रसोई के नीचे दफन राज: एक विश्वासघाती प्रेम की दास्तान

अध्याय 1: गोंडा से सपनों के शहर तक

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक छोटे से गाँव में रहने वाला रईस शेख एक साधारण और मेहनती युवक था। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। साल २०१२ में रईस की जिंदगी में एक नया मोड़ आया, जब उसके घर वालों ने उसकी शादी तय की। रईस का निकाह गोंडा की ही रहने वाली ‘शाहिदा’ से हुआ।

शुरुआत में दोनों की शादीशुदा जिंदगी किसी फिल्म की तरह खुशनुमा थी। रईस और शाहिदा एक-दूसरे का बहुत सम्मान करते थे। कुछ समय बाद उनके घर एक नन्हीं परी का जन्म हुआ। बेटी की पैदाइश के चार साल बाद एक बेटा भी हुआ। रईस का परिवार अब पूरा था।

लेकिन बढ़ते परिवार के साथ जरूरतें भी बढ़ने लगीं। गोंडा जैसे छोटे शहर में रोजगार के सीमित अवसर थे। रईस को लगा कि अगर उसे अपने बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना है, तो उसे कुछ बड़ा करना होगा। उसने अपने जानकारों से संपर्क किया और आखिरकार उसे ‘सपनों के शहर’ मुंबई में एक काम मिल गया।

अध्याय 2: मुंबई का नया जीवन

रईस पहले अकेले मुंबई आया। यहाँ दहिसर इलाके में उसे एक कपड़े की दुकान पर सेल्समैन की नौकरी मिली। रईस ने दिन-रात मेहनत की। वह हर महीने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा घर भेजता था। लेकिन कुछ ही महीनों में उसे अहसास हुआ कि परिवार के बिना जिंदगी अधूरी है।

जब रईस ने मुंबई में अपने पैर जमा लिए, तो उसने दहिसर में ही एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया और शाहिदा तथा दोनों बच्चों को वहीं बुला लिया। अब वे सब एक साथ थे। रईस सुबह दुकान जाता और रात को देर से घर लौटता।

अध्याय 3: पड़ोसी और गलत संगत

रईस के घर के बगल में ही ‘अनिकेत’ उर्फ ‘अमित’ नाम का एक युवक रहता था। अमित कुंवारा था और अक्सर घर पर ही रहता था। एक पड़ोसी होने के नाते रईस और शाहिदा की उससे जान-पहचान हो गई। अक्सर कहा जाता है कि मुसीबत में सबसे पहले पड़ोसी ही काम आता है, इसलिए रईस ने भी अमित पर बहुत भरोसा किया।

लेकिन वक्त के साथ शाहिदा और अमित की यह जान-पहचान दोस्ती और फिर एक अनुचित संबंध में बदल गई। शाहिदा अपने दो बच्चों की माँ होने के बावजूद अमित के आकर्षण में खिंची चली गई। जब रईस काम पर होता, तब अमित अक्सर उसके घर आने लगा।

अध्याय 4: संदेह और चेतावनी

इश्क और मुश्क कभी छिपे नहीं रहते। पड़ोसियों को भी शाहिदा और अमित की बढ़ती नजदीकियों पर शक होने लगा। धीरे-धीरे यह बात रईस के कानों तक भी पहुँची। शुरुआत में रईस ने इन बातों को अनदेखा किया, लेकिन कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं कि रईस का शक यकीन में बदल गया।

उसने शाहिदा को बहुत समझाया। दोनों के बीच इस बात को लेकर काफी झगड़ा भी हुआ। शाहिदा ने कसम खाई कि वह अमित से दूरी बना लेगी, लेकिन वह केवल रईस को गुमराह कर रही थी।

अध्याय 5: वह काली शाम – २१ मई

२१ मई २०२४ की तारीख रईस की जिंदगी की आखिरी तारीख साबित होने वाली थी। शाहिदा को पता था कि रईस रात ९-१० बजे से पहले घर नहीं आएगा। उसने मौका पाकर अमित को घर बुलाया।

इधर रईस के मन में बेचैनी थी। उसे अंदर से लग रहा था कि कुछ गलत हो रहा है। वह अपनी दुकान के मालिक से बहाना बनाकर बीच में ही घर के लिए निकल गया। जब उसने चुपके से घर का दरवाजा खोला, तो उसने शाहिदा और अमित को उस हालत में देख लिया जिसे कोई भी पति बर्दाश्त नहीं कर सकता। रईस ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।

अध्याय 6: साजिश का भयानक रूप

रईस ने गुस्से में अमित को बुरा-भला कहा और शाहिदा को अंतिम चेतावनी दी। लेकिन शाहिदा और अमित पहले ही रईस को अपने रास्ते का कांटा मान चुके थे। शाहिदा ने कुछ दिन पहले ही रईस से कहकर किचन की फर्श मरम्मत करवाने के बहाने टाइल्स, सीमेंट और रेत मंगवा ली थी। रईस को लगा था कि शाहिदा घर को सुंदर बनाना चाहती है, पर उसे नहीं पता था कि वह अपनी ही कब्र का सामान मंगा रहा है।

२१ मई की उस रात, झगड़े के दौरान अमित ने रईस पर हमला कर दिया। दोनों ने मिलकर रईस को काबू में किया और शाहिदा ने एक तेज धार वाले हथियार से रईस का अंत कर दिया।

अध्याय 7: मासूम गवाह और खौफनाक धमकी

जब यह अपराध घटित हो रहा था, तभी रईस की ६ साल की बेटी अपने छोटे भाई के साथ कमरे में दाखिल हुई। उसने देखा कि उसकी माँ और ‘अंकल’ ने उसके पिता के साथ क्या किया है। वह मासूम बच्ची सन्न रह गई।

शाहिदा ने अपनी ममता को ताक पर रखकर अपनी ही बेटी को डराया। उसने कहा, “अगर तूने यह बात किसी को बताई, तो तुझे और तेरे भाई को भी इसी तरह मार दूंगी।” उस ६ साल की बच्ची के मन पर ऐसा खौफ बैठा कि उसने बोलना ही बंद कर दिया।

अध्याय 8: रसोई में दफन राज

दहिसर जैसे घने इलाके में लाश को बाहर ले जाना जोखिम भरा था। इसलिए शाहिदा और अमित ने पहले से तय योजना के अनुसार किचन की फर्श को ३ फीट तक खोदा। रईस की कद-काठी बड़ी थी, इसलिए उन्होंने निर्दयतापूर्वक उसके शरीर के टुकड़े किए और उन्हें किचन के गड्ढे में डाल दिया। ऊपर से उन्होंने नए टाइल्स लगा दिए।

अगले दिन से शाहिदा उसी किचन में खाना बनाने लगी, जिसके नीचे उसके पति की लाश दफन थी। ११ दिनों तक वह वहीं चूल्हा जलाती रही, बर्तन धोती रही और बच्चों को खाना खिलाती रही।

अध्याय 9: मिसिंग रिपोर्ट और पुलिस का शक

२५ मई को शाहिदा खुद पुलिस स्टेशन गई और रईस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। उसने पुलिस को बताया कि २१ तारीख से रईस बिना बताए कहीं चला गया है। इधर गोंडा में रईस का भाई ‘अनीस’ परेशान था। जब एक हफ्ते तक रईस का फोन नहीं आया, तो वह उसे ढूंढने मुंबई पहुँच गया।

अनीस ने शाहिदा से पूछा, पर उसने वही घिसी-पिटी कहानी दोहरा दी। अनीस को कुछ अजीब लगा।

अध्याय 10: मासूम की जुबानी और सच का खुलासा

एक दिन जब शाहिदा किसी काम से बाहर गई थी, तो अनीस अपनी ६ साल की भतीजी के साथ घर पर अकेला था। बच्ची अपने चाचा से बहुत प्यार करती थी। उसने धीरे से अनीस का हाथ पकड़ा और रोते हुए कहा, “चाचा, मम्मी ने पापा को मार दिया है और रसोई में गाड़ दिया है। मम्मी कहती है अगर बताया तो मुझे भी मार देगी।”

यह सुनकर अनीस के पैरों तले से जमीन खिसक गई। वह तुरंत बच्ची को लेकर पुलिस स्टेशन पहुँचा।

अध्याय 11: रसोई की खुदाई और फॉरेंसिक जांच

पुलिस पहले तो चौंक गई, लेकिन बच्ची के बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। १ जून की शाम पुलिस शाहिदा के घर पहुँची। रसोई का निरीक्षण करने पर पुलिस को कुछ टाइल्स बेतरतीब लगे। पुलिस ने मजदूरों को बुलाकर खुदाई शुरू करवाई।

करीब ११ घंटे की खुदाई के बाद जमीन के अंदर से एक-एक करके रईस के शरीर के हिस्से मिलने लगे। यह मंजर इतना भयानक था कि देखने वालों की रूह कांप गई। शाहिदा और अमित को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

अध्याय 12: अंत और सबक

शाहिदा और अमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। शाहिदा ने बताया कि उसने अपने अनैतिक प्रेम के लिए अपने पति की बलि चढ़ा दी। आज रईस इस दुनिया में नहीं है, शाहिदा और उसका प्रेमी जेल की सलाखों के पीछे हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन दो मासूम बच्चों का है। उनका क्या कसूर था? जिनके पिता की हत्या हो गई और माँ जेल चली गई। समाज में ऐसी घटनाएँ चेतावनी देती हैं कि जब इंसान अपनी मर्यादा भूल जाता है, तो वह दानव से भी बदतर हो जाता है।

निष्कर्ष: यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चाई को कभी दबाया नहीं जा सकता और पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर भरता है।