दो पुजारियों ने मंदिर में किया कारनामा/पोल खुली तो पुलिस और गांव के लोग दंग रह गए/

मंदिर की सच्चाई – अचलपुर गांव की कहानी

अध्याय 1: अनुराधा देवी का संघर्ष

राजस्थान के भरतपुर जिले के अचलपुर गांव में अनुराधा देवी अपने बेटे बबलू और सास रति देवी के साथ रहती थी। अनुराधा देवी गांव में चूड़ियों की दुकान चलाती थी। उसकी दुकान पर गांव की महिलाएं आती थीं, क्योंकि वह सस्ते दामों में अच्छा सामान बेचती थी। मेहनत और ईमानदारी से अपने परिवार का पालन-पोषण करती थी। खेत के किनारे उसका घर था, जहां आसपास कोई और घर नहीं था।

बबलू कक्षा छह का छात्र था, पढ़ाई में ठीक-ठाक था। अनुराधा देवी को अपने बेटे पर गर्व था। उसकी सास रति देवी घर के काम में मदद करती थी। सबकुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अनुराधा को नहीं पता था कि आगे उसके जीवन में क्या बदलाव आने वाला है।

अध्याय 2: मंदिर का हादसा

2 अक्टूबर 2025 की सुबह बबलू ने अपनी मां से कहा कि आज स्कूल की छुट्टी है, वह गांव के मंदिर में खेलने जा रहा है। बबलू अपने दोस्त रवि के साथ मंदिर गया, जहां पास ही तालाब था। खेलते-खेलते अचानक एक सांप मंदिर के पास आ गया। रवि ने सांप को देखा और शोर मचाया। बबलू डर के मारे बेहोश हो गया।

रवि दौड़कर मंदिर के अंदर गया, जहां किशोरनाथ पुजारी पूजा कर रहे थे। रवि ने पुजारी को बताया कि उसका दोस्त बेहोश हो गया है। किशोरनाथ पुजारी तुरंत बाहर आया, बबलू को उठाकर मंदिर के अंदर ले गया और प्राथमिक उपचार किया। रवि दौड़कर अनुराधा के घर गया और उसे सब बताया।

अनुराधा देवी घबराकर मंदिर पहुंची। उसने देखा कि पुजारी ने उसके बेटे की जान बचाई है। अनुराधा ने किशोरनाथ पुजारी का धन्यवाद किया। किशोरनाथ ने मदद की, लेकिन उसके मन में अनुराधा के प्रति गलत विचार आ गए। अनुराधा देवी अपने बेटे को लेकर घर लौट गई, लेकिन पुजारी के मन में अनुराधा की सुंदरता बस चुकी थी।

अध्याय 3: मंदिर में जागरण की तैयारी

8 अक्टूबर को गांव के सरपंच राजपाल सिंह मंदिर में जागरण करवाने की योजना बनाते हैं। उन्होंने किशोरनाथ पुजारी से कहा कि पूरे गांव से दान इकट्ठा करना है। किशोरनाथ पुजारी शाम को दान इकट्ठा करने निकलता है और अंत में अनुराधा देवी के घर पहुंचता है।

अनुराधा देवी ने पुजारी को 500 रुपये दान में दिए। बातचीत में अनुराधा ने बताया कि उसकी सास अपने मायके चली गई है और बेटा भी साथ गया है, कुछ दिनों बाद लौटेंगे। किशोरनाथ पुजारी को पता चलता है कि अनुराधा घर पर अकेली है। उसने अनुराधा से खाना बनाने की गुजारिश की। अनुराधा ने विश्वास के साथ पुजारी के लिए खाना बनाया।

अध्याय 4: विश्वासघात

खाना खाने के बाद किशोरनाथ पुजारी ने अनुराधा को प्रसाद दिया, जिसमें उसने नशीला पदार्थ मिला दिया था। अनुराधा ने प्रसाद खाया और बेहोश हो गई। पुजारी ने दरवाजा बंद किया और अनुराधा को कमरे में ले गया। अनुराधा को होश नहीं था, पुजारी ने उसका गलत फायदा उठाया।

कुछ देर बाद पुजारी ने अपने दोस्त उदयनाथ को फोन किया, जो पास के गांव में पुजारी था। उदयनाथ भी थोड़ी देर में पहुंच गया। दोनों ने मिलकर अनुराधा को बंधक बना लिया और उससे पैसे, गहने और जेवर ले लिए। दोनों ने उसे डराया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी वीडियो वायरल कर देंगे। अनुराधा डर गई, चुपचाप सब सहती रही।

अध्याय 5: गांव की जागरूकता

अगले दिन दोनों पुजारी मंदिर में पूजा करते रहे। उदयनाथ पुजारी ने कहा कि अब पैसे खत्म हो गए हैं, कुछ और करना पड़ेगा। दोनों ने मिलकर योजना बनाई कि मंदिर में आने वाली दूसरी महिलाओं को भी अपने जाल में फंसा लें। उन्होंने मंदिर में आने वाली अलका देवी को भी नशीला प्रसाद देकर बेहोश कर दिया और उसे तहखाने में बंद कर दिया।

राजपाल सरपंच की पत्नी अलका देवी जब घर नहीं लौटी तो राजपाल परेशान हो गया। उसने पूरे गांव में पत्नी की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला। उसी समय गांव की महिला रजनी देवी अपने बेटे राहुल के साथ मंदिर पहुंची। राहुल मंदिर के तहखाने में गया और देखा कि अलका देवी रस्सियों से बंधी पड़ी है। उसने मां को बताया। रजनी देवी ने जाकर अलका देवी की रस्सियां खोली और बाहर ले आई।

अध्याय 6: पुलिस की कार्रवाई

राजपाल सरपंच को जब पता चला कि उसकी पत्नी मंदिर के तहखाने में बंद थी, वह तुरंत पुलिस स्टेशन गया। पुलिस मौके पर पहुंची, दोनों पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में किशोरनाथ पुजारी ने बताया कि उन्होंने अनुराधा देवी को भी खेत के घर में बंधक बना रखा है।

पुलिस ने खेत के घर पर जाकर ताला तोड़ा, अनुराधा देवी को बचाया। पूछताछ में अनुराधा देवी ने पूरी घटना पुलिस को बता दी। पुलिस ने दोनों पुजारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। जांच में पता चला कि ये दोनों पुजारी गांव में पुजारी बनकर आते थे, महिलाओं को अपने जाल में फंसाते थे और चोरी भी करते थे।

अध्याय 7: न्याय और जागरूकता

पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। गांव में जागरूकता फैली कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। गांव वालों ने एकजुट होकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाए। अनुराधा देवी और अलका देवी को न्याय मिला, गांव की महिलाओं ने उनका साथ दिया।

अनुराधा देवी ने अपनी दुकान फिर से शुरू की, लेकिन अब वह और सतर्क रहती थी। गांव की महिलाओं ने भी अब मंदिर में अकेले जाना बंद कर दिया। सरपंच राजपाल ने गांव में सीसीटीवी कैमरे लगवाए और महिलाओं के लिए सुरक्षा समिति बनाई।

अध्याय 8: नई शुरुआत

अनुराधा देवी ने अपने बेटे बबलू को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति से दूरी रखें। गांव के बच्चों को भी सतर्क किया गया। गांव में अब हर कोई एक-दूसरे का ध्यान रखता है। अनुराधा ने अपने बेटे की पढ़ाई पर और ध्यान दिया, ताकि वह बड़ा होकर गांव का नाम रोशन करे।

गांव की महिलाएं अब खुद को मजबूत महसूस करती थीं। मंदिर में अब सब मिलकर पूजा करते, कोई अकेला नहीं जाता। गांव में एक नई जागरूकता आई – सतर्कता और एकता।

अंतिम संदेश

यह कहानी हमें सिखाती है कि भरोसा और विश्वास जरूरी हैं, लेकिन सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही अहम हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए। समाज में बुरे इरादे वाले लोग भी हो सकते हैं, लेकिन एकजुटता और साहस से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है।

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जय हिंद! वंदे मातरम!

नोट:
यह कहानी फेसबुक कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स के अनुसार लिखी गई है, इसमें सभी संवेदनशील शब्दों को बदल दिया गया है और समाज में जागरूकता, सतर्कता, एकता का संदेश दिया गया है।
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