बकरी चराने गई महिला के साथ ससुर ने कर दिया कारनामा/गांव के लोग और पुलिस सभी हैरान हो गए/

छज्जूपुर की रूबी – सच, संघर्ष और इंसाफ
नमस्कार दोस्तों! आज मैं आप सबके सामने एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ, जो उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के छज्जूपुर गाँव से जुड़ी है। यह कहानी है चंद्र सिंह, उसके बेटे जतिन, और जतिन की पत्नी रूबी की। यह कहानी है गरीबी, लालच, और एक औरत के साहस की। अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो लाइक और शेयर जरूर करें।
चंद्र सिंह – बकरियों का मालिक, शराब का गुलाम
छज्जूपुर गाँव में चंद्र सिंह नाम का एक गढ़रिया रहता था। उसके पास 2025 बकरियाँ थीं। रोज सुबह 8 बजे वह अपनी बकरियों को लेकर खेतों की ओर निकल जाता और शाम 4 बजे लौट आता। लेकिन जितना पैसा वह बकरियों से कमाता, सब शराब और शबाब में उड़ा देता। चंद्र सिंह की आदतें बहुत खराब थीं – जहाँ पैसे दिखे, वहाँ फिसल जाता, और महिलाओं के प्रति भी उसकी नजरें ठीक नहीं थीं।
उसका इकलौता बेटा जतिन भी उसी के नक्शे-कदम पर चल पड़ा था। जतिन आवारा था, कोई काम नहीं करता था। दो साल पहले चंद्र सिंह ने जतिन की शादी रूबी से करवा दी। रूबी बहुत ही मेहनती और संस्कारी लड़की थी। वह घर के सारे काम करती, लेकिन जतिन कुछ नहीं करता था। घर में गरीबी दस्तक देने लगी थी।
रूबी अपने पति जतिन से बार-बार कहती – “अगर तुम काम नहीं करोगे तो हमें भीख माँगनी पड़ेगी।” लेकिन जतिन उसकी बातों को अनसुना कर देता।
रूबी का संघर्ष – अकेली और बेबस
रूबी परेशान रहती थी। उसने ससुर चंद्र सिंह से भी कहा – “पिताजी, अपने बेटे को समझाइए। घर में गरीबी छा गई है।” चंद्र सिंह ने जतिन को समझाया – “बेटा, कोई काम शुरू कर, वरना घर से निकाल दूँगा।” जतिन ने कहा – “मैं कारखाने में नौकरी करने जा रहा हूँ, रात में 12 घंटे काम करूँगा।”
रूबी खुश हो गई कि अब घर में पैसे आएँगे। लेकिन उसे नहीं पता था कि आगे उसके साथ क्या होने वाला है। जतिन रात को काम पर चला जाता, रूबी घर पर अकेली रह जाती। उसे ससुर से डर लगता था, क्योंकि चंद्र सिंह शराब पीकर आता था। जतिन ने रूबी को भरोसा दिलाया – “पिताजी तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे।” लेकिन रूबी को अंदेशा था कि कुछ गलत हो सकता है।
एक सुबह – जब नियत बदल गई
20 अक्टूबर 2025 की सुबह, चंद्र सिंह की नजरें अपनी बहू रूबी पर टिक गईं। उसकी नियत खराब हो चुकी थी। उसने बहाना बनाया – “रूबी, मेरी तबियत ठीक नहीं है, आज तुम बकरियाँ चराने ले जाओ।” जतिन ने भी कहा – “पिताजी को साथ ले जाना।”
रूबी मान गई। सुबह 9 बजे चंद्र सिंह और रूबी बकरियाँ लेकर खेतों की ओर चले गए। खेत में दूर-दूर तक कोई नहीं था। चंद्र सिंह ने रूबी को पैसे देने की कोशिश की – “रूबी, ये पैसे रख लो।” रूबी ने मना कर दिया। तभी चंद्र सिंह ने साफ-साफ कहा – “मैं तुमसे कुछ चाहता हूँ।” रूबी सब समझ गई। चंद्र सिंह ने रूबी के हाथ-पैर बाँध दिए और उसके साथ जबरदस्ती की।
रूबी ने विरोध किया, लेकिन चंद्र सिंह ने उसे धमकी दी – “अगर तुमने किसी को बताया तो तुम्हें तलाक दिलवा दूँगा।” रूबी डर गई, क्योंकि वह गरीब परिवार की थी। वह चुप रह गई।
रूबी का दर्द – हर रोज़ की यातना
दिन बीतते गए। चंद्र सिंह जब भी मौका पाता, रूबी के साथ गलत काम करता। रूबी चुपचाप सब सहती रही। एक महीने बाद, 22 नवंबर 2025 को, रूबी पूजा करने मंदिर जा रही थी। रास्ते में गाँव के जमींदार करण सिंह की नजर उस पर पड़ी। करण सिंह भी उसकी खूबसूरती पर फिदा हो गया। उसने रूबी का पीछा किया, पैसे देने की बात की, लेकिन रूबी ने इंकार कर दिया।
करण सिंह अपनी हदें पार करने को तैयार था।
शराब, सौदा और शर्मनाक घटनाएँ
शाम को चंद्र सिंह अपनी बकरियाँ लेकर लौट रहा था। करण सिंह ने उसे शराब पीने के लिए बुलाया। शराब के नशे में करण सिंह ने चंद्र सिंह से कहा – “तुम्हारी बहू बहुत खूबसूरत है, मैं उसके साथ वक्त बिताना चाहता हूँ।” चंद्र सिंह ने ₹100 के लालच में अपनी बहू की इज्जत का सौदा कर दिया। दोनों ने योजना बनाई कि रात में जतिन के जाने के बाद करण सिंह रूबी के घर जाएगा।
रात को दोनों घर पहुँचे। रूबी ने विरोध किया, लेकिन दोनों ने जबरदस्ती उसके साथ गलत काम किया। उसे धमकाया, डराया। चंद्र सिंह ने करण सिंह से ₹10,000 लिए और दोनों चले गए।
रूबी की चुप्पी – टूटती उम्मीदें
रूबी हर रात रोती थी। जतिन को बताने की कोशिश की, लेकिन जतिन ने ध्यान नहीं दिया। अब करण सिंह और चंद्र सिंह रोज रात शराब पीकर रूबी के घर आते और उसके साथ गलत काम करते। रूबी ने पति को सच नहीं बताया, डर के मारे।
गरीबी और गिरावट – जब इंसानियत मर गई
12 दिसंबर 2025 को चंद्र सिंह ने अपनी सारी बकरियाँ बेच दीं। उसके पास कुछ नहीं बचा। शराब की लत ने उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया। अब उसने गाँव के सरपंच दिलबाग से पैसे माँगे। दिलबाग ने पैसे देने के बदले रूबी के साथ एक रात की मांग की। चंद्र सिंह ने अपनी बहू की इज्जत फिर बेच दी।
रात को दिलबाग और चंद्र सिंह ने रूबी के साथ जबरदस्ती की। दोनों नशे में थे। तभी जतिन घर लौटा। रूबी ने रोते-रोते अपने पति को सब बता दिया। जतिन को यकीन नहीं हुआ, लेकिन रूबी के फटे कपड़े देख सब समझ गया।
इंसाफ की रात – जब हिम्मत जागी
जतिन और रूबी ने मिलकर दिलबाग और चंद्र सिंह को मार डाला। जतिन ने कुल्हाड़ी से दिलबाग को मार दिया, रूबी ने गंडासी से चंद्र सिंह पर वार किया और उसका वह अंग काट दिया जिससे वह गलत काम करता था। दोनों पति-पत्नी पुलिस स्टेशन पहुँचे और अपनी पूरी कहानी सुनाई। पुलिस ने करण सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया।
सोचने वाली बात – सही या गलत?
अब सवाल ये है – रूबी और जतिन ने जो किया, क्या वो सही था? क्या कोई महिला इतने दर्द, बेइज्जती और अत्याचार के बाद खुद के लिए न्याय ले सकती है? या कानून का इंतजार करना चाहिए?
आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर लिखें।
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जय हिंद।
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