पार्टी में पति से सैंडल साफ़ करवाई फिर..| स्वाभिमानी पति का बदला..

औकात और इंसानियत
(Swabhimaan aur Badle ki Kahani)
भूमिका
यह कहानी है ईशा रॉय की, जो अपने घमंड में चूर एक अमीर बिजनेस वूमन थी, और उसके पति कबीर की, जिसे वह अपना नौकर समझती थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि वही पति उसके जीवन का मालिक बन गया, और ईशा को अपनी औकात का असली मतलब समझ आया।
1. घमंड की सुबह
सुबह के 8:00 बजे थे। रॉय मेंशन के डाइनिंग हॉल में सन्नाटा था। तभी ईशा की तेज आवाज गूंजी,
“कबीर, तुम्हें 10 बार आवाज लगानी पड़ेगी क्या? मेरी ब्लैक कॉफी कहां है?”
किचन से कबीर हाथ में मग लेकर जल्दी-जल्दी आया।
“सॉरी ईशा, मशीन में कुछ दिक्कत थी…”
ईशा ने बिना सुने ही मग झटक कर जमीन पर गिरा दिया। गर्म कॉफी के छींटे कबीर के जूतों पर पड़े, लेकिन ईशा को कोई फर्क नहीं पड़ा।
“बहाने मत बनाओ! तुम जैसे घरजमाई को और काम ही क्या है? मेरे पिता ने तुम्हें सड़क से उठाकर मेरा पति बना दिया, तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम मेरे बराबर हो गए!”
कबीर ने सिर झुका लिया।
“ईशा, मैं तुम्हारा पति हूं, कम से कम थोड़ी इज्जत…”
“शट अप! पति सिर्फ कागजों पर हो, हकीकत में तुम मेरे लिए बस एक गलती हो, एक बोझ। जिस दिन मुझे एंपायर ग्रुप की डील मिल गई, उसी दिन मैं तुम्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दूंगी। तलाक चाहिए मुझे!”
मिस्टर रॉय व्हीलचेयर पर वहां आए और दुखी होकर बोले,
“ईशा, ये कैसा व्यवहार है? कबीर ने इस घर के लिए क्या नहीं किया?”
“डैड, प्लीज! इस भिखारी की तरफदारी मत कीजिए। आज मेरी लाइफ का सबसे बड़ा दिन है। मूड खराब मत कीजिए!”
कबीर ने मिस्टर रॉय को शांत रहने का इशारा किया और ईशा के लिए नाश्ता परोसने लगा, जैसे कोई वेटर हो।
2. अपमान की पार्टी
शाम को रॉय मेंशन में ग्रैंड पार्टी थी। ईशा आज बेहद खूबसूरत लग रही थी, उसके साथ विक्रम खड़ा था, जो कबीर को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता था। कबीर ने वही पुराना सूट पहना था, जो शादी के समय मिला था, और जूस के गिलास सर्व कर रहा था।
विक्रम ने सबका ध्यान खींचते हुए कहा,
“मिलिए मिस्टर कबीर से! काम तो वेटर का, किस्मत राजाओं वाली!”
पूरी पार्टी में लोग हंसने लगे। ईशा को शर्म महसूस हुई कि कबीर उसका पति है।
“कबीर, यहाँ आओ!”
ईशा ने सबके सामने बुलाया।
“मेरे सैंडल पर ड्रिंक गिर गई है, इसे साफ करो!”
पूरा हॉल सन्नाटे में डूब गया। मिस्टर रॉय को धक्का लगा।
“ईशा, ये तुम क्या कह रही हो? वह तुम्हारा पति है।”
“तो क्या हुआ डैड? पति है तो क्या मेरे पैरों में नहीं झुक सकता?”
कबीर ने गहरी सांस ली, ईशा की आंखों में देखा, जहां प्यार नहीं, सिर्फ नफरत थी। वह नीचे झुका, लेकिन सैंडल साफ नहीं की। जेब से रुमाल निकाला, जमीन पर डाला और खड़ा हो गया।
“ईशा, मैंने यह शादी मजबूरी में तुम्हारे पिता की इज्जत रखने के लिए की थी। सोचा था वक्त के साथ तुम मुझे पति मानोगी, लेकिन आज तुमने साबित कर दिया कि तुम्हारे पास पैसा है, पर एक औरत की गरिमा नहीं।”
ईशा चिल्लाई, “जुबान लड़ाता है मुझसे!”
कबीर ने कोट उतारकर फेंक दिया,
“मुबारक हो, आज से तुम आजाद हो। और रही बात डील की, दुआ करना कि उनका सीईओ तुम्हारी तरह घमंडी न हो।”
विक्रम की ओर देखा,
“तुम्हारा वक्त भी खत्म हुआ।”
कबीर तेज कदमों से बाहर निकल गया। ईशा चिल्लाती रही,
“दफा हो जाओ, दोबारा अपनी शक्ल मत दिखाना!”
3. किस्मत का पलटाव
कबीर मूसलाधार बारिश में बाहर आया। तभी एक काली Rolls Royce और SUV उसके सामने आकर रुकीं। चार बॉडीगार्ड्स छाता लेकर दौड़े। ड्राइवर ने झुककर दरवाजा खोला,
“गुड इवनिंग सर, हेड ऑफिस चलें?”
कबीर ने फोन निकाला और नंबर डायल किया,
“मैं कबीर सिंघानिया, सीईओ ऑफ एंपायर ग्रुप। रॉय इंडस्ट्रीज के साथ कल की डील कैंसिल कर दो। और मार्केट में खबर फैला दो कि रॉय इंडस्ट्रीज डूबने वाली है। देखना चाहता हूं कि बिना पैसों के ईशा का घमंड कितने दिन टिकता है।”
कबीर ने पीछे मुड़कर रॉय मेंशन को देखा,
“खेल अब शुरू हुआ है, मिसेज वाइफ।”
4. घमंड का पतन
रॉय मेंशन में पार्टी चल रही थी, लेकिन माहौल बदल चुका था। ईशा गुस्से में बड़बड़ा रही थी,
“उस नौकर की इतनी हिम्मत? उसने मेरा मूड खराब कर दिया!”
विक्रम बोला,
“छोड़ो ना ईशा, कचरा घर से बाहर गया अच्छा हुआ। अब सेलिब्रेट करते हैं। डील पक्की होते ही हमारी कंपनी की वैल्यू 10 गुना बढ़ जाएगी।”
तभी मिस्टर खन्ना दौड़ते हुए आया,
“मैम, बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है। एंपायर ग्रुप ने डील कैंसिल कर दी है, और हमारे खिलाफ फ्रॉड का केस भी फाइल कर दिया है। मार्केट में खबर फैल गई है, इन्वेस्टर्स पैसे वापस मांग रहे हैं। शेयर 40% गिर चुके हैं!”
ईशा के हाथ से वाइन का ग्लास गिर गया।
“क्या पागल हो गए हो? अचानक कैसे?”
विक्रम का फोन भी बजा,
“मेरी फैक्ट्री पर रेड? कौन करवा रहा है यह सब?”
मिस्टर रॉय सब सुन रहे थे,
“मैंने कहा था, किसी के आंसू तुम्हें भारी पड़ेंगे। उस लड़के को निकालकर तुमने अपनी किस्मत को ठोकर मारी है।”
ईशा ने गुस्से में एंपायर ग्रुप के हेड ऑफिस कॉल किया,
“मुझे अभी मिस्टर कबीर सिंघानिया से बात करनी है!”
रिसेप्शनिस्ट ने जवाब दिया,
“मिस्टर सिंघानिया किसी से बात नहीं करते। आपके लिए मैसेज छोड़ा है – अगर कंपनी बचानी है तो कल सुबह 9 बजे ऑफिस आ जाइए। 1 मिनट भी लेट हुई तो रॉय इंडस्ट्रीज का नामोनिशान मिट जाएगा।”
ईशा पहली बार डर गई थी। पूरी रात किसी को नींद नहीं आई। अगली सुबह 8:55 पर ईशा और विक्रम एंपायर ग्रुप के टावर के सामने खड़े थे।
5. औकात का सामना
50वीं मंजिल पर लिफ्ट खुली। सामने CEO का बड़ा दरवाजा।
ईशा ने दरवाजा खोला। अंदर कबीर बैठा था, अब फटे कपड़ों में नहीं, लाखों के इटालियन सूट में।
“स्वागत है मेरे ऑफिस में, ईशा। कॉफी पियोगी या फिर जमीन पर गिराने की आदत अभी भी है?”
ईशा के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला,
“कबीर…”
विक्रम चिल्लाया,
“तुमने जरूर यह सब चोरी किया है!”
कबीर ने हंसते हुए सिक्योरिटी बुला ली,
“आज देखना चाहता हूं कि जब औकात बदलती है तो जुबान कैसे बदलती है।”
कबीर ईशा के पास आया,
“कल तो तुम चिल्ला-चिल्ला कर मुझे औकात याद दिला रही थी। आज कपड़े बदल गए, लेकिन मैं वही कबीर हूं, और तुम वही ईशा। फर्क इतना है कि आज तुम मेरे रहमोकरम पर हो।”
ईशा की आंखों से आंसू बहने लगे,
“कबीर, प्लीज मुझे माफ कर दो। डैड की खातिर कंपनी को मत बर्बाद करो।”
“डैड की खातिर?” कबीर की आवाज सख्त हो गई,
“जिस पिता ने तुम्हें राजकुमारी की तरह पाला, तुमने उनके संस्कारों का तमाशा बना दिया। मैंने शादी की थी क्योंकि मिस्टर रॉय ने मेरे बुरे वक्त में मेरे पिता की मदद की थी। लेकिन तुमने अपने घमंड में सब खत्म कर दिया।”
विक्रम गिड़गिड़ाने लगा,
“सर, मेरी कोई गलती नहीं है। यह सब ईशा का किया है!”
कबीर ने विक्रम को धक्का देकर दूर किया,
“देखो ईशा, तुम्हारी पसंद! यह तुमसे नहीं, तुम्हारे पैसे से प्यार करता था।”
कबीर ने पुलिस को बुला लिया,
“विक्रम, तुम्हारी फैक्ट्री के इललीगल पेपर्स हैं। फ्रॉड और टैक्स चोरी में 10 साल की जेल होगी।”
सिक्योरिटी विक्रम को घसीटते हुए बाहर ले गई।
6. समझौते की सजा
अब कमरे में सिर्फ कबीर और ईशा बचे थे।
“अब आपकी बारी, ईशा रॉय।”
“कबीर, मैं हाथ जोड़ती हूं। डैड यह सब बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। जो बोलोगे करूंगी, बस कंपनी को मत नीलाम करो।”
“ठीक है, रॉय इंडस्ट्रीज का कर्ज मैं चुका दूंगा, लेकिन बदले में रॉय मेंशन, गाड़ियां, बैंक बैलेंस सब एंपायर ग्रुप के नाम। और तुम अगले 6 महीने तक मेरी पर्सनल असिस्टेंट, यानी नौकर बनकर मेरे घर में रहोगी। वही काम करोगी जो मैं कल तक तुम्हारे घर में करता था।”
ईशा के पास कोई रास्ता नहीं था। कांपते हाथों से एग्रीमेंट साइन किया।
“कल सुबह 6 बजे मेरे घर रिपोर्ट करना। 1 मिनट भी लेट हुई तो डील कैंसिल।”
7. औकात का असली मतलब
अगली सुबह 6 बजे ईशा कबीर के आलीशान बंगले के गेट पर खड़ी थी। नौकर ने सलवार-कमीज थमाई,
“सर ने कहा है कि आपको सर्वेंट क्वार्टर में रहना होगा।”
ईशा ने कपड़े पहने, किचन में गई। इंटरकॉम बजा,
“मेरी ब्लैक कॉफी लेकर ऊपर आओ!”
ईशा के हाथ कांपने लगे। जल्दी-जल्दी कॉफी बनाई, ट्रे लेकर ऊपर पहुंची।
“सर, आपकी कॉफी…”
कबीर ने कप चखा,
“इतनी ठंडी कॉफी? तुम्हें सिंपल कॉफी बनाना भी नहीं आता?”
“सॉरी, मैं अभी दूसरी लाती हूं।”
“रुको, तुम्हें याद है जब मैंने तुम्हारे लिए कॉफी बनाई थी और मशीन खराब थी, तो तुमने क्या किया था? तुमने वो गर्म कॉफी मेरे पैरों पर गिरा दी थी।”
ईशा की आंखें शर्म से झुक गईं।
“डरो मत, मैं वो नहीं करूंगा जो तुमने किया था। फर्क यही है मुझमें और तुममें। जब तक सही नहीं बनेगी, तब तक बनाती रहो।”
ईशा किचन में वापस गई, रोते-रोते कॉफी बनाई। दिन भर झाड़ू-पोछा, पौधों को पानी, कपड़े प्रेस, शाम तक कमर टूट गई। भूख से बेहाल थी, लेकिन खाने का वक्त नहीं मिला।
8. अपमान की आग
रात को कबीर ने डिनर होस्ट किया। ईशा को सर्व करने के लिए बुलाया। मेहमान वही पुराने दोस्त थे, जो कल तक ईशा की तारीफ करते नहीं थकते थे। तान्या ने ट्रे पकड़े ईशा को देखा,
“ओह माय गॉड ईशा, तुम वेटर का काम कर रही हो!”
बाकी दोस्त हंसने लगे,
“यह वही ईशा है, जो कहती थी मिडिल क्लास लोग उसके पास खड़े नहीं हो सकते। आज खुद पानी पिला रही है!”
ईशा को लगा जैसे धरती फट जाए। वह रोने लगी।
मेहमानों के जाने के बाद ईशा कमरे में बैठकर फूट-फूटकर रोने लगी। तभी कबीर खाना लेकर आया,
“लो, खाना खा लो। सजा का मतलब भूखा मारना नहीं होता।”
ईशा कबीर के पैरों में गिर पड़ी,
“मुझे माफ कर दो। अब समझ आया मेहनत की कीमत क्या होती है।”
कबीर ने गंभीरता से कहा,
“माफी मांगना आसान है, भरोसा जितना मुश्किल। अभी तो एक दिन हुआ है, 6 महीने बाकी हैं। देखते हैं पछतावा असली है या थकान का असर।”
9. सच्चा पश्चाताप
रात को ईशा के फोन पर मैसेज आया –
“मिस्टर रॉय की तबीयत बिगड़ गई है, ऑपरेशन जरूरी है, खर्चा बहुत ज्यादा है।”
ईशा के पास फूटी कौड़ी नहीं थी, सारे अकाउंट्स कबीर के पास थे। वह नंगे पैर कबीर के कमरे में गई,
“कबीर, प्लीज मेरे डैड मर जाएंगे, ऑपरेशन के लिए पैसे चाहिए। मैं जिंदगी भर तुम्हारी गुलाम रहूंगी।”
कबीर ने ठंडे स्वर में पूछा,
“पैसे क्यों दूं? तुम्हारे पिता ने मेरी मदद की थी, उसका कर्ज चुका चुका हूं। अब हमारा हिसाब बराबर है।”
ईशा रोते हुए सिर पटकने लगी,
“मुझे मार डालो, लेकिन मेरे डैड को बचा लो।”
कबीर ने उसे उठाया, रिसीट थमाई,
“आंसू पोछ लो, ईशा। ऑपरेशन का पूरा बिल 2 घंटे पहले ही भर चुका हूं। ऑपरेशन शुरू हो चुका है, वह खतरे से बाहर हैं।”
ईशा फूट-फूटकर रोने लगी,
“थैंक यू कबीर। मैं तुम्हारी गुनहगार हूं।”
कबीर ने एग्रीमेंट फाड़ दिया,
“तुम्हें आजाद कर रहा हूं। मैं तुम्हें नौकर नहीं बनाना चाहता था, बस यह एहसास दिलाना चाहता था कि जब वक्त बदलता है, हैसियत बदल जाती है। असली अमीर वो है जो दूसरों का दर्द समझे। आज तुमने अपनी परवाह किए बिना अपने पिता के लिए भीख मांगी, तो यकीन हो गया कि पुरानी ईशा अब मर चुकी है।”
10. नई शुरुआत
“अब क्या होगा?” ईशा ने पूछा।
“रॉय मेंशन तुम्हारा है, वहां जा सकती हो। रॉय इंडस्ट्रीज अब एंपायर ग्रुप का हिस्सा रहेगी। चाहो तो वहां साधारण कर्मचारी की तरह नौकरी कर सकती हो, अपनी मेहनत से अपनी जगह वापस पा सकती हो। कोई खैरात नहीं मिलेगी।”
ईशा ने आत्मविश्वास के साथ कहा,
“मैं तैयार हूं, कबीर। मैं जीरो से शुरू करूंगी। साबित करूंगी कि मैं सिर्फ बिगड़ी हुई शहजादी नहीं, मिस्टर रॉय की बेटी हूं।”
11. सम्मान की वापसी
एक साल बाद एंपायर ग्रुप के ऑफिस में ईशा एक छोटी डेस्क पर फाइलों में दबी थी। उसने जूनियर मैनेजर के तौर पर अपनी काबिलियत साबित की थी। कबीर राउंड पर आया,
“मिस ईशा, यह प्रेजेंटेशन बहुत अच्छी थी। गुड वर्क।”
“थैंक यू सर,” ईशा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया।
कबीर जाने लगा, फिर रुका,
“शाम को फ्री हो? डैड ने डिनर पर बुलाया है। और हां, इस बार कॉफी मैं बनाऊंगा। मशीन ठीक करवा ली है मैंने।”
ईशा खिलखिलाकर हंस पड़ी,
“ठीक है, लेकिन अगर कॉफी खराब हुई तो मैं पंगी नहीं!”
अब उनके बीच कोई एग्रीमेंट नहीं था, बस एक गहरा सम्मान और एक नई शुरुआत थी, जो शायद आगे चलकर प्यार में बदल सकती थी।
ईशा ने मन ही मन सोचा,
“शुक्रिया कबीर, मेरे घमंड को तोड़ने के लिए और मुझे मेरी असली पहचान देने के लिए।”
सीख:
असली अमीर वही है, जो दूसरों का दर्द समझे। वक्त बदलता है, हैसियत बदलती है, लेकिन इंसानियत और सम्मान सबसे ऊपर है।
अंत
News
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