दामाद ने काटी अपनी सास की नाक! जालौर की इस खौफनाक घटना से पूरा गाव सन्न | Real Story

जालौर का खौफनाक दामाद: एक बुजुर्ग माँ का संघर्ष

राजस्थान के जालौर जिले की रेतीली धरती पर जहाँ अतिथि सत्कार और पारिवारिक मूल्यों की दुहाई दी जाती है, वहीं मार्च 2026 में एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। यह कहानी है एक ऐसी बुजुर्ग माँ की, जो अपनी बेटी की सलामती के लिए अपने ही दामाद के साथ मदद मांगने निकली थी, लेकिन बदले में उसे वह जख्म मिले जिनकी टीस ताउम्र रहेगी।

सामाजिक पृष्ठभूमि: जालौर और ‘आटा-साटा’ प्रथा

जालौर जिला, जो अपनी खेती और पशुपालन के लिए जाना जाता है, यहाँ के ‘बंधा कुआं’ गांव में बाबूलाल खीचड़ का एक साधारण और खुशहाल परिवार रहता था। उनकी पत्नी केली देवी एक समर्पित गृहणी थीं और उनकी बेटी सरिता परिवार की लाडली थी।

राजस्थान के कई हिस्सों में ‘आटा-साटा’ नाम की एक पुरानी सामाजिक परंपरा है। इस प्रथा में दो परिवार आपस में अपनी बेटियों की अदला-बदली कर शादी करते हैं। बाबूलाल ने भी इसी प्रथा के तहत करीब 4-6 साल पहले सरिता की शादी भीमगुड़ा क्षेत्र के सोहनलाल बिश्नोई से की थी। देखने में यह व्यवस्था आसान लगती है, लेकिन इसके भीतर छिपी जटिलताएं अक्सर रिश्तों में जहर घोल देती हैं।

रिश्तों में दरार और सरिता की जिद

शादी के शुरुआती साल ठीक रहे, लेकिन धीरे-धीरे सोहनलाल और सरिता के बीच वैचारिक मतभेद शुरू हो गए। सरिता शिक्षित थी और अपने सपने पूरे करना चाहती थी। वह जोधपुर जाकर अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने की इच्छुक थी, जबकि सोहनलाल और उसका परिवार चाहता था कि वह पारंपरिक बहू की तरह घर और खेतों की जिम्मेदारी संभाले।

तनाव इतना बढ़ा कि सरिता अपने मायके लौट आई और वहाँ से पढ़ाई के लिए जोधपुर चली गई। सोहनलाल को लगा कि सरिता का उसे छोड़कर जाना उसकी मर्दानगी और प्रतिष्ठा पर चोट है। उसके मन में यह शक घर कर गया कि उसकी सास, केली देवी ही सरिता को उसके खिलाफ भड़का रही हैं। उसे लगने लगा कि केली देवी ही वह दीवार हैं जो उसे और उसकी पत्नी को मिलने नहीं दे रही हैं।

लापता बेटी और एक माँ की ममता

मार्च 2026 के पहले हफ्ते में सरिता का फोन अचानक बंद हो गया। कई दिनों तक संपर्क न होने पर केली देवी बेचैन हो उठीं। एक माँ का दिल अपनी संतान के लिए डूबने लगा। उन्होंने अपनी कड़वाहट किनारे रखकर अपने दामाद सोहनलाल को फोन किया। उन्होंने सोचा कि शायद सोहनलाल को कुछ पता हो या वह बेटी को ढूंढने में मदद कर सके।

केली देवी ने सोहनलाल से कहा, “बेटा, सरिता का फोन नहीं लग रहा है। चलो, हम दोनों मिलकर थाने चलते हैं और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाते हैं।” सोहनलाल ने इसे एक मौके की तरह देखा—अपनी नफरत को अं/जाम देने का मौका। वह केली देवी को अपनी गाड़ी में बिठाकर थाने ले जाने के बहाने घर से निकला।

बालेरा माइनर: वह काली दोपहर

गाड़ी जब बालेरा माइनर (सिंचाई नहर) के पास सुनसान इलाके में पहुँची, तो सोहनलाल ने अचानक कार रोक दी। केली देवी को लगा कि शायद गाड़ी में कोई खराबी आ गई है। लेकिन सोहनलाल के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। खेती के सीजन के कारण गाड़ी में फसल काटने वाली बड़ी और तेज धार वाली कैंची रखी थी।

सोहनलाल ने अचानक उस बुजुर्ग महिला पर हमला कर दिया। उसने केली देवी के चेहरे को अपना निशाना बनाया। वह कैंची से उनके चेहरे को बेहरमी से गो/दने लगा। केली देवी की चीखें उस सुनसान नहर के किनारे दबकर रह गईं। सोहनलाल ने न केवल उन पर जानलेवा हमला किया, बल्कि उनके शरीर पर पहने हुए सोने के गहने भी लूट लिए और उन्हें म/रा हुआ समझकर वहीं खून से लथपथ छोड़कर फरार हो गया।

अस्पताल और कानून की जंग

जब कुछ राहगीरों ने केली देवी को उस हाल में देखा, तो हड़कंप मच गया। उन्हें तुरंत जालौर के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें गुजरात के महसाना रेफर कर दिया। केली देवी के चेहरे की हड्डियां टूट चुकी थीं और उनकी आँखों के पास गहरे जख्म थे।

पुलिस ने सोहनलाल बिश्नोई और उसके तीन साथियों—गणपत, श्रीराम और शिवन राम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसमें गंभीर चोट पहुँचाने, ह/त्या का प्रयास और लूटपाट की धाराएं शामिल हैं।

फरार आरोपी और पुलिस की चुनौतियां

घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी सोहनलाल और उसके साथी फरार हैं। जालौर पुलिस की टीमें राजस्थान और गुजरात की सीमाओं पर दबिश दे रही हैं, लेकिन आरोपी शातिर तरीके से अपनी लोकेशन बदल रहा है। इस घटना ने पूरे जिले में रोष पैदा कर दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि जिस इंसान ने एक बुजुर्ग माँ के भरोसे को क/त्ल किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

एक अधूरा सवाल: सरिता कहाँ है?

इस पूरी त्रासदी में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरिता कहाँ है? क्या वह सुरक्षित है? केली देवी, जो आज भी अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रही हैं, उनकी आँखों में अपने घावों से ज्यादा अपनी बेटी की सलामती की चिंता है। रिंकू (बाबूलाल) का पूरा परिवार बिखर चुका है। एक तरफ पत्नी अस्पताल में है और दूसरी तरफ बेटी का कोई अता-पता नहीं है।

सामाजिक विश्लेषण: क्या ‘आटा-साटा’ ही जड़ है?

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या परंपराएं मानवीय संवेदनाओं से बड़ी हो सकती हैं? ‘आटा-साटा’ जैसी प्रथाएं अक्सर महिलाओं को एक वस्तु की तरह इस्तेमाल करती हैं। जब एक रिश्ता टूटता है, तो दूसरे रिश्ते को जबरन दांव पर लगा दिया जाता है। सोहनलाल का गुस्सा इसी सामाजिक घुटन और अहंकार का परिणाम था, जिसने उसे एक हैवान बना दिया।

हमें अपने समाज में ऐसे तंत्र विकसित करने होंगे जहाँ घरेलू विवादों का समाधान हिं/सा के बजाय संवाद और कानूनी परामर्श से निकले। जब तक हम औरतों की आजादी और उनके फैसलों का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक ऐसे ‘सोहनलाल’ समाज के बीच पनपते रहेंगे।

निष्कर्ष: केली देवी की कहानी केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक माँ की अटूट ममता और एक दरिंदे की नीचता का जीवंत उदाहरण है। उम्मीद है कि कानून जल्द ही सोहनलाल को सलाखों के पीछे पहुँचाएगा और केली देवी को वह न्याय मिलेगा जिसकी वह हकदार हैं।

जय हिंद।