ससुर ने कर दिया कारनामा/औलाद पाने के लिए ससुर हद से गुजर गया/

रिश्तों का कत्ल: बालेश्वर की एक खौफनाक दास्तां

राजस्थान की रेतीली धरती पर बसा जोधपुर जिला अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी जिले के बालेश्वर गांव में दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच जो कुछ हुआ, उसने रिश्तों की शुचिता पर एक ऐसा दाग लगा दिया जिसे शायद ही कभी धोया जा सके। यह कहानी है प्रकाश सिंह, उसके दो बेटों—शिव कुमार और हरी सिंह, और उनकी पत्नियों की।

एक संपन्न पर दागदार व्यक्तित्व

बालेश्वर गांव के प्रकाश सिंह के पास 16 एकड़ उपजाऊ जमीन थी। खेती-किसानी से अच्छी आय होती थी और परिवार में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। लेकिन धन-दौलत होने के बावजूद गांव में प्रकाश सिंह की कोई इज्जत नहीं थी। इसके पीछे कारण था प्रकाश का चरित्र। वह मदिरा का आदी था और उसकी नज़रें गांव की महिलाओं पर अक्सर गलत होती थीं। लोग उसके सामने तो नहीं, पर पीठ पीछे उसे “मर्यादाहीन” इंसान कहते थे।

प्रकाश के दो बेटे थे—बड़ा बेटा शिव कुमार और छोटा हरी सिंह। दोनों ही अपने पिता की काफी इज्जत करते थे और खेती में हाथ बटाते थे। शिव कुमार की शादी चार साल पहले राखी से हुई थी और हरी सिंह की शादी सपना से। घर में दो बहुएं आने से खुशियां तो थीं, पर एक चिंता प्रकाश को खाए जा रही थी—शादी के चार साल बीत जाने के बाद भी किसी भी बेटे को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था।

जब नियत ने खाई ठोकर

घटना की शुरुआत तब हुई जब एक सुबह प्रकाश अपने खेत में था। गांव की एक ज़रूरतमंद महिला, प्रियंका, उससे आर्थिक मदद मांगने आई। प्रकाश ने मदद के बदले प्रियंका के सामने अनुचित शर्त रख दी। प्रियंका की मजबूरी और प्रकाश की नैतिकता के पतन ने उन दोनों के बीच एक गलत रिश्ते की नींव रख दी।

उसी दिन प्रकाश के दोनों बेटों ने अपने पिता को प्रियंका के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। बेटों का खून खौलना चाहिए था, पर पिता के प्रति उनके सम्मान और संकोच ने उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सोचा कि पिता की उम्र का लिहाज़ करना चाहिए। लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि पिता की यही बेलगाम इच्छाएं कल उनके अपने घर की चारदीवारी के भीतर प्रवेश कर जाएंगी।

डॉक्टर का कड़वा सच

जब प्रकाश ने बेटों को संतान न होने पर ताना मारा, तो दोनों भाइयों ने शहर जाकर मेडिकल चेकअप कराने का फैसला किया। अस्पताल की रिपोर्ट उनके पैरों तले ज़मीन खिसकाने वाली थी। डॉक्टर ने साफ कह दिया, “दुर्भाग्यवश, आप दोनों भाइयों के शरीर में कुछ ऐसी कमियां हैं जिसकी वजह से आप कभी पिता नहीं बन सकते।”

शिव कुमार और हरी सिंह टूट गए। उन्होंने तय किया कि वे यह बात किसी को नहीं बताएंगे और भविष्य में कोई बच्चा गोद ले लेंगे।

ससुर की साज़िश और बहुओं का भटकाव

2 दिसंबर 2025 का दिन था। शिव कुमार अपनी पत्नी राखी को उसके मायके छोड़ने गया था। घर में प्रकाश, छोटा बेटा हरी सिंह और बहू सपना थे। हरी सिंह खेत पर गया हुआ था। प्रकाश ने सपना को अकेला पाकर उसे भावनात्मक रूप से बहलाना शुरू किया। उसने कहा, “सपना, समाज में मेरी और तुम्हारे पति की थू-थू हो रही है। तुम्हारे पति तुम्हें संतान नहीं दे सकते, लेकिन अगर तुम मेरी बात मान लो, तो इस घर को वारिस मिल जाएगा और तुम्हारी इज्जत बढ़ जाएगी।”

सपना, जो खुद संतान की चाह में समाज के ताने सुन रही थी, प्रकाश की बातों में आ गई। उसने अपने पति के प्रति वफादारी को दरकिनार कर दिया। उस दिन ससुर और बहू ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। प्रकाश ने सपना को धन और गहनों का लालच भी दिया। देखते ही देखते सपना और प्रकाश के बीच यह गलत सिलसिला शुरू हो गया। प्रकाश ने बाद में यही जाल अपनी बड़ी बहू राखी के लिए भी बुना।

उसने राखी से झूठ बोला कि शिव कुमार उसे तलाक देने वाला है क्योंकि वह उसे संतान नहीं दे पा रही। डर और असुरक्षा के भाव में डूबी राखी ने भी वही रास्ता चुना जो सपना ने चुना था।

लालच और विश्वासघात की पराकाष्ठा

प्रकाश की हवस यहीं नहीं रुकी। उसने बहुओं को खुश रखने के लिए उन्हें सोने की अंगूठियां और उपहार दिए। जब घर में सभी मौजूद होते, तो वह नींद की गोलियों का सहारा लेता। वह बहुओं के माध्यम से अपने ही बेटों के खाने में नशीली दवाएं मिलवा देता ताकि वे गहरी नींद में सो जाएं और वह अपने कुत्सित इरादों को अंजाम दे सके।

बहुएं भी उपहारों और आने वाली संतान के लालच में इस हद तक गिर गईं कि उन्होंने अपने पतियों के जीवन के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया।

सच का सामना और खूनी अंजाम

1 फरवरी 2026 को सपना और राखी की तबीयत खराब हुई। वे डॉक्टर के पास गईं और पता चला कि दोनों गर्भवती हैं। वे खुशी-खुशी घर लौटीं और अपने पतियों को यह खबर सुनाई। उन्हें लगा कि उनके पति खुश होंगे और उनकी कमियों का राज़ दफन रहेगा।

लेकिन शिव कुमार और हरी सिंह सन्न रह गए। उन्हें डॉक्टर की वह रिपोर्ट याद थी जिसमें कहा गया था कि वे कभी पिता नहीं बन सकते। उनका संदेह यकीन में बदल गया। जब उन्होंने सख्ती से पूछताछ की और बहुओं की पिटाई की, तो सपना और राखी ने रोते हुए सारी सच्चाई उगल दी। उन्होंने बताया कि कैसे उनके ससुर ने उन्हें बहलाया और कैसे उन्होंने मिलकर अपने पतियों को धोखा दिया।

गुस्सा, अपमान और विश्वासघात की आग ने दोनों भाइयों को अंधा कर दिया। उन्होंने हाथ में गंडासी उठाई और अपनी-अपनी पत्नियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जब प्रकाश सिंह खेत से लौटा, तो बेटों ने उसे भी नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने पिता का भी वही अंत किया जो उसने उनके विश्वास का किया था।

समाज के लिए एक सबक

40 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुंची। चारों तरफ खून ही खून था। पुलिस ने शिव कुमार और हरी सिंह को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने उनसे हत्याकांड की वजह पूछी, तो उनकी दास्तां सुनकर पुलिसकर्मी भी कांप उठे।

यह घटना आज भी बालेश्वर गांव के लोगों के ज़हन में ताज़ा है। यह कहानी हमें आगाह करती है कि जहाँ नैतिकता का पतन होता है और रिश्तों की मर्यादाएं टूटती हैं, वहाँ अंत केवल विनाश ही होता है। प्रकाश सिंह की हवस, बहुओं का भटकाव और बेटों का कानून को हाथ में लेना—तीनों ने मिलकर एक वंश का अंत कर दिया।

निष्कर्ष: रिश्तों की नींव विश्वास और मर्यादा पर टिकी होती है। जब स्वार्थ और विकार इस नींव को खोखला कर देते हैं, तो पूरा समाज शर्मसार होता है। क्या हिंसा ही इसका एकमात्र समाधान था? यह सवाल आज भी समाज के सामने खड़ा है।