सड़क पर बैठा भिखारी अचानक खड़े होकर चिल्लाया.. आज से तेरी बर्बादी शुरू – फिर जो हुआ!

“अंतिम चेतावनी: वेदांत रोशन की कहानी”

प्रस्तावना

शहर की भीड़ भरी सड़क पर अचानक सब कुछ थम जाता है। गाड़ियों के हॉर्न, लोगों की आवाजें, सब जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने रोक दी हों। सड़क के बीचों-बीच एक झुकी कमर वाला बूढ़ा इंसान घुटनों पर गिरा है। उसका नाम है वेदांत रोशन। लोग उसे एक खामोश भिखारी समझते हैं, लेकिन उसने कभी किसी से भीख नहीं मांगी। उसके कांपते हाथ आसमान की तरफ नहीं, बल्कि उस काली एसयूवी की ओर उठे हैं जिसमें बैठा है मंद्राक्ष नगर का सबसे ताकतवर करोड़पति – अरिष्टमेय वर्मे।

सड़क पर भविष्यवाणी

सड़क पर अचानक सन्नाटा छा जाता है, जब वेदांत अपनी फटी हुई आवाज में कहता है –
“साहब, आपकी खुशियों की आखिरी रात है यह। सुबह सूरज उगते ही आपकी हालत मेरी जैसी हो जाएगी। सब कुछ खत्म हो जाएगा।”

भीड़ में हलचल मच जाती है। कोई पागल समझता है, तो कोई वीडियो बनाना शुरू कर देता है। लेकिन अरिष्टमेय के चेहरे पर डर की लकीरें साफ़ दिखने लगती हैं। वह गुस्से में शीशा नीचे कर वेदांत से पूछता है –
“अबे हट, ये सब किसलिए बोल रहा है?”

वेदांत जवाब देता है –
“मैंने देख लिया है। रात खत्म होने से पहले तुम्हें भी पता चल जाएगा। बस याद रखना, मैंने चेतावनी दे दी थी।”

ड्राइवर उसे पागल समझकर छोड़ देने को कहता है, लेकिन अरिष्ट को अजीब सा झटका लगता है। जैसे वेदांत उसकी बर्बादी को देख रहा हो।

ऑफिस की बेचैनी

अरिष्ट अपने ऑफिस वर्मे टावर्स की 37वीं मंजिल पर बैठा है, लेकिन वेदांत की आवाज उसके कानों में गूंजती रहती है। रात के 10 बजे वह अपने पेंटहाउस पहुंचता है। घर में बस नौकरानी निराली, उसका चचेरा भाई त्रिपाल, और सुरक्षा कर्मचारी राकेश सारोला हैं। सब कुछ सामान्य है, लेकिन हवा में बेचैनी है।

रात के 12 बजे अचानक बिजली चली जाती है। जब लाइट वापस आती है, अरिष्ट देखता है कि उसका पर्सनल सेफ खुला है। उसमें उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा राज था – एक कागज, जो अब गायब है।

घर में साजिश

राकेश डरते हुए बताता है कि शाम को एक आदमी आया था – वेदांत रोशन। वही बूढ़ा, जिसने सड़क पर अरिष्ट को रोका था। तभी घर की बेल तेज़ी से बजती है। बाहर से आवाज आती है –
“अरिष्ट वर्मे, समय आ गया है।”

अरिष्ट दरवाजा खोलता है, सामने वेदांत खड़ा है। वेदांत कहता है –
“मैं तुम्हें बचाने आया हूँ।”

अरिष्ट हँस भी नहीं पाता, उसे लगता है वेदांत पागल है। लेकिन वेदांत कहता है कि आज रात उसकी जिंदगी खत्म हो सकती थी, अगर वह ना आता तो।

सच्चाई का खुलासा

वेदांत बताता है कि खतरा बाहर से नहीं, अंदर से है। घर में कोई है, जो अरिष्ट को मरवाकर सब कुछ हथियाना चाहता है। अरिष्ट को अपने चचेरे भाई त्रिपाल पर शक होता है, लेकिन वेदांत कहता है कि पूरी सच्चाई कुछ और है।

किचन से आहट आती है, निराली रोते हुए बताती है कि त्रिपाल ने उसे धमकी दी थी – अगर उसने सेफ से फाइल नहीं निकाली, तो उसका भाई मारा जाएगा। अरिष्ट के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।

वेदांत बताता है –
“इस घर में एक और चीज है जो तुम्हें आज रात खत्म कर सकती है – जहर।”

वह मेज पर रखी पानी की बोतल उठाता है – उसी में जहर है। त्रिपाल ने निराली को मजबूर किया, फाइल चुराई, और जहर डाला।

त्रिपाल का असली चेहरा

बालकनी में त्रिपाल छुपा है। वह बाहर आता है, हाथ में नुकीली रड लेकर अरिष्ट पर हमला करता है। वेदांत चिल्लाता है –
“नीचे हटो!”

अरिष्ट बच जाता है, लेकिन त्रिपाल का पागलपन सामने आ जाता है। वह बताता है कि उसने साल भर पहले सब कुछ प्लान किया था – कंपनी, अकाउंट्स, प्रॉपर्टी, सब उसके नाम होने वाली थी।

त्रिपाल फिर हमला करता है, वेदांत बीच में आता है और रड उसके कंधे में घुस जाती है। अरिष्ट वेदांत को बचाने की कोशिश करता है, लेकिन वेदांत कहता है –
“मैं तुम्हें जीवित रख रहा हूँ, क्योंकि अगर तुम मर गए तो शहर का वह सच कौन जान पाएगा जो तुम्हारी कंपनी के पीछे छुपा है?”

वेदांत का अतीत

वेदांत बताता है कि वह कभी अरिष्ट की कंपनी में काम करता था। बेझूठे आरोपों में उसे निकाल दिया गया, उसकी पत्नी मर गई, घर चला गया, और वह सड़क पर आ गया। जिसने यह सब किया था, वह त्रिपाल था।

न्याय की लड़ाई

त्रिपाल फिर हमला करता है, लेकिन राकेश घायल हाथ से उसे पकड़ लेता है। त्रिपाल लड़खड़ाकर बालकनी की रेलिंग पर झूल जाता है, और अंत में गिर जाता है। उसकी चीख हवा में गूंजती है, और फिर सन्नाटा छा जाता है।

वेदांत का बलिदान

वेदांत जमीन पर बैठ जाता है, खून बह रहा है। अरिष्ट उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश करता है, लेकिन वेदांत मुस्कुराकर कहता है –
“मैंने तुम्हें बचाया नहीं, तुम्हारा सच जगाया है।”

अरिष्ट की आंखें भर आती हैं –
“तुमने मुझे चेतावनी क्यों दी?”

वेदांत बताता है –
“कभी-कभी जिंदगी में सबसे टूटे हुए लोग ही किसी और की टूटती हुई जिंदगी जोड़ जाते हैं।”

वेदांत की सांसें धीरे-धीरे शांत हो जाती हैं। अरिष्ट घुटनों पर गिर जाता है, राकेश भी आंसू पोंछता है। पुलिस और एंबुलेंस आती है, लेकिन उस रात का सच सिर्फ तीन लोगों ने जिया – वेदांत, अरिष्ट, और राकेश।

अंत और संदेश

अगले दिन अखबारों में हेडलाइन है –
“अरिष्टमेय की जान बचाने वाला अजनबी कंपनी की साजिश से मौत।”

अरिष्ट शहर भर में वेदांत के नाम एक ट्रस्ट शुरू करता है, गरीबों और बेगुनाहों की मदद के लिए। असल सच्चाई उसके दिल में जिंदा रहती है – वेदांत रोशन, जिसने अपनी बर्बाद जिंदगी से एक करोड़पति की जिंदगी बचाई।

अरिष्ट वेदांत की कब्र पर खड़े होकर वादा करता है –
“तुम्हारा सच अब कभी नहीं मिटेगा।”

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वह हवा बनकर शहर में फैल जाती है।
“कभी भीड़ में दिखे कोई टूटा हुआ इंसान, तो उसे हल्के में मत लेना। शायद वह वही हो जो एक दिन तुम्हें बचा जाए।”

समाप्त