पोती ने परेशान होकर उठाया बड़ा कदम/गांव के सभी लोग दंग रह गए/

रिश्तों का कत्ल: बागपत की एक दर्दनाक दास्तां

उत्तर प्रदेश का बागपत जिला अपनी उपजाऊ भूमि और मेहनती किसानों के लिए जाना जाता है। इसी जिले में एक शांत सा गांव है—मवी कला। इस गांव की गलियां और खेत अपनी शांति के लिए पहचाने जाते थे, लेकिन साल 2025 और 2026 के बीच यहां एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल इस गांव को, बल्कि पूरे समाज को हिलाकर रख दिया।

1. परिवार और पृष्ठभूमि

मवी कला गांव में शीशपाल नाम का एक किसान रहता था। शीशपाल के पास चार एकड़ जमीन थी, जिस पर वह खेती-किसानी कर अपना गुजारा करता था। उसके परिवार में उसके बेटे अर्जुन की मृत्यु के बाद उसकी बहू पूजा और पोती अंजलि ही बची थीं। अंजलि 11वीं कक्षा की छात्रा थी और पढ़ाई में बहुत होनहार थी।

गांव वाले अक्सर अंजलि की प्रशंसा करते थे। अर्जुन की मौत के बाद शीशपाल ने ही इन दोनों का सहारा बनकर उन्हें संभाला था। लेकिन शीशपाल का व्यक्तित्व दोहरा था। बाहर से वह एक जिम्मेदार बुजुर्ग दिखता था, लेकिन भीतर से वह अनैतिक आदतों और बुरी प्रवृत्तियों का शिकार था।

2. मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का टूटना

4 दिसंबर 2025 का वह दिन इस परिवार के लिए दुर्भाग्य लेकर आया। सुबह के करीब 9:00 बजे अंजलि स्कूल जा चुकी थी। घर में पूजा अकेली थी। शीशपाल खेत से लौटा और उसकी नीयत अपनी ही बहू पर खराब हो गई। उसने पूजा से कुछ पैसों के बदले अनुचित साथ की मांग की।

पूजा ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा, “पिताजी, आप मेरे पिता के समान हैं, आपको ऐसी बात करते हुए शर्म आनी चाहिए।” लेकिन शीशपाल पर जैसे कोई जुनून सवार था। उसने पूजा को डराया-धमकाया और वहां से चला गया।

3. खेत का वह भयानक कमरा

कुछ ही देर बाद शीशपाल ने चाल चली। उसने फोन करके पूजा से माफी मांगी और उसे खाना लेकर खेत पर बुलाया। पूजा ने इसे अपने ससुर का पश्चाताप समझा और खाना लेकर खेत पर चली गई। लेकिन वहां शीशपाल नशे में धुत्त था। उसने पूजा को पानी लेने के बहाने कमरे के अंदर भेजा और पीछे से दरवाजा बंद कर दिया।

हथियार के बल पर उसने पूजा के साथ घोर दुराचार किया। उसने पूजा को धमकी दी कि यदि उसने यह बात किसी को बताई, तो वह उसे और उसकी बेटी अंजलि को जान से मार देगा। लोक-लाज और डर के मारे पूजा खामोश रह गई। उसने सोचा कि समाज में बदनामी होगी और अंजलि का भविष्य बर्बाद हो जाएगा।

4. मासूमियत पर वार

शीशपाल की हैवानियत यहीं नहीं रुकी। उसकी नजर अब अपनी पोती अंजलि पर थी। 11 दिसंबर 2025 को जब अंजलि ने स्कूल की फीस मांगी, तो शीशपाल ने कहा कि वह खुद उसे स्कूल छोड़ देगा और फीस भी जमा कर देगा।

वापसी में उसने अंजलि को झूठ बोला कि वह अपना मोबाइल खेत पर भूल गया है। वह मासूम बच्ची को खेत के उसी कमरे में ले गया। वहां उसने अपनी पोती के साथ भी वही घृणित काम किया जो उसने उसकी मां के साथ किया था। उसने अंजलि को भी जान से मारने की धमकी दी। अंजलि डर के मारे सहम गई और उसने अपनी मां को भी कुछ नहीं बताया।

5. खामोशी और दोहरा अत्याचार

मां और बेटी, दोनों एक ही छत के नीचे रहते हुए अपने-अपने दर्द को छिपा रही थीं। अंजलि ने स्कूल जाना कम कर दिया, वह अक्सर बीमार रहने का बहाना बनाती। वहीं पूजा भी भीतर ही भीतर घुट रही थी। शीशपाल अब जब भी मौका मिलता, दोनों का शोषण करता।

18 दिसंबर 2025 को जब अंजलि स्कूल गई, तो शीशपाल ने फिर से घर पर पूजा के साथ जबरदस्ती की। रिश्तों की मर्यादा पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। एक बुजुर्ग, जो संरक्षक था, वह भक्षक बन चुका था।

6. सत्य का प्रकटीकरण

25 जनवरी 2026 को पूजा की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे उल्टियां होने लगीं। जब उसने जांच की, तो पता चला कि वह गर्भवती हो गई है। उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगी, लेकिन उसे अंजलि का ख्याल आया।

उसी शाम जब अंजलि अपनी मां के पास आई, तो पूजा की खामोशी टूट गई। उसने रोते हुए अंजलि को सब बता दिया कि उसके दादा ने उसके साथ क्या किया। यह सुनकर अंजलि भी फूट-फूट कर रोने लगी और उसने अपना दर्द भी साझा किया। दोनों को पता चला कि वे दोनों एक ही दरिंदे का शिकार हुई हैं।

7. खूनी न्याय

9:30 बजे रात को शीशपाल नशे में फिर से घर आया और पूजा पर दबाव बनाने लगा। अंजलि के भीतर का गुस्सा अब ज्वालामुखी बन चुका था। उसने सोचा कि इस राक्षस का अंत जरूरी है, वरना यह उन्हें कभी जीने नहीं देगा।

अंजलि रसोई में गई, सब्जी काटने वाला चाकू उठाया और सोते हुए शीशपाल के गले पर वार कर दिया। शीशपाल की मौके पर ही मौत हो गई। शोर सुनकर पड़ोसी रामवीर वहां पहुंचा और पुलिस को सूचना दी।

8. कानून की चौखट पर

पुलिस ने अंजलि और पूजा को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान जब दोनों ने अपनी आपबीती सुनाई, तो पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। समाज में इस घटना की व्यापक चर्चा हुई। कई लोगों ने इसे अंजलि का साहस बताया, तो कानून के नजरिए से यह एक अपराध था।

निष्कर्ष

यह कहानी हमें सिखाती है कि खामोशी अक्सर अपराधी के हौसले बढ़ाती है। यदि पूजा ने पहली बार ही विरोध कर समाज या पुलिस को बताया होता, तो शायद अंजलि के साथ वह हादसा नहीं होता। रिश्तों की पवित्रता जब कलंकित होती है, तो उसका अंत अक्सर ऐसा ही भयावह होता है। अंजलि आज सुधार गृह में है, लेकिन समाज के सामने यह सवाल खड़ा है कि क्या उसकी परिस्थिति ने उसे हत्यारा बनाया?

नोट: यह कहानी समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लिखी गई है। किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ तुरंत आवाज उठाना ही सुरक्षा का पहला कदम है।