सावित्री देवी की न्याय यात्रा: अलवर की बेटियों का संघर्ष

भाग 1: अलवर के कमालपुर गांव की सुबह
आज की घटना राजस्थान के अलवर जिले के कमालपुर गांव से शुरू होती है। इस गांव में रहने वाली सावित्री देवी एक साधारण सी महिला हैं, जो गांव के छोटे से प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। सावित्री देवी हर महीने स्कूल से सिर्फ ₹1,000 कमाती हैं। यही उनकी घर-गृहस्थी का सहारा है। पांच साल पहले उनके पति की मृत्यु हो गई थी। अब घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है।
सावित्री देवी के परिवार में दो बेटियां हैं—बड़ी अनु और छोटी काजल। दोनों बेटियां कॉलेज में पढ़ती हैं। अनु और काजल हर सुबह 9 बजे कॉलेज जाती हैं, शाम 4:30 बजे घर लौटती हैं। पढ़ाई में दोनों तेज और होशियार हैं। मां सावित्री देवी का सपना है कि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करें और उनका जीवन सफल हो जाए।
भाग 2: सपनों की दरारें
लेकिन सावित्री देवी नहीं जानती थीं कि उनके सपनों में दरार आने वाली है। अनु और काजल जिस कॉलेज में पढ़ती थीं, वहां दूसरे गांव का एक लड़का भी आता था—प्रताप। प्रताप के पिता पुलिस दरोगा थे, इसलिए प्रताप को हमेशा जेब खर्च के लिए खूब पैसे मिलते थे। प्रताप बिगड़ैल था। कॉलेज की हर लड़की पर उसकी नजर रहती थी, यहां तक कि महिला टीचरों पर भी।
अनु और काजल को यह पता नहीं था कि प्रताप उनके जीवन में तूफान लाने वाला है। दिन बीतते गए, एक दिन आया—15 अक्टूबर 2025। सुबह अनु ने मां से कहा, “मां, आज कॉलेज की फीस जमा करनी है।” सावित्री देवी ने ₹12,000 अनु को दिए, “फीस जमा कर देना।”
दोनों बहनें बस स्टैंड पहुंचीं। बस में भीड़ थी, सीट नहीं मिली, लेकिन एक यात्री ने सीट दे दी। भीड़ में अनु का पर्स किसी ने चुरा लिया। अनु को पता ही नहीं चला। कॉलेज पहुंचकर जब अनु ने पर्स देखा तो उसमें फीस के पैसे नहीं थे। अनु रोने लगी। काजल ने समझाया, लेकिन अनु का दिल टूट चुका था।
भाग 3: मदद का जाल
प्रताप ने अनु को रोते देखा। वह पास आया, “क्या हुआ अनु, क्यों रो रही हो?” अनु और काजल ने पूरी बात बता दी। प्रताप ने अपनी जेब से ₹12,000 निकालकर अनु को दे दिए, “फीस भर दो।” दोनों बहनें खुश होकर पैसे ले लेती हैं। उन्हें नहीं पता कि प्रताप इस पैसे की कीमत कैसे वसूल करेगा।
अनु ने फीस जमा की, पढ़ाई शुरू कर दी। सात-आठ दिन बीत गए। इन दिनों में प्रताप ने दोनों बहनों का मन जीत लिया। अनु और काजल प्रताप पर भरोसा करने लगीं।
भाग 4: जाल में फंसी अनु
24 अक्टूबर 2025। सुबह अनु और काजल कॉलेज गईं। दोपहर 11:30 बजे प्रताप ने अनु को कॉल किया, “आज मेरा जन्मदिन है, होटल में पार्टी है, तुम्हें आना होगा।” अनु थोड़ी सोचती है, फिर हामी भर देती है। “ठीक है, लेकिन पार्टी के बाद मुझे घर छोड़ना पड़ेगा।” प्रताप मान जाता है।
कॉलेज की छुट्टी के बाद अनु ने काजल से झूठ बोला, “सहेली का जन्मदिन है, देर से घर आऊंगी।” काजल गांव चली गई। अनु ऑटो से ‘रोशनी होटल’ पहुंची, जहां प्रताप इंतजार कर रहा था।
प्रताप ने होटल के मालिक अंकित से कमरे की चाबी ली। केक, कोल्ड ड्रिंक मंगवाई। अनु ने प्रताप का जन्मदिन मनाया। पार्टी के बाद अनु ने घर जाने की बात कही। प्रताप ने कहा, “थोड़ा आराम कर लूं, फिर छोड़ दूंगा।” प्रताप ने अनु को भी कोल्ड ड्रिंक पीने को कहा। अनु ने मना किया, लेकिन प्रताप ने भरोसे की बात कही, अनु ने कोल्ड ड्रिंक पी ली। अनु को अचानक थकान महसूस होने लगी, वह सो गई। प्रताप ने अनु की निजी सीमाओं का सम्मान नहीं किया।
भाग 5: ब्लैकमेल का खेल
प्रताप ने अपने दोस्त अंकित को फोन किया, “अगर तुम चाहो तो कमरे में आ सकते हो।” अंकित भी कमरे में आया। बाद में अनु को होश आया तो उसने खुद को असहज स्थिति में पाया। अनु ने प्रताप से कहा, “तुमने मेरी कमजोरी का गलत फायदा उठाया।” प्रताप ने शादी का वादा किया, जिससे अनु को थोड़ी राहत मिली, लेकिन वह आगे की सच्चाई नहीं जानती थी।
अनु ने बहन काजल को फोन किया, “मैं ठीक हूं, सहेली के घर हूं, एक घंटे में आ जाऊंगी।” प्रताप ने अनु को घर छोड़ा। दिन बीतते गए। 7 नवंबर 2025 को अंकित ने प्रताप को फोन किया, “आज अनु को होटल बुला लो।” प्रताप ने अनु को धमकी दी, “अगर नहीं आई तो तुम्हारी कुछ तस्वीरें और वीडियो परिवार को भेज दूंगा।”
अनु मजबूर हो गई। फिर होटल गई, प्रताप और अंकित ने फिर अनु को मानसिक और भावनात्मक तौर पर परेशान किया। यह सिलसिला चलता रहा। हर तीसरी-चौथी रात अनु को होटल बुलाया जाता, और अनु को बार-बार दबाव में लाया जाता।
भाग 6: बहन का सच और मां की लड़ाई
एक महीने बाद प्रताप और अंकित का मन अनु से भर गया। अब प्रताप ने काजल को भी फांसने की योजना बनाई। अनु ने इनकार किया, प्रताप ने ब्लैकमेल किया। अनु ने फोन उठाना बंद कर दिया।
7 दिसंबर 2025। अनु की तबीयत खराब हुई, उल्टियां होने लगीं। काजल उसे अस्पताल ले गई। डॉक्टर ने बताया—अनु प्रेग्नेंट है। अनु और काजल दोनों हैरान। काजल ने अनु से सब पूछा, अनु ने पूरी आपबीती सुना दी। काजल के पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर आकर काजल ने मां सावित्री देवी को सब बताया। सावित्री देवी ने कहा, “अब उन लड़कों को सबक सिखाना होगा।”
भाग 7: न्याय की रात
मां-बेटियों ने योजना बनाई। अनु ने प्रताप को फोन किया, “मां और बहन घर पर नहीं हैं, अंकित के साथ आ सकते हो।” प्रताप खुश हो गया। अंकित को बुलाया। दोनों शराब पीकर अनु के घर पहुंचे।
सावित्री देवी कुल्हाड़ी लेकर बैठी थीं, काजल के पास चाकू था, अनु ने भी चाकू छुपा रखा था। दोनों लड़के कमरे में गए, सावित्री देवी ने कुल्हाड़ी से वार किया, दोनों लड़के गिर पड़े। तीनों ने मिलकर दोनों के हाथ-पैर बांध दिए, मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। अनु ने चाकू से दोनों के प्राइवेट पार्ट काट दिए। सावित्री देवी ने कुल्हाड़ी से दोनों की गर्दन काट दी। दोनों की मौके पर मौत हो गई।
भाग 8: पुलिस और समाज का सवाल
रात 11:30 बजे तीनों मां-बेटियां पुलिस स्टेशन पहुंचीं। दरोगा प्रकाश दत्त को बताया, “घर में दो लाशें हैं।” सावित्री देवी ने पूरी कहानी सुनाई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची, शव बरामद किए, पोस्टमार्टम के लिए भेजे। तीनों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई।
भाग 9: अंत और सवाल
अदालत में मामला गया। भविष्य में क्या सजा होगी, यह समय बताएगा। लेकिन सवाल यह है—क्या अनु, काजल और सावित्री देवी ने जो किया, वह सही था या गलत? क्या समाज में ऐसे मामलों में कानून का रास्ता बेहतर है या खुद न्याय लेना?
भाग 10: संदेश
दोस्तों, यह कहानी उन बेटियों और मांओं की है जो संघर्ष करती हैं, अन्याय के खिलाफ खड़ी होती हैं। आपकी राय क्या है? कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
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मिलते हैं अगली कहानी में।
जय हिंद।
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