नकली मुस्लिम बनाकर मुस्लिम लड़की से शादी कर बैठा लड़की के भाई को पता चला तो
मोहब्बत का मजहब और राजीव का राज
अध्याय 1: हैदराबाद की शाम और एक खामोश मुलाकात
साल 2018 की बात है। हैदराबाद की एक बहुमंजिला इमारत के पास बने एक छोटे से पार्क में राजीव अक्सर ऑफिस से आने के बाद बैठा करता था। राजीव एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का था, जो बेगूसराय, बिहार से अपनी पढ़ाई पूरी कर यहाँ एक नामी कंपनी में नौकरी करने आया था। उसका स्वभाव शांत था और आँखों में भविष्य के सपने।
उसी पार्क में आयशा भी अपनी सहेलियों के साथ अक्सर आया करती थी। आयशा उसी सोसाइटी में रहती थी और अपने परिवार की चहेती थी। वह एम.ए. की पढ़ाई कर रही थी। एक शाम, जब पार्क में भीड़ कम थी, राजीव और आयशा की नजरें मिलीं। उस एक पल की खामोशी में ही कुछ ऐसा था जिसने दोनों के दिलों में हलचल पैदा कर दी।
अगले कुछ हफ्तों तक यह सिलसिला चलता रहा। कभी मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान होता, तो कभी बस एक-दूसरे को देख लेना ही काफी होता।
अध्याय 2: नाम का खुलासा और धर्म की दीवार
एक दिन आयशा ने हिम्मत जुटाई और राजीव के पास जाकर बैठने के लिए पूछा। बातचीत शुरू हुई। “आपका नाम क्या है?” राजीव ने पूछा। “मेरा नाम आयशा है,” उसने सादगी से जवाब दिया।
नाम सुनते ही राजीव जैसे जम गया। वह जानता था कि आयशा एक मुस्लिम है और वह हिंदू। उस वक्त समाज में धर्मों के बीच की खाई बहुत गहरी थी। लेकिन प्यार ने कब धर्म की दीवारें देखी हैं? जब आयशा ने उसका नाम पूछा, तो उसने बताया, “मेरा नाम राजीव है।”
आयशा भी कुछ पल के लिए ठिठकी, लेकिन फिर दोनों ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के व्यक्तित्व से प्यार कर चुके हैं, न कि उनके नाम या धर्म से। उन्होंने तय किया कि वे इस रिश्ते को आगे ले जाएंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
अध्याय 3: रहमान शेख का जन्म
2019 तक उनका प्यार परवान चढ़ चुका था। राजीव के घरवाले उस पर शादी का दबाव बना रहे थे। राजीव ने अपने माता-पिता को बताया कि उसने लड़की पसंद कर ली है। उधर आयशा के घर में उसके भाई समीर और उसके पिता काफी सख्त मिजाज के थे।
राजीव को पता था कि आयशा का परिवार एक हिंदू लड़के से उसकी शादी कभी नहीं करेगा। तब राजीव ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने कहा, “मैं तुम्हारे लिए मुसलमान नहीं बनूँगा, लेकिन तुम्हारे परिवार के सामने मुसलमान होने का नाटक जरूर करूँगा ताकि हम साथ रह सकें।”
उसने अरबी सीखी, नमाज पढ़ने का तरीका सीखा, कलमा याद किया और यहाँ तक कि ‘रहमान शेख’ के नाम से फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए। वह अब पूरी तरह से एक मुस्लिम युवक की तरह व्यवहार करने लगा था।
अध्याय 4: निकाह और समीर का शक
नवंबर 2019 में, राजीव ‘रहमान शेख’ बनकर आयशा के घर पहुँचा। उसने खुद को एक अनाथ मुस्लिम लड़का बताया जिसकी अच्छी नौकरी है। आयशा के परिवार को लड़का पसंद आया और बड़ी सादगी से दोनों का निकाह हो गया। राजीव और आयशा अब पति-पत्नी थे और अपनी अलग दुनिया में खुश थे।
हालांकि, एक दिन जब आयशा का भाई समीर उन्हें गाड़ी से कहीं ले जा रहा था, तो रास्ते में एक मंदिर पड़ा। अनजाने में राजीव के हाथ जुड़ गए और उसका सिर झुक गया। समीर ने शीशे में यह देख लिया। “जीजाजी, आपने मंदिर को सजदा क्यों किया?” समीर ने शक से पूछा। राजीव ने बात संभाली, “समीर, खुदा तो हर जगह है। चाहे इबादतगाह हो या मंदिर, ऊपर वाला एक ही है।”
समीर उस वक्त तो चुप रहा, लेकिन उसने रहमान (राजीव) के दस्तावेजों की जांच की। उसे रहमान का बर्थ सर्टिफिकेट और आधार कार्ड सब सही मिला, जिससे उसका शक कुछ समय के लिए दब गया।
अध्याय 5: चाय की मेज पर खुला राज
वक्त बीतता गया और सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन समीर बाजार में अपने बचपन के दोस्त सुरेंद्र से मिला। दोनों एक होटल में चाय पीने बैठे। समीर ने अपना फोन टेबल पर रखा था।
तभी राजीव (रहमान) का फोन समीर के पास आया। स्क्रीन पर ‘जीजाजी’ लिखा था और राजीव का फोटो फ्लैश हो रहा था। फोटो देखते ही सुरेंद्र चौंक गया। “अरे! ये तो राजीव है। ये तुम्हारे फोन में क्या कर रहा है?” सुरेंद्र ने पूछा। समीर हंसा, “अरे नहीं भाई, ये मेरे जीजाजी रहमान शेख हैं।”
सुरेंद्र ने जोर देकर कहा, “तू पागल हो गया है? ये मेरे गाँव का राजीव है। हम साथ पढ़े-बढ़े हैं। ये तो हिंदू है!” समीर के पैरों तले जमीन खिसक गई। सुरेंद्र ने अपने फोन से राजीव की गाँव वाली तस्वीरें दिखाईं। समीर का खून खौल उठा। उसे लगा कि उसके धर्म और उसकी बहन के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।
अध्याय 6: थाने का ड्रामा और सच्चाई की जीत
समीर तुरंत घर पहुँचा और हंगामा खड़ा कर दिया। वह राजीव को खींचकर थाने ले गया और ‘धोखाधड़ी’ की एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने राजीव को हिरासत में ले लिया। लेकिन जब आयशा थाने पहुँची, तो उसने जो कहा उसने सबको हैरान कर दिया।
आयशा ने पुलिस के सामने बयान दिया, “साहब, मुझे पहले दिन से पता था कि मेरा पति हिंदू है। इसने मुझे कोई धोखा नहीं दिया। हमने एक-दूसरे के लिए यह सब किया ताकि हम साथ रह सकें। इसने मेरे मजहब का पूरा सम्मान किया है।”
पुलिस ने कानूनन उन्हें छोड़ दिया क्योंकि दोनों बालिग थे और आपसी सहमति से साथ रह रहे थे। लेकिन समाज और परिवार ने उनसे नाता तोड़ लिया। राजीव के घरवाले और आयशा के घरवाले, दोनों ने उन्हें घर से निकाल दिया।
अध्याय 7: एक नई शुरुआत
राजीव और आयशा अकेले पड़ गए थे, लेकिन उनके पास एक-दूसरे का साथ था। कुछ महीने बीतने के बाद, राजीव के माता-पिता ने महसूस किया कि उनका बेटा गलत नहीं था, उसने सिर्फ प्यार के लिए कुर्बानी दी थी। धीरे-धीरे आयशा के परिवार का गुस्सा भी शांत हुआ।
आज राजीव और आयशा अपनी पहचान के साथ जी रहे हैं। आयशा अपने धर्म का पालन करती है और राजीव अपने। उन्होंने तय किया है कि उनके बच्चों को दोनों धर्मों की अच्छी बातें सिखाई जाएंगी। यह कहानी साबित करती है कि जब प्यार सच्चा हो, तो वह हर मुश्किल को पार कर लेता है।
निष्कर्ष: मजहब दिल जोड़ने के लिए होता है, तोड़ने के लिए नहीं। राजीव और आयशा की यह कहानी आज भी हैदराबाद की गलियों में एक मिसाल के तौर पर सुनी जाती है।
News
करोड़पति लड़की 80 फीट ऊँचे झूले पर फँस गई… गरीब लड़के ने जो किया, पूरा मेला देखता रह गया…
करोड़पति लड़की 80 फीट ऊँचे झूले पर फँस गई… गरीब लड़के ने जो किया, पूरा मेला देखता रह गया… इंसानियत…
बिना टिकट लड़की को First AC में ले गया TTE! फिर कांप उठी लड़की
बिना टिकट लड़की को First AC में ले गया TTE! फिर कांप उठी लड़की सफर का विश्वासघात: जब रक्षक ही…
Punjab Wedding पर उड़े 10 करोड़? | 8.5 Crore Viral Video का सच सामने आया
Punjab Wedding पर उड़े 10 करोड़? | 8.5 Crore Viral Video का सच सामने आया 14 फरवरी, वैलेंटाइन डे का…
आर्मी की बहन को सबके सामने बेइज्जत किया.. फिर आर्मी ने जो किया
आर्मी की बहन को सबके सामने बेइज्जत किया.. फिर आर्मी ने जो किया वर्दी का गुरूर और फौजी का इंसाफ…
बिहारी मजदूर और कॉलेज की लड़कियां एक ही बस में जाती थीं और फिर जो हुआ |
बिहारी मजदूर और कॉलेज की लड़कियां एक ही बस में जाती थीं और फिर जो हुआ | बस का वो…
कावड़ लेने गई बेटी के साथ गलत होने पर पिता ने रच दिया इतिहास/
कावड़ लेने गई बेटी के साथ गलत होने पर पिता ने रच दिया इतिहास/ अचलखेड़ा का न्याय: एक पिता और…
End of content
No more pages to load






