Colombia Plane Crash:24 घंटे में Ajit Pawar के बाद दूसरा प्लेन क्रैश!| सांसद समेत 14 मरे|

प्लेन क्रैश का ब्लैक डे: 24 घंटे में दो बड़े हादसों ने दुनिया को दहलाया

हवाई सफर को दुनिया का सबसे सुरक्षित सफर माना जाता है, लेकिन पिछले 24 घंटों ने इस धारणा को झकझोर कर रख दिया है। भारत के बारामती में महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम अजीत पवार के विमान हादसे की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि कोलंबिया से एक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ गई। 24 घंटे के भीतर यह दूसरा बड़ा विमान हादसा है, जिसमें एक सांसद समेत 15 लोगों की जान चली गई है।

1. कोलंबिया हादसा: रडार से गायब होने के बाद मिला मलबा

कोलंबिया और वेनेजुएला की सीमा के पास बुधवार को एक कमर्शियल विमान बीचक्राफ्ट 1900 (Beechcraft 1900) अचानक लापता हो गया। रडार से संपर्क टूटने के बाद करीब 24 घंटे तक गहन तलाशी अभियान चलाया गया।

हादसे की लोकेशन: यह हादसा दुर्गम पहाड़ियों वाले कैटुंबा (Catumba) क्षेत्र में हुआ।
मृतकों की संख्या: विमान में सवार सभी 15 लोग (13 यात्री और 2 क्रू मेंबर) मारे गए हैं।
वीआईपी कैजुअल्टी: इस विमान में कोलंबियाई संसद के सदस्य (Chamber of Deputies) और आगामी चुनाव के एक बड़े उम्मीदवार भी शामिल थे।
चुनौती: मलबा उबड़-खाबड़ पहाड़ियों में मिला है, जिससे यह साफ होता है कि विमान पूरी तरह चकनाचूर हो चुका था। खराब मौसम को शुरुआती वजह माना जा रहा है।

2. बारामती (भारत): अजीत पवार का आखिरी सफर और पायलट की चूक?

भारत में 28 जनवरी 2026 की सुबह जो हुआ, उसने पूरे देश को सदमे में डाल दिया। बारामती में लैंडिंग से महज कुछ मिनट पहले अजीत पवार का विमान क्रैश हो गया। आज जब उनका अंतिम संस्कार हुआ, तो पूरा महाराष्ट्र शोक में डूबा नजर आया। लेकिन इस हादसे की जांच अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है:

क्या ‘ओ शिट’ (Oh Shit) ने ली जान? जांच में को-पायलट सांभवी पाठक के आखिरी शब्द रिकॉर्ड हुए हैं। उन्होंने इमरजेंसी कॉल ‘मेडे’ (May Day) देने के बजाय ‘ओ शिट’ कहा। प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी खतरे की स्थिति में पायलट को तीन बार ‘मेडे’ बोलना होता है ताकि एटीसी अलर्ट हो सके, लेकिन यहां मानवीय प्रतिक्रिया ने प्रोटोकॉल की जगह ले ली।

तकनीकी विरोधाभास:

विमान: क्रैश हुआ विमान ‘डबल इंजन’ था, जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता है।
अनुभव: पायलटों के पास 15,000 से 16,000 घंटे की उड़ान का विशाल अनुभव था।
दृश्यता (Visibility): वीआईपी लैंडिंग के लिए 5 किमी की विजिबिलिटी चाहिए होती है, जबकि वहां केवल 3 किमी थी। फिर भी लैंडिंग का प्रयास क्यों किया गया?

3. समानताएं: लैंडिंग से ठीक पहले टूटा संपर्क

हैरानी की बात यह है कि कोलंबिया और बारामती, दोनों ही हादसों में विमान लैंडिंग के बहुत करीब थे।

कोलंबिया विमान लैंडिंग से मात्र 11 मिनट पहले रडार से गायब हुआ।
बारामती में भी विमान रनवे के थ्रेशोल्ड के पास ही क्रैश हुआ।
दोनों ही मामलों में पायलटों ने दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश (Go-Around) की थी, जो घातक साबित हुई।

4. हवाई सुरक्षा पर बड़े सवाल: क्या चार्टर्ड प्लेन सुरक्षित हैं?

2026 की शुरुआत ही इन दो बड़े हादसों से हुई है। इससे एविएशन सेक्टर में एक नई बहस छिड़ गई है:

    सिंगल बनाम डबल इंजन: हालांकि डबल इंजन सुरक्षित होते हैं, लेकिन दोनों हादसों में इंजनों की सुरक्षा धरी की धरी रह गई।
    वीआईपी प्रोटोकॉल का उल्लंघन: क्या खराब विजिबिलिटी में दबाव के कारण लैंडिंग की कोशिश की गई?
    मौसम बनाम तकनीक: पहाड़ी इलाकों (कोलंबिया) और कोहरे वाले इलाकों (भारत) में तकनीक की सीमाएं क्या हैं?

निष्कर्ष

अजीत पवार का जाना भारत के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति है, वहीं कोलंबिया का हादसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाता है। दोनों ही हादसों में किसी के भी जीवित न बचने की खबर इस बात की गवाह है कि आसमान की ऊंचाई पर एक छोटी सी मानवीय या तकनीकी चूक की कीमत केवल जान देकर ही चुकानी पड़ती है।

सावधानी ही बचाव है। प्रशासन को अब छोटे और चार्टर्ड विमानों के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की आवश्यकता है।