पत्नी को हर खुशी दी… फिर भी पति को छोड़ गई | फिर जो हुआ |

बेवफाई की दहलीज़ और आत्म-सम्मान: अभय और दिव्या की दास्तान

कहते हैं कि कभी-कभी इंसान घर होते हुए भी किसी दूसरे की छत ढूंढता है, और तब जिसे वह पीछे छोड़ आता है, वह सिर्फ एक इंसान नहीं, उसकी पूरी दुनिया होती है। यह कहानी अभय की है, जिसकी शादी को महज दो साल हुए थे। लेकिन इन दो सालों में उसका जीवन खुशियों के बगीचे से सूखकर रेगिस्तान बन गया था।

बदलती निगाहें और मोबाइल की स्क्रीन

अभय और दिव्या की शादी बड़े अरमानों से हुई थी। शादी से पहले दिव्या, अभय की आँखों में झांकती थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद वह मोबाइल की स्क्रीन में छुपने लगी। वह दिव्या, जो पहले अभय के आने की आहट से मुस्कुराती थी, अब उसके देर से लौटने पर बस एक ठंडी और बेरुखी भरी आवाज में पूछती थी—”खा लिया?”

अभय ने शुरुआत में कुछ नहीं कहा, क्योंकि प्यार में श/क की जगह नहीं होती। उसे लगा शायद दिव्या किसी बात को लेकर परेशान है। लेकिन एक दिन जब वह ऑफिस से लौटा, तो उसने दिव्या को छत पर फोन पर बात करते देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो अभय के लिए कब की खो चुकी थी। जब अभय ने पूछा, तो उसने मायके का बहाना बना दिया।

वह संदेश जिसने दिल थाम दिया

उसी रात, जब दिव्या नहा रही थी, उसका फोन ड्रेसिंग टेबल पर बज उठा। स्क्रीन पर लिखा आया—“आई मिस यू जान”। अभय का दिल थम गया। हाथ कांपने लगे, लेकिन उसने फोन नहीं छुआ। उसने उस रात कुछ नहीं कहा, न अगले दिन, न उस हफ्ते। वह बस दिव्या को टूटकर देखता रहा, जैसे कोई अपनी सबसे कीमती चीज को बिखरते हुए देखता है।

दिव्या अब ज्यादा बाहर जाने लगी थी। कभी सहेली से मिलने का बहाना, तो कभी शॉपिंग की बात। वह सजती-संवरती थी, लेकिन अभय के लिए नहीं, बल्कि उस अजनबी के लिए, जो उसे देर रात हँसाता था। जब अभय ने प्यार से बात करने की कोशिश की, तो दिव्या ने उस पर ‘श/क’ करने का इल्जाम लगा दिया।

सरेआम हुआ सच का सामना

एक सुबह अभय ऑफिस के लिए निकला, लेकिन अपना फोन घर भूल गया। जब वह वापस लौटा, तो उसने जो देखा उसने उसे अंदर तक झकझोर दिया। दिव्या किसी से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी और पूछ रही थी—”कब मिलोगे अब?” सामने से जवाब आया—”जल्द ही, और इस बार हमेशा के लिए।”

अभय वहीं ठिठक गया। वह चीख सकता था, तोड़-फोड़ कर सकता था, लेकिन उसने चुप्पी साध ली। वह चुपचाप अपना फोन उठाकर चला गया। उस दिन ऑफिस में काम करना उसके लिए नामुमकिन था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी मोहब्बत में क्या कमी रह गई थी।

वह रात जब सब खत्म हो गया

एक रविवार की रात, दिव्या देर रात 3:00 बजे घर लौटी। वह नशे में लड़खड़ा रही थी और उसके चेहरे पर शर्म के बजाय एक ठंडापन था। उसने ताना मारते हुए पूछा, “कुछ पूछोगे नहीं?” अभय ने शांति से जवाब दिया, “अब क्या पूछना बचा है? तुम सब तो अपनी चुपियों में पहले ही बता चुकी हो।”

अगले दिन दिव्या ने एक चिट्ठी छोड़ी और घर छोड़कर चली गई। उस चिट्ठी में उसने लिखा था कि वह इस रिश्ते में ‘घुट’ रही थी और उसे ‘आजादी’ चाहिए थी। उसने अभय को दोषी ठहराया कि उसने उसे सिर्फ एक ‘बीवी’ बनाकर रखा, एक आजाद इंसान नहीं। वह अपनी पहचान ढूंढने के नाम पर उस अजनबी (अमन) के पास चली गई।

आईना और पछतावे की वापसी

छह महीने बीत गए। अभय ने खुद को मजबूत बनाया। उसने बिना जवाबों के जीना सीख लिया था। लेकिन एक शाम दरवाजे पर फिर दस्तक हुई। सामने दिव्या खड़ी थी। पर वह पुरानी दिव्या नहीं थी। उसकी आँखों में न चमक थी, न आत्मविश्वास। वह टूट चुकी थी।

वह अभय के पैरों में गिरकर रोने लगी। “माफ कर दो अभय, अमन ने मुझे छोड़ दिया। वह किसी और का हो गया। मुझे अब समझ आया कि प्यार क्या होता है।”

अभय पत्थर की तरह अडिग खड़ा रहा। उसने उसे ऊपर नहीं उठाया। उसने बहुत शांत स्वर में कहा— “दिव्या, माफी उसे दी जाती है जिसने गलती की हो। तुमने तो गु/नाह किया है। तुम्हारी सबसे बड़ी सजा यही है कि जिससे तुमने प्यार किया, वह अब किसी और का हो गया, और जिसने तुम्हें सबसे सच्चा प्यार दिया, वह अब तुम्हारा नहीं रहा।”

अभय ने दरवाजा खोला और दिव्या से कहा—”अब जाओ, मुझसे नहीं खुद से माफी मांगो।”

निष्कर्ष

दिव्या अब न घर की रही, न घाट की। उसके पास बचा था तो बस अनंत पछतावा और तन्हाई। अभय ने अपने आत्म-सम्मान को चुनकर यह साबित कर दिया कि वफादारी का सौदा किसी भी कीमत पर नहीं किया जा सकता।

एक सवाल आपके लिए: अगर आप अभय की जगह होते, तो क्या दिव्या को उसके पछतावे के बाद माफ कर देते? या फिर आप भी वही करते जो अभय ने किया? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।