महिला पुलिस दरोगा अकेली घर लौट रही थी/रास्ते में हो गया हादसा/

न्याय का शंखनाद: मर्यादा और प्रतिशोध की कहानी

राजस्थान के सुरम्य जिले उदयपुर के एक शांत गाँव अमरपुरा में यह कहानी शुरू होती है। इस गाँव की हवाओं में एक तरफ बहादुरी के किस्से थे, तो दूसरी तरफ कुछ जहरीले किरदारों की काली साया भी मंडरा रही थी।

फौजी का गर्व और माधुरी की कर्तव्यनिष्ठा

रामपाल फौजी, एक सेवानिवृत्त सैनिक, अमरपुरा गाँव के सबसे सम्मानित व्यक्तियों में से एक थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी सात-आठ एकड़ जमीन पर खेती-किसानी शुरू की थी। उनकी पत्नी की कई साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी थी, जिसके बाद उनकी पूरी दुनिया उनकी इकलौती बेटी माधुरी के इर्द-गिर्द सिमट गई थी।

माधुरी न केवल एक संस्कारी बेटी थी, बल्कि वह पास के पुलिस स्टेशन में कांस्टेबल के पद पर तैनात थी। वह हर रोज खाकी वर्दी पहनकर जब अपनी मोटरसाइकिल पर ड्यूटी के लिए निकलती, तो पूरे गाँव का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था। रामपाल फौजी अक्सर अपनी बेटी से कहते, “बेटी, मेरी पगड़ी की लाज बचाए रखना।” और माधुरी मुस्कुराकर जवाब देती, “पिताजी, आपकी पगड़ी पर कभी आंच नहीं आने दूँगी।”

काली परछाईं: चेतन ट्रक ड्राइवर

रामपाल फौजी के घर के ठीक सामने चेतन नाम का एक ट्रक ड्राइवर रहता था। 34 वर्षीय चेतन एक बेहद दुष्ट स्वभाव का व्यक्ति था। वह अपनी कमाई का सारा हिस्सा नशीली चीजों और गलत आदतों में उड़ा देता था। गाँव की महिलाओं के प्रति उसकी नजरें हमेशा दूषित रहती थीं। उसकी पत्नी, आरती देवी, अक्सर उसके हिंसक व्यवहार का शिकार होती थी।

वह काली रात: 10 दिसंबर 2025

10 दिसंबर की रात करीब 8:00 बजे, चेतन नशे की हालत में ट्रक लेकर गाँव लौट रहा था। रास्ते में उसकी मुलाकात प्रकाशी नाम की एक महिला से हुई, जिसका गाँव में चरित्र अच्छा नहीं माना जाता था। चेतन ने उसे घर छोड़ने के बहाने ट्रक में बिठाया और सुनसान इलाके में उसके साथ आपत्तिजनक मर्यादा का उल्लंघन किया। इसके बाद वह उसे अपने घर ले आया और अपनी पत्नी आरती का विरोध करने पर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी।

आरती भागकर रामपाल फौजी के घर पहुँची। माधुरी ने जब आरती के माथे से खून बहता देखा, तो उसका खून खौल उठा। एक पुलिस अधिकारी और एक पड़ोसी होने के नाते, वह तुरंत चेतन के घर पहुँची। वहाँ उसने चेतन को प्रकाशी के साथ गलत स्थिति में पाया। माधुरी ने आव देखा न ताव, वही डंडा उठाया जिससे चेतन ने आरती को मारा था और प्रकाशी तथा चेतन की जमकर धुनाई कर दी।

माधुरी ने चेतन को चेतावनी दी, “आज के बाद किसी गैर महिला को घर लाया, तो जेल की सलाखों के पीछे सड़ा दूँगी।”

चेतन ने उस समय तो चुप्पी साध ली, लेकिन उसके मन में प्रतिशोध की आग जलने लगी। उसने सोचा, “इस पुलिस वाली ने मुझे थप्पड़ मारे हैं, इसका हिसाब तो मैं लेकर रहूँगा।”

प्रतिशोध का षड्यंत्र: 20 दिसंबर 2025

चेतन ने अपने दो दोस्तों, अनिकेत और विकास के साथ मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई। उन्हें पता था कि माधुरी रात को किस रास्ते से लौटती है। 20 दिसंबर की शाम, माधुरी अपनी सहेली करुणा के बेटे के जन्मदिन की पार्टी में गई थी। रात काफी हो चुकी थी, सहेली ने रुकने को कहा, लेकिन पिता की चिंता में माधुरी रात के करीब 10:45 बजे मोटरसाइकिल से गाँव की ओर चल दी।

रास्ते के एक सुनसान मोड़ पर, चेतन और अनिकेत ने अपनी मोटरसाइकिल सड़क पर गिरा दी और खुद गिरने का नाटक करने लगे। माधुरी ने मानवता के नाते मदद के लिए अपनी मोटरसाइकिल रोकी। जैसे ही वह नीचे उतरी, चेतन ने उसकी गर्दन पर चाकू रख दिया।

माधुरी ने संघर्ष किया, लेकिन नशे में धुत्त उन दरिंदों ने उसकी एक न सुनी। वे उसे झाड़ियों के पीछे ले गए। वहाँ चेतन, अनिकेत और बाद में उनके बुलावे पर आए विकास ने माधुरी की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने उसे धमकाया, “अगर गाँव में किसी को बताया, तो तेरे और तेरे बाप के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।”

माधुरी का शरीर और आत्मा दोनों घायल थे। वह किसी तरह घर पहुँची। पिता ने फटे कपड़े और बेहाल स्थिति देखी, तो माधुरी ने डर के मारे झूठ बोल दिया कि उसकी मोटरसाइकिल के आगे कुत्ता आ गया था और वह गिर गई। यही उसकी सबसे बड़ी भूल थी।

जब सब्र का बांध टूट गया

अगले कुछ दिनों तक माधुरी गुमसुम रही। 2 जनवरी 2026 को गाँव की एक और लड़की, सविता के साथ उन्हीं दरिंदों ने वही घिनौना काम किया। जब माधुरी को यह पता चला, तो उसे अहसास हुआ कि उसकी चुप्पी ने इन भेड़ियों के हौसले बढ़ा दिए हैं।

शाम को घर लौटते समय चेतन ने फिर उस पर भद्दी टिप्पणी की और धमकी दी कि आज वे उसके घर में घुसेंगे। माधुरी ने अब फैसला कर लिया था। घर पहुँचकर उसने रोते हुए अपने पिता रामपाल फौजी को सारी सच्चाई बता दी।

रामपाल फौजी, जो देश के दुश्मनों से लड़ा था, अपनी बेटी की ये दास्तां सुनकर सुन्न रह गए। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने कहा, “बेटी, हथियार निकाल। बदला आज ही लिया जाएगा।”

खूनी इंसाफ

रामपाल फौजी ने अपनी कुल्हाड़ी उठाई और माधुरी ने एक गंडासा। दोनों सीधे चेतन की बैठक पर पहुँचे, जहाँ वे तीनों नशे में धुत्त होकर सो रहे थे। रामपाल ने पहली कुल्हाड़ी अनिकेत के सिर पर मारी, वह मौके पर ही ढेर हो गया। विकास ने भागने की कोशिश की, लेकिन फौजी के वार ने उसे जमीन पर लिटा दिया।

दूसरी तरफ, माधुरी ने चेतन पर गंडासे से कई वार किए। पिता-पुत्री का गुस्सा इतना भयानक था कि उन्होंने उन तीनों दरिंदों को मौत के घाट उतार दिया।

पूरे गाँव में हड़कंप मच गया। पुलिस आई और रामपाल फौजी तथा माधुरी को गिरफ्तार कर लिया गया। जब पुलिस स्टेशन में फौजी ने पूरी कहानी सुनाई, तो खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।

निष्कर्ष: समाज के लिए एक सवाल

आज रामपाल फौजी और माधुरी जेल में हैं और कोर्ट में मामला चल रहा है। इस घटना ने समाज के सामने कई सवाल खड़े किए हैं:

    क्या माधुरी को पहली बार ही सच बोल देना चाहिए था?
    क्या हमारा कानून इन दरिंदों को समय पर सजा दे पाता?
    क्या एक पिता और बेटी द्वारा किया गया यह ‘खूनी इंसाफ’ सही था या गलत?

इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब रक्षक ही भक्षक के हाथों प्रताड़ित हो जाए और व्यवस्था मौन रहे, तो ‘न्याय’ की परिभाषा बदल जाती है। माधुरी और रामपाल फौजी ने जो किया, वह समाज की नजरों में एक सबक था, लेकिन कानून की नजरों में एक अपराध। आपकी इस बारे में क्या राय है?