महिला को नहीं हो रहा था बच्चा फिर महिला ने जो किया ।

विश्वासघात का काला सच: मेरठ की एक खौफनाक दास्तां
अध्याय 1: खुशहाल परिवार और एक अनकहा सूनापन
उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी जिले के ‘खंदावली’ गाँव की सरहदों पर एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। यह कहानी है अमन सिंह की, जो पेशे से एक ईमानदार और मेहनती मजदूर था। अमन गाँव से करीब 2 किलोमीटर दूर एक कारखाने में काम करता था। अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से उसने गाँव के बाहरी इलाके में एक जमीन का टुकड़ा खरीदा और वहाँ अपना एक छोटा सा आशियाना बनाया।
अमन की पत्नी कोमल, जो देखने में अत्यंत रूपवती थी, घर के कामकाज संभालती थी। चूँकि घर गाँव की मुख्य आबादी से काफी दूर और एकांत में था, कोमल का मन अक्सर वहाँ नहीं लगता था, फिर भी वह अपने पति के प्रति समर्पित थी। लेकिन उनके जीवन में एक बड़ा खालीपन था—शादी के 10 साल बाद भी उनकी कोई संतान नहीं थी। इसी बात को लेकर अक्सर दोनों के बीच विवाद/ और झगड़े होते थे, जिससे घर की शांति भंग हो जाती थी।
अध्याय 2: डॉक्टर की रिपोर्ट और टूटते सपने
8 जनवरी 2026 की सुबह, कोमल ने अमन को रोककर कहा कि आज उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना चाहिए। अमन सहमत हो गया और शाम को वे शहर के एक बड़े अस्पताल पहुँचे। डॉक्टर ने दोनों का मेडिकल चेकअप किया। अगले दिन जब रिपोर्ट आई, तो वह अमन और कोमल के लिए किसी बिजली गिरने जैसी थी।
डॉक्टर ने अमन को अकेले में बुलाकर बताया कि वह कभी पिता नहीं बन सकता क्योंकि उसके भीतर शारीरिक/ रूप से कुछ गंभीर कमियाँ हैं। जब कोमल को यह पता चला, तो वह सदमे में आ गई और उसे अचानक दौरा/ पड़ गया। अमन ने बताया कि कोमल को अक्सर ऐसे दौरे/ पड़ते हैं और वह 3-4 घंटे तक पूरी तरह अचेत/ यानी बेहोश रहती है। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां देकर उन्हें घर भेज दिया।
अध्याय 3: पुजारी प्रेम सिंह का आगमन और नापाक इरादे
12 जनवरी 2026 को अमन काम पर गया हुआ था। तभी कोमल की सहेली लता उससे मिलने आई। कोमल ने रोते हुए उसे डॉक्टर की रिपोर्ट के बारे में बताया। लता ने उसे ढांढस बंधाया और सलाह दी कि उसे मंदिर जाना चाहिए और ईश्वर पर आस्था रखनी चाहिए। लता के जाने के कुछ देर बाद, घर के दरवाजे पर एक दस्तक हुई।
सामने गाँव के मंदिर का पुजारी प्रेम सिंह खड़ा था। प्रेम सिंह असल में कोई धार्मिक व्यक्ति नहीं था, बल्कि वह एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति था जो धार्मिक चोले की आड़ में अपनी वासना/ और लालच को छुपाए हुए था। जैसे ही उसकी नजर कोमल की खूबसूरती पर पड़ी, उसके मन में गंदा/ विचार आ गया। उसने मंदिर के विकास के नाम पर 100 रुपये दान मांगे। कोमल ने श्रद्धावश पैसे दे दिए। इसके बाद पुजारी ने भूख लगने का बहाना बनाया और कोमल उसके लिए खाना बनाने लगी।
अध्याय 4: जड़ी-बूटी का झांसा और घिनौना/ कृत्य
खाना खाते समय कोमल ने अपनी बीमारी और संतान न होने का दुखड़ा पुजारी को सुना दिया। पुजारी ने इस मजबूरी का फायदा उठाने की योजना बनाई। उसने अपने थैले से कुछ पिसी हुई जड़ी-बूटियां निकालीं और दावा किया कि इसे पीने से उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी और उसे संतान/ सुख भी मिलेगा।
भोली-भाली कोमल ने उसकी बातों पर यकीन कर लिया और वह दवा पी ली। कुछ ही मिनटों में दवा में मिले नशीले/ पदार्थ के कारण कोमल अचेत/ होकर गिर पड़ी। जैसे ही वह बेहोश हुई, प्रेम सिंह ने घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उसने कोमल को उठाकर कमरे में ले जाकर उसके साथ अत्यंत ही गलत/ और शर्मनाक/ कृत्य किया। वह तब तक अपनी गंदी/ हसरतें पूरी करता रहा जब तक उसका मन नहीं भर गया। जाते समय उसने इस्तेमाल किया हुआ सुरक्षा/ कवच (कंडोम/) वहीं फेंक दिया, जो बाद में उसके लिए काल बनने वाला था।
अध्याय 5: सहेली लता और एक और शिकार
कोमल जब 4 घंटे बाद जागी, तो उसे लगा कि शायद उसे दौरा/ पड़ा होगा और पुजारी उसे कमरे में लिटाकर चला गया होगा। उसने रात को अमन को भी यही बताया। अमन ने पुजारी पर अटूट विश्वास जताते हुए कोमल के शक को खारिज कर दिया।
अगले दिन, पुजारी ने कोमल को मंदिर में फिर से जाल में फंसाया और कहा कि वह घर का ‘शुद्धीकरण’ करने आएगा। इस बार वह अपने एक दोस्त सागर को भी साथ लाया। सागर लॉटरी बेचने के नाम पर लोगों को ठगता था। दोनों ने कोमल को फिर से नशीली/ दवा पिलाकर बेहोश कर दिया और बारी-बारी से उसके साथ गलत/ संबंध/ बनाए।
इसी बीच, कोमल की सहेली लता वहाँ पहुँच गई। पुजारी ने लता को भी झांसा देने की कोशिश की, लेकिन लता समझदार थी। उसने कमरे की अस्त-व्यस्त हालत देखकर शोर मचाना चाहा, पर सागर और प्रेम सिंह ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने लता के हाथ-पांव बांध दिए, उसके मुँह में कपड़ा ठूंस दिया और फिर उसके साथ भी वही घिनौना/ और अनैतिक/ काम किया।
अध्याय 6: न्याय का प्रहार और अंत
तभी चमत्कार हुआ। अमन उस दिन अपने दो दोस्तों के साथ कारखाने से जल्दी घर आ गया। उसने जब दरवाजा खटखटाया, तो पुजारी घबरा गया। अमन ने जब अंदर का नजारा देखा—कोमल बेहोश और लता के हाथ-पांव बंधे हुए—तो उसका खून खौल उठा। अमन और उसके दोस्तों ने भागने की कोशिश कर रहे प्रेम सिंह और सागर को दबोच लिया।
गाँव वालों की भीड़ उमड़ पड़ी और दोनों की जमकर धुनाई हुई। पुलिस को बुलाया गया। पुलिस स्टेशन में जब सख्ती से पूछताछ हुई, तो प्रेम सिंह ने अपनी काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उसने स्वीकार किया कि वह पुजारी नहीं बल्कि एक ढोंगी है और उसने अब तक 5-6 महिलाओं के साथ इसी तरह नशीली/ दवाएं देकर गलत/ काम किया है।
निष्कर्ष: समाज के लिए एक चेतावनी
पुलिस ने दोनों अपराधियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। यह घटना हमें सिखाती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर, चाहे वह धार्मिक चोले में ही क्यों न हो, अंधविश्वास नहीं करना चाहिए।
लेखक का संदेश: यह कहानी आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक और सतर्क करने के लिए लिखी गई है। अपनी सुरक्षा और विवेक का इस्तेमाल हमेशा करें।
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