की सादगी समझ आने लगी।
एक दिन जब वह थक कर बैठी थी, एक बूढ़े मजदूर रामदीन काका ने अपना टिफिन खोलकर उसे रोटियां दीं। “बिटिया, घर की बनी हैं, खा लो।”
रिया ने पहली बार किसी गरीब के हाथ से खाना खाया। उस सूखी रोटी का स्वाद उसे किसी भी फाइव स्टार होटल के खाने से ज्यादा मीठा लगा। उसे अपने किए पर गहरा पछतावा हुआ।
भाग 6: विरासत बनाम काबिलियत
6 महीने बाद फिर वही बोर्ड रूम था। रिया आज एक सादे कुर्ते में थी, कोई मेकअप नहीं, कोई घमंड नहीं। विक्रम सिंघानिया ने घोषणा की, “मैं रिटायर हो रहा हूँ। बोर्ड की सहमति से सत्यम प्रकाश को इस कंपनी का नया सीईओ नियुक्त किया जाता है।”
सबने तालियां बजाईं। रिया को लगा था कि 6 महीने की सजा के बाद उसे उसकी कुर्सी वापस मिल जाएगी, लेकिन उसे फिर एक झटका लगा।
विक्रम ने कहा, “विरासत में संपत्ति मिल सकती है रिया, लेकिन काबिलियत कमानी पड़ती है। तुम अभी लीडर बनने के काबिल नहीं हो।”
सत्यम उठा और रिया के पास गया। रिया ने शर्म से नजरें झुका लीं। सत्यम ने अपनी जेब से एक साधारण पेन निकाला और रिया की तरफ बढ़ाते हुए कहा, “सीईओ मैं हूँ, लेकिन कंपनी आपकी भी है। रामदीन काका आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे। जिस दिन आप दूसरों के सम्मान को अपनी दौलत से ऊपर समझेंगी, यह कुर्सी आपका इंतजार करेगी।”
रिया ने कांपते हाथों से वह पेन लिया और सत्यम के आगे हाथ जोड़कर माफी मांगी।
निष्कर्ष: उस दिन रिया ने अपनी दौलत खो दी थी, लेकिन खुद को पा लिया था। उसे समझ आ गया था कि ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए पंख नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी जड़ें जरूरी होती हैं।
News
जिस बच्चे को सबने भिखारी समझा, उसी बच्चे ने बचाई आर्मी जवान की जान | फिर जो हुआ देखिए😱
जिस बच्चे को सबने भिखारी समझा, उसी बच्चे ने बचाई आर्मी जवान की जान | फिर जो हुआ देखिए😱 एक…
बैंक में बुज़ुर्ग को गरीब भिखारी समझकर थप्पड़ मारा—फिर जो हुआ, सबके होश उड़ गए! 😱
बैंक में बुज़ुर्ग को गरीब भिखारी समझकर थप्पड़ मारा—फिर जो हुआ, सबके होश उड़ गए! 😱 इंसानियत का इम्तिहान: लिबास…
पिता से परेशान होकर बेटी ने उठाया गलत कदम /जिसको देखकर S.P साहब के होश उड़ गए/
पिता से परेशान होकर बेटी ने उठाया गलत कदम /जिसको देखकर S.P साहब के होश उड़ गए/ धुंधला जमीर और…
जिस पागल को लोग पत्थर मारते थे, उसकी झोपड़ी के सामने रुकीं 50 लाल बत्ती की गाड़ियां 😱
जिस पागल को लोग पत्थर मारते थे, उसकी झोपड़ी के सामने रुकीं 50 लाल बत्ती की गाड़ियां 😱 पागल मास्टर:…
लाल किले पर भिखारी लड़के का भाषण जिसने पूरा देश खड़ा कर दिया | 26 जनवरी Republic Day Story Hindi
लाल किले पर भिखारी लड़के का भाषण जिसने पूरा देश खड़ा कर दिया | आकाश का गणतंत्र: फटे कपड़ों से…
Army Officer ka Beta Bhikari Kese Bana | Yeah Kahani Apko Rula dy gi
Army Officer ka Beta Bhikari Kese Bana | Yeah Kahani Apko Rula dy gi रक्षक का संकल्प और चांदी का…
End of content
No more pages to load






