पति ने पत्नी से परेशान होकर उठाया गलत कदम और अंजाम ठीक नहीं हुआ/

बावली गांव का दोहरा हत्याकांड: जब रिश्तों ने तोड़ी मर्यादा
राजस्थान के उदयपुर जिले में ‘बावली’ नाम का एक शांत गांव है। इसी गांव में अमरपाल सिंह का परिवार रहता था। अमरपाल गांव के सबसे प्रतिष्ठित और धनी व्यक्तियों में से एक थे। उनके पास 26 एकड़ उपजाऊ जमीन, आलीशान हवेली, अपार धन और समाज में गहरा रुतबा था। अमरपाल की उदारता के कारण पूरा गांव उनकी इज्जत करता था, लेकिन उनकी पत्नी के देहावांत के बाद उनका व्यक्तित्व पूरी तरह बदल गया।
पत्नी की मृ/त्यु ने उन्हें अकेला कर दिया था, और इसी अकेलेपन को भरने के लिए उन्होंने ग/लत रास्तों का चुनाव कर लिया।
अमरपाल सिंह का पतन और विलासिता
पत्नी के जाने के बाद अमरपाल सिंह शराब, कबाब और शबाब के शौकीन हो गए। उनका नैतिक पतन इस हद तक हो गया कि वे मजबूर और गरीब महिलाओं को मदद का लालच देकर अपने खेत में ले जाते थे और उनके साथ ग/लत काम किया करते थे। गांव में उनका खौफ और पैसा इतना था कि कोई उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था।
अमरपाल सिंह के परिवार में उनका इकलौता बेटा रजनीश था। रजनीश अपने पिता से बिल्कुल विपरीत गुणों वाला था। वह बेहद मेहनती, ईमानदार और सीधा-साधा युवक था। वह दिन-रात खेतों में कोल्हू के बैल की तरह काम करता था। रजनीश ने जब से खेती की कमान संभाली थी, परिवार की आय और बढ़ गई थी। लेकिन, अमरपाल अपने बेटे की मेहनत की कोई कद्र नहीं करते थे। वे रजनीश को जेब खर्च के लिए भी तरसाते थे और छोटी-छोटी बातों पर उसे अपमानित करना अपना अधिकार समझते थे।
तीन साल पहले रजनीश की शादी पूनम से हुई थी। पूनम देखने में अत्यंत सुंदर और महत्वाकांक्षी महिला थी। लेकिन वह अपने पति रजनीश को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी, क्योंकि रजनीश का रंग काफी काला था और वह स्वभाव से बहुत सीधा था। पूनम को ऐशो-आराम और गहनों का शौक था, जो उसका पति पूरा नहीं कर पा रहा था।
पूनम और अमरपाल के बीच पनपता अप/वित्र संबंध
कहानी में निर्णायक मोड़ 2 जनवरी 2026 को आया। वह रजनीश और पूनम की शादी की सालगिरह का दिन था। पूनम ने रजनीश से एक सोने के हार की मांग की। रजनीश जब डरते-डरते अपने पिता अमरपाल के पास पैसे मांगने गया, तो अमरपाल आगबबूला हो गए। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, “तुम्हारी पत्नी के पास पहले से ही बहुत गहने हैं, वह बेफिजूल खर्च करती है। मेरे पास फालतू पैसे नहीं हैं।” रजनीश निराश होकर लौट आया।
उसी समय, पड़ोस की एक विधवा महिला, रूपा, अमरपाल के पास मदद मांगने आई। उसे घर के लिए सामान खरीदने हेतु ₹50,000 की जरूरत थी। अमरपाल ने बड़ी उदारता दिखाते हुए कहा, “पैसे मिल जाएंगे, लेकिन मैं खुद रात को तुम्हारे घर देने आऊंगा।” पूनम ने यह सब खिड़की से देख लिया और उसे समझ आ गया कि उसका ससुर घर के पैसे बाहर की औरतों पर लुटा रहा है।
पूनम ने अब एक खतरनाक योजना बनाई। उसने तय किया कि वह अपने ससुर को अपने प्रेम जाल में फंसा लेगी ताकि घर का सारा पैसा और रुतबा उसकी उंगलियों पर हो। उसने अपने पति की सेवा छोड़कर ससुर की चाटुकारिता शुरू कर दी। वह अमरपाल के लिए उनकी पसंद का खाना बनाती, उनके पैर दबाती और हर समय उनके आसपास रहने लगी।
एक रात जब रजनीश खेत पर था, अमरपाल शराब के नशे में थे। पूनम ने मौका देखकर उन्हें उकसाया और कहा, “पिताजी, जब घर में ही कोहिनूर हीरा छिपा है, तो आप बाहर रूपा जैसी औरतों के पास क्यों जाते हैं? आज की रात मैं आपका साथ दूंगी।” अमरपाल की नियत डोल गई। उन्होंने अपनी ही बहू के साथ ग/लत रिश्ते कायम कर लिए। अगले ही दिन अमरपाल ने पूनम के लिए शहर जाकर एक महंगा सोने का हार और अंगूठी खरीदी। अब ससुर और बहू का यह अवैध प्रेम प्रसंग खुलेआम चलने लगा।
रजनीश का संदेह और खौफनाक अंत
रजनीश को अपनी पत्नी के तेवरों में बदलाव नजर आने लगा था। पूनम अब घर का काम नहीं करती थी और हर समय ससुर के पक्ष में रहती थी। इसी बीच, 10 मार्च 2026 को अमरपाल ने रजनीश को ₹15,000 देकर शहर भेजा ताकि वह नया मोबाइल खरीद सके। यह दरअसल रजनीश को घर से दूर रखने की एक चाल थी।
जब रजनीश बस स्टैंड पर था, उसे उसकी अनुराधा चाची मिली। अनुराधा ने उसे टोकते हुए कहा, “रजनीश, तू बहुत भोला है। तेरे घर में तेरे पिता और तेरी पत्नी के बीच कुछ ग/लत चल रहा है। वह 24 में से 18 घंटे घर के अंदर बंद रहते हैं।” यह सुनकर रजनीश का खून खौल उठा। वह शहर जाने के बजाय चुपके से घर वापस लौट आया।
घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। रजनीश दीवार फांदकर अंदर घुसा और अपने बेडरूम की खिड़की से जो देखा, उसने उसके होश उड़ा दिए। उसके पिता और उसकी पत्नी आपत्तिजनक स्थिति में थे। रजनीश ने जब दरवाजा तोड़ा, तो अमरपाल ने बेशर्मी से कहा, “मैं तुम दोनों को पैसे देता हूँ, तुम्हारी जरूरतें पूरी करता हूँ, तो अगर मैं तुम्हारी पत्नी के साथ थोड़ा वक्त बिता लूं, तो क्या बुरा है?”
यह सुनकर रजनीश का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उसने पास पड़ी गंडासी उठाई और अपने पिता के सिर पर ताबड़तोड़ तीन-चार वार किए। अमरपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। पूनम चीखते हुए भागने लगी, लेकिन रजनीश ने उसे पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर गंडासी से तब तक वार किए जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं।
न्याय और सामाजिक संदेश
खून से लथपथ रजनीश वहीं बैठ गया। शोर सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हुए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर अमरपाल और पूनम के शव बरामद किए और रजनीश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में रजनीश ने रोते हुए सारी सच्चाई बताई कि कैसे उसके अपनों ने ही उसके साथ विश्वासघात किया था।
समाज में इस घटना ने गहरा विवाद खड़ा कर दिया। कुछ ने रजनीश के कृत्य को सही ठहराया, तो कुछ ने कानून हाथ में लेने को ग/लत कहा। लेकिन यह सच है कि इस दोहरे हत्याकांड की नींव उसी दिन पड़ गई थी जब रिश्तों की मर्यादा को तार-तार किया गया था।
यह घटना हमें सचेत करती है कि अनैतिकता, वासना और मर्यादा का उल्लंघन अंततः विनाश की ओर ही ले जाता है।
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