Bihar के खगड़िया की ये घटना को देखकर रो पड़ेंगे आप, मासूम बच्ची का पूरा परिवार बिलख रहा…

खगड़िया: चार साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी, इंसानियत शर्मसार—परिवार की इंसाफ की गुहार

बिहार के खगड़िया जिले के गगौर थाना क्षेत्र के बधास गांव में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है।
चार साल की मासूम बच्ची, जो मंगलवार शाम घर से महज 500 मीटर दूर बिस्किट लेने गई थी, कभी वापस नहीं लौटी।
अगले दिन सुबह उसका शव सरसों के खेत में मिला—हाथ में कसकर पकड़ा हुआ ₹5 का सिक्का, जैसे आखिरी उम्मीद थामे हो।

मासूमियत पर दरिंदगी का साया

परिजनों ने बच्ची के लापता होने के बाद आसपास खूब खोजबीन की, सोशल मीडिया पर अपील की, पुलिस को सूचना दी।
रातभर सर्च ऑपरेशन चला, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
अगली सुबह ड्रोन कैमरे से खोजबीन की गई, तब जाकर घर से कुछ ही दूर खेत में बच्ची का शव मिला।
शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। पुलिस का शक है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई।

परिवार की हालत और सवाल

मां-बाप, चाचा—पूरा परिवार सदमे में है, रो-रोकर बुरा हाल है।
चाचा ने प्रशासन से हाथ जोड़कर मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर फांसी दी जाए।
परिवार का सवाल है—क्या चार साल की मासूम की कोई गलती थी?
कपड़ों, समय या जगह पर सवाल उठाने वाले समाज को जवाब देना होगा कि इतनी छोटी बच्ची की क्या गलती थी?

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने एफएसएल टीम के साथ साक्ष्य जुटाना शुरू किया है।
आरोपियों की पहचान के लिए अलग टीम गठित की गई है, लगातार छापेमारी जारी है।
एसपी ने भरोसा दिलाया है कि इस घिनौने अपराध में शामिल कोई भी बच नहीं पाएगा।

सिस्टम पर सवाल

हर बार की तरह फिर वही सवाल—कब मिलेगी सख्त सजा?
क्यों अपराधियों को कानून का डर नहीं है?
क्यों हर बार मोमबत्ती मार्च, बयानबाजी और आश्वासन के बाद केस ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं?
क्यों फास्ट ट्रैक कोर्ट, सख्त कानून की बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाती हैं?

बिहार में बढ़ते अपराध, घटता इंसाफ

बिहार में बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
लेकिन इंसाफ कागजों में है, जमीन पर नहीं।
अपराधियों को समय पर और सरेआम सजा नहीं मिलती, इसलिए उनका डर खत्म हो चुका है।

अब सवाल सरकार से

सरकार कब जागेगी?
कब कानून सिर्फ भाषणों के लिए नहीं, मासूम बच्चियों की जान बचाने के लिए भी लागू किया जाएगा?
परिवार की इंसाफ की मांग कब पूरी होगी?

यह घटना सिर्फ एक बच्ची के साथ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की हार है।
अब देखना है कि मासूम को इंसाफ मिलता है या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा।

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