“द एटरनल आई: बच्चों के रहस्यमय गायब होने का सच”

परिचय:
क्या आपने कभी सोचा है कि विज्ञान की सीमाएं कहां खत्म होती हैं और अज्ञात की शुरुआत कहां से होती है? जब चिकित्सा विज्ञान किसी ऐसी चीज के सामने घुटने टेक देता है, जो मानव समझ से परे हो, तो हम क्या करते हैं? इस सवाल का जवाब शायद 1921 के गर्मियों में बंबई के किद्वई नगर इलाके में हुआ था, जब एक छह साल के बच्चे के जीवन ने सभी को चौंका दिया और बंबई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को एक रहस्य में घसीट लिया, जिसका खुलासा कई दशकों बाद हुआ।
यह कहानी राजेश पिल्लई नामक एक छोटे बच्चे की है, जिसने अपनी आंखों से ऐसा कुछ देखा, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था। इस घटना ने न केवल चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं को चुनौती दी, बल्कि एक अंधेरे अतीत को भी उजागर किया, जिसे किसी ने कभी नहीं जाना था।
भाग 1: रहस्यमयी दौरे
राजेश पिल्लई का जन्म 1915 में हुआ था, और वह एक सामान्य परिवार से था। उसके पिता नारायण पिल्लई एक छोटे से किताबों की दुकान चलाते थे, और मां लक्ष्मी एक गृहिणी थीं। राजेश की जिंदगी में कोई समस्या नहीं थी, और वह अपने माता-पिता के साथ खुश था। लेकिन फरवरी 1921 में एक दिन सुबह-सुबह उसकी माँ ने देखा कि राजेश अपने कमरे में एकटक किसी अनदेखी चीज़ को घूर रहा था। उसकी आंखें खुली थीं, लेकिन वह न किसी से बात कर रहा था और न ही कोई प्रतिक्रिया दे रहा था। उसका शरीर ठंडा था और नाड़ी धीमी थी।
लक्ष्मी पिल्लई ने तुरंत वैद्य गोविंद राव शास्त्री को बुलाया। वे आए और राजेश का परीक्षण किया, लेकिन कुछ समझ नहीं आया। उन्होंने राजेश को कुछ पारंपरिक उपचार दिए, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। तीन दिन तक राजेश वैसे ही पड़ा रहा, और फिर अचानक वह ठीक हो गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। वह उठा, खेला और खाने लगा। यह घटना पहली बार थी, लेकिन फिर दो सप्ताह बाद ऐसा ही हुआ। इस बार वह चार दिन तक उसी अवस्था में रहा। जब वह होश में आया, तो उसने कुछ ऐसा कहा जिसने उसकी माँ को हिला दिया।
भाग 2: अंधेरी जगह का रहस्य
राजेश ने अपनी माँ से कहा, “मैंने एक अंधेरी जगह देखी है, जहाँ बहुत सारे बच्चे हैं और वे रो रहे हैं। वहाँ एक आदमी है जो हमें देख रहा है।” राजेश के शब्दों को सुनकर लक्ष्मी को विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि वह बहुत स्पष्टता से उस अंधेरी जगह का वर्णन कर रहा था, जो उसकी माँ की नज़र में नहीं थी। उसकी बातों से यह लगने लगा कि शायद वह सपना नहीं देख रहा था, बल्कि कुछ और ही था।
यह घटना बढ़ती गई, और राजेश बार-बार अपनी स्थिति का विस्तार से वर्णन करने लगा। उसने बताया कि वहां एक लंबा गलियारा है, दीवारों पर अजीब निशान हैं, और वह आदमी अब उसे देख सकता है। यह सब सुनकर नारायण पिल्लई ने तय किया कि उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वे राजेश को लेकर बंबई के सबसे प्रतिष्ठित डॉक्टर, डॉ. अलेक्जेंडर मैकेंजी के पास गए।
डॉ. मैकेंजी ने राजेश का परीक्षण किया, लेकिन कुछ खास नहीं पाया। उन्होंने कहा कि यह मानसिक विकार हो सकता है, और दवाइयाँ दीं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। यह घटना बार-बार घटने लगी, और हर बार राजेश उस अंधेरी जगह के बारे में और विस्तार से बताता गया।
भाग 3: मेडिकल जांच और अजीब घटनाएं
मई के पहले सप्ताह में, डॉक्टर रदरफोर्ड और उनके सहायक डॉक्टर श्रीनिवास अय्यर राजेश से मिलने पिल्लई परिवार के घर गए। डॉक्टर रदरफोर्ड ने देखा कि राजेश सामान्य लग रहा था, लेकिन जब डॉक्टर अय्यर ने राजेश से उसके दौरे के बारे में पूछा, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी दूरी आ गई।
राजेश ने कहा, “जब मैं उस जगह जाता हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं अपने शरीर से बाहर हूँ।” उसने बताया कि वह जगह एक बड़ी इमारत के नीचे है, वहां सीढ़ियां हैं, और गलियारे के दोनों तरफ कमरे हैं। राजेश ने यह भी कहा कि वह आदमी अब उसे बुला रहा है, वह चाहता है कि वह उसके पास जाए।
डॉक्टर रदरफोर्ड ने राजेश को अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय लिया। 10 मई 1921 को राजेश बंबई मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती किया गया। पहले तीन दिन राजेश को कोई दौरा नहीं पड़ा, लेकिन चौथे दिन सुबह 5:00 बजे नर्स मैरी डिसूजा ने देखा कि राजेश बिस्तर पर बैठा हुआ था और उसकी आंखें खुली थीं।
नर्स ने उसे हिलाया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। डॉक्टर मेनन ने जब राजेश को देखा, तो उन्हें लगा कि यह एक कैटाटोनिक अवस्था हो सकती है। डॉक्टर रदरफोर्ड ने राजेश की जांच की और उन्हें लगा कि यह कोई साधारण मानसिक विकार नहीं था।
भाग 4: द एटरनल आई
एक दिन, राजेश के मुंह से आवाजें निकलनी शुरू हुईं, लेकिन ये उसकी नहीं थी। यह आवाजें अलग-अलग बच्चों और एक महिला की थीं। उन्होंने मराठी, गुजराती और हिंदी में बात की और कहा, “हमें बाहर निकालो, हमें बचाओ!” डॉक्टर रदरफोर्ड और उनकी टीम चौंक गए और तुरंत पुलिस को सूचित किया।
राजेश की बातें और आवाजें इतनी स्पष्ट और असामान्य थीं कि डॉक्टर रदरफोर्ड को यकीन हो गया कि यह कोई साधारण मानसिक समस्या नहीं थी। राजेश ने उन बच्चों के बारे में भी बताया जो अंधेरी जगह में फंसे हुए थे। उन बच्चों के नाम, उनके गाँव और उनके बारे में बाकी जानकारी भी उसने दी।
डॉक्टर रदरफोर्थ और इंस्पेक्टर चंद्रन की जांच में यह तथ्य सामने आया कि राजेश ने जिन बच्चों के नाम बताए थे, वे सचमुच लापता हो चुके थे। पुलिस को यह मानना पड़ा कि यह मामला कुछ बहुत भयानक और रहस्यमय था।
भाग 5: संप्रदाय का रहस्य
जांच के दौरान पता चला कि ये बच्चे किसी रहस्यमय संप्रदाय के सदस्य हो सकते हैं, जो बच्चों का अपहरण कर उन्हें किसी अजीब प्रयोग का शिकार बनाते थे। यह संप्रदाय “द आर्डर ऑफ द एटरनल आई” के नाम से जाना जाता था। उनके प्रयोग बच्चों की मानसिक शक्तियों पर आधारित थे और उन्हें अलौकिक संसार से जोड़ने के उद्देश्य से किए जाते थे।
इंस्पेक्टर चंद्रन और उनकी टीम ने संप्रदाय के बचे हुए सदस्यों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया। लेकिन राजेश की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, और वह अधिक से अधिक टूटने लगा था। उसे हर दिन दौरे पड़ने लगे थे और उसके मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आई।
अंत:
कभी-कभी रहस्य इतने गहरे होते हैं कि उन्हें समझने के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होना पड़ता है। राजेश का मामला एक ऐसी घटना बन गई जिसने न केवल चिकित्सा विज्ञान को चुनौती दी, बल्कि समाज के सामने उन गहरे अंधेरे रहस्यों को भी उजागर किया जिन्हें कोई नहीं देख पाता।
राजेश का जीवन अब पहले जैसा नहीं रहा। वह मानसिक रूप से खो चुका था, और उसका शरीर जीवन की जंग हार चुका था। लेकिन वह रहस्य, जो उसने उजागर किया, अब भी अनसुलझा है।
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