मां की गलती की वजह से पिता फौजी के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/पुलिस के होश उड़ गए/

बिजरोल गांव की सच्ची कहानी – पगड़ी का मान और रिश्तों की परख

नमस्कार दोस्तों, आज आपके सामने एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ, जिसमें परिवार, रिश्ते, लालच और इंसानियत की गहरी परख है। अगर आपको यह कहानी सोचने पर मजबूर करे तो लाइक और शेयर जरूर करें।

शमशेर सिंह – फौजी से किसान तक

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिजरोल गांव में रहते थे शमशेर सिंह। रिटायर्ड फौजी, मेहनती किसान – अपनी छः एकड़ पुश्तैनी जमीन के अलावा एक एकड़ और खरीद कर नया घर भी बना लिया था। परिवार में पत्नी कांता देवी और इकलौती बेटी महिमा थी। महिमा पढ़ने में तेज थी, दसवीं कक्षा में थी।

शमशेर सिंह अपनी बेटी से हमेशा एक बात कहते – “बेटी, मेरी पगड़ी का मान रखना।” महिमा भी वादा करती – “पिताजी, आपकी पगड़ी पर कभी आंच नहीं आने दूंगी।”

कांता देवी – रिश्तों में उलझी और लालच में फंसी

शमशेर सिंह की पत्नी कांता देवी का चाल-चलन ठीक नहीं था, पर शमशेर या महिमा को इसका अंदाजा नहीं था। कांता देवी मायके की तरफ झुकी रहती थी, अक्सर पति से पैसे लेकर मायके भेजती थी। धीरे-धीरे उसके मन में लालच बढ़ने लगा – जमीन अपने नाम करवाने की इच्छा जाग गई।

एक दिन शमशेर सिंह खेत में ट्रैक्टर चलाते वक्त हादसे का शिकार हो गए। उनकी टांग टूट गई और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इलाज के बाद घर लौटे, लेकिन अब वे कमजोर हो चुके थे। कांता देवी को अब पति से सुख नहीं मिल रहा था, वह परेशान रहने लगी।

जमीन का लालच – गलत रास्ते की शुरुआत

कांता देवी ने शमशेर से जमीन अपने नाम करवाने की बात की, लेकिन शमशेर ने मना कर दिया – “मेरे बाद सब तुम्हारा ही है।” लेकिन कांता देवी को जल्दी थी, उसने गैरकानूनी तरीका अपनाने का फैसला किया।

गांव के पटवारी ओम प्रकाश से मिली – “पटवारी साहब, जमीन मेरे नाम करवानी है।” ओम प्रकाश ने पैसे की जगह अपना निजी फायदा मांगा। मजबूरी में कांता देवी ने उसकी बात मान ली। रात में ओम प्रकाश के घर जाकर उसकी शर्त पूरी की, बदले में जमीन के कागज तैयार करवाने का वादा मिला।

रिश्तों की डोर – जब भरोसा टूट जाता है

कुछ दिन बाद ओम प्रकाश ने अपने दोस्त रणधीर सिंह को सब बताया। रणधीर ने भी कांता देवी से वही मांग रखी। ओम प्रकाश ने फोन कर कांता देवी को खेत बुलाया। मजबूरी में कांता देवी वहां गई, दोनों दोस्तों ने उसका फायदा उठाया।

पास के जमींदार बिल्लू ने उन्हें देख लिया। बिल्लू ने शमशेर सिंह को जाकर सब बता दिया – “आपकी पत्नी गलत रास्ते पर है।” शमशेर ने पत्नी से पूछा, पर कांता देवी ने सब झूठ बोलकर बात संभाल ली। शमशेर अपनी पत्नी पर भरोसा करते रहे।

अब ओम प्रकाश और रणधीर जब भी चाहते, कांता देवी को बुला लेते। कांता देवी भी अपनी मर्जी से उनके साथ समय बिताती रही। उसे नहीं पता था कि ये लोग उसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

महिमा – बेटी का विश्वास और टूटा रिश्ता

एक दिन महिमा स्कूल से लौटकर घर आई। उसने देखा कि मां घर में दो अजनबी पुरुषों के साथ थी। महिमा को शक हुआ, उसने मां से सवाल किए। कांता देवी ने झूठ बोला – “तुम्हारे पिता ने इनसे कर्ज लिया है, मुझे मजबूरी में ये सब करना पड़ता है।” महिमा को गुस्सा आया, लेकिन मां ने उसे चुप रहने को कहा।

महिमा को रात भर नींद नहीं आई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि मां इतनी बड़ी बात कैसे छुपा सकती है। उसने फैसला किया – अब कुछ करना ही होगा।

अंतिम रात – जब रिश्तों का अंत हुआ

रात को महिमा ने कुल्हाड़ी उठाई, मां को साथ लिया और दोनों ने शमशेर सिंह को मारने का फैसला कर लिया। शमशेर कमजोर थे, मां ने मुंह दबाया, बेटी ने वार किए। शमशेर की मौत हो गई। मां-बेटी ने शव के टुकड़े किए, बोरियों में भरकर पास के प्लॉट में गड्ढा खोदने लगीं।

पड़ोसी विशाल कुमार ने रात में गड्ढा खोदते देख लिया। शोर मचाया, लोग इकट्ठा हुए। बोरियों में शव के टुकड़े देखकर सबके होश उड़ गए। पुलिस आई, मां-बेटी को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

सोचने वाली बात – रिश्तों की कीमत

कांता देवी ने लालच में आकर, अपनी बेटी के हाथों अपने पति का कत्ल करवा दिया। आखिर रिश्तों की कीमत क्या रह गई? क्या किसी भी हालात में ऐसा करना सही है?

दोस्तों, इस कहानी का उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं, बल्कि आपको जागरूक करना है। परिवार, रिश्ते और लालच – सबकी अपनी जगह है, लेकिन सही रास्ता कभी न छोड़ें।

अगर कहानी ने आपको सोचने पर मजबूर किया हो, तो लाइक करें, शेयर करें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

मिलते हैं अगली बार एक नई कहानी के साथ। जय हिंद, वंदे मातरम।