Ek Ladki Aur Kutte Ki Shadi Ka Waqai… Sun Ke Yakin Nahi hoga |

काले कुत्ते का वादा और जादुई महल
एक जमाने की बात है। एक औरत अपने शौहर के साथ बरसों से रहती थी। मगर उसकी गोद अब भी सूनी थी। हर सुबह उठकर दुआ मांगती, हर रात आसमान की तरफ देखकर आह भरती— “या अल्लाह, मुझे औलाद की नेमत अता कर।” वक्त अपनी रफ्तार से गुजरता रहा। एक रात, आधी रात का वक्त था, करीब 12:00 बज रहे थे। सड़क सुनसान, हवा ठंडी और खामोशी इतनी गहरी कि कदमों की आहट भी चौंका दे।
औरत अपने शौहर के साथ घर लौट रही थी कि अचानक रास्ते के ठीक बीचोंबीच एक बड़ा सा काला कुत्ता आ खड़ा हुआ। उसकी आंखें लाल अंगारों की तरह चमक रही थी, जैसे अंधेरी रात में दो चिंगारियां जल रही हों। फिर उसने इतनी जोर से भौंक कर चीख लगाई कि रात की खामोशी चीर गई। औरत का दिल धक से रह गया। सांस गले में अटक गई। डर से कांपते हुए वह फुसफुसाई— “ए कुत्ते, हमें जाने दे। अगर अल्लाह ने हमें बेटी दी तो मैं उसकी शादी तुझसे कर दूंगी।” बस यह कहना था कि कुत्ते ने रास्ता छोड़ दिया और चुपचाप एक तरफ हट गया, जैसे वही इस रास्ते का असली रखवाला हो।
दुआ की मिठास और नियति का खेल
दिन गुजरते गए, हफ्ते बदलते रहे और एक सुबह औरत को अपने भीतर नई जान की हरकत महसूस हुई। उसका चेहरा खिल उठा; दुआ कबूल हो चुकी थी। फिर वक्त आया और अल्लाह ने उसे एक खूबसूरत सी बेटी दी। घर में रौनक फैल गई। हंसी, खुशबू, बरकत— सब एक साथ आ गए। वह बच्ची जब हंसती तो सारा गम और थकान मिट जाती। पिता उसे गोद में झुलाता और कहता— “यह हमारी खुशी है, हमारी जान है।”
धीरे-धीरे साल गुजरे और बच्ची बड़ी होकर तालीम लेने जाने लगी। वह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही नेक दिल भी। एक दिन जब वह पढ़ कर आ रही थी, उसी सुनसान रास्ते पर वही पुराना साया खड़ा था। वही काला कुत्ता— ना भौंका, ना दहाड़ा। बस अपनी ठंडी और गहरी नजरों से उसे देखता रहा। लड़की सहम गई। कुत्ता उसके करीब आया और एक गहरे, भारी इंसानी लहजे में बोल उठा— “अपनी मां से कहना उसका वादा पूरा होने का वक्त आ गया है।”
बच्ची के हाथ-पैर ठंडे हो गए। दिल में दहशत का तूफान उठा और वह घर की तरफ भागी। मगर जैसे ही उसने घर की दहलीज पार की, वह सब कुछ भूल गई। ना किसी को बताया, ना खुद को याद रहा। अगले दिन फिर वही हुआ, और तीसरे दिन भी। वह कुत्ता आता, वादा याद दिलाने को कहता, और लड़की हर बार घर पहुँचते ही उसे भूल जाती।
चौथे दिन कुत्ते ने लड़की को कुछ जादुई मिठाई दी और नरमी से बोला— “इसे अपनी जेब में रखो, अब तुम्हें सब याद रहेगा।” लड़की ने मिठाई ली, जेब में रखी और घर पहुँची। वह फिर से सब भूल गई, लेकिन उसकी नियति उसे याद दिलाने वाली थी। शाम को जब मां उसकी कमीज तय कर रही थी, तो अचानक जेब से मिठाई के छोटे-छोटे टुकड़े गिर पड़े। मां ने हैरानी से पूछा— “यह मिठाई कहाँ से आई?”
लड़की कुछ पल चुप रही, फिर कांपती आवाज में बोली— “एक काले कुत्ते ने दी है मां। उसने कहा कि आपसे कहूँ अपना वादा पूरा करो।” यह सुनते ही मां का दिल जैसे धड़कना भूल गया। वो पुरानी स्याह रात, वो खौफनाक कुत्ता और वो बेबाक वादा— सब कुछ उसकी रगों में दोबारा जाग उठा। उसका चेहरा पीला पड़ गया और वह वहीं जमीन पर बैठ गई।
विदाई और जादुई उड़ान
उस रात जब शौहर घर लौटा, तो मां ने रोते हुए उसे सारी हकीकत बताई। आदमी की आंखों में भी दहशत दौड़ गई, मगर वह जानता था कि अल्लाह के नाम पर किया गया वादा कभी तोड़ा नहीं जाता। उनकी नजरें अपनी मासूम बेटी पर गई, तो दिल भर आया। जो खुशी दुआ बनकर आई थी, अब वही सबसे बड़ा डर बन गई थी।
फिर एक शाम, जब अंधेरा गहरा होने लगा, दरवाजे पर दस्तक हुई— ‘थक-थक-थक’। मां का दिल सीने से बाहर आने को था। उसने दरवाजा खोला, सामने वही काला कुत्ता खड़ा था— खामोश और सख्त। मां ने आंसू पोंछते हुए बेटी से कहा— “बेटी, तैयार हो जाओ।” लड़की ने सवालिया नजरों से पूछा, और मां ने रुक-रुक कर उसे उस पुराने वादे की पूरी कहानी सुना दी।
बेटी चुपचाप सुनती रही। आंसू बहे, पर कोई शिकायत नहीं की। उसने अपने बाप को आखिरी बार गले लगाया और बाहर निकल आई। कुत्ता उसे गांव से बहुत दूर ले गया, जहाँ रास्ते खत्म होते हैं और नई किस्में शुरू होती हैं। रास्ते में कुत्ता रुका और बोला— “मेरी पीठ पर बैठ जाओ।” लड़की सहमते हुए बैठ गई। अगले ही पल वे आसमान की ओर उड़ रहे थे। नीचे की दुनिया धुंधली होती गई और वे बादलों के ऊपर एक नई रहस्यमयी दुनिया की दहलीज पर पहुँच गए।
सोने का महल और खौफनाक राज
जब वे जमीन पर उतरे, तो सामने सोने की तरह चमकता एक विशाल महल था। उसकी दीवारों पर बारीक नक्काशी थी और हवा में एक अजीब सी खुशबू थी। महल के अंदर कदम रखते ही लड़की विस्मय से भर गई। हीरे से चमकते झूमर, रेशमी कालीन और हर सुख-सुविधा वहां मौजूद थी। वह वहां किसी राजकुमारी की तरह रहने लगी।
हर रोज वह काला कुत्ता उसके लिए उपहार लाता— कभी कीमती कपड़े, कभी लजीज पकवान। एक दिन लड़की ने हिम्मत जुटाकर पूछा— “यह सब क्यों? तुम मेरे लिए ये सब क्यों करते हो?” कुत्ते ने बोझिल आवाज में जवाब दिया— “पूरा चांद चढ़ने का इंतजार करो। उस रात मेरा मालिक, जिन्नों का राजा, आएगा और तुमसे निकाह करेगा।”
जैसे-जैसे दिन बीते, लड़की को महसूस होने लगा कि इस महल की खूबसूरती के पीछे एक गहरा सन्नाटा और डर छुपा है। एक रात उसे एक गुप्त गलियारे में कुत्ता मिला, जो रो रहा था। लड़की के बार-बार पूछने पर कुत्ते ने अपना राज खोला। उसने बताया— “मेरा नाम खादिम है। मैं कभी इस राज्य का राजकुमार था। मैंने राजा के जुल्मों का विरोध किया, तो उसने मुझे कुत्ता बना दिया। यहाँ हर महीने एक इंसानी लड़की लाई जाती है, उसकी शादी राजा से होती है, और जैसे ही वह गर्भवती होती है, राजा उसे अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए खा जाता है।”
आजादी की जंग और जादुई पत्थर
लड़की और खादिम ने मिलकर भागने की योजना बनाई। पूर्णिमा की रात, जब पूरा चांद आसमान में चमक रहा था, जिन्न राजा एक हसीन नौजवान के रूप में महल में दाखिल हुआ। उसने लड़की को मीठी बातों में फंसाने की कोशिश की, लेकिन लड़की तैयार थी। उसने राजा को एक नशीला शरबत पिलाया। जैसे ही राजा पर नशे का असर हुआ, उसकी खाल फटने लगी और उसका डरावना जिन्न रूप बाहर आने लगा।
लड़की ने हिम्मत जुटाई और राजा के गले से वह सुनहरी चैन खींच ली, जो इस महल के तमाम जादुई दरवाजों की चाबी थी। वह और खादिम वहां से तेजी से भागे। राजा की दहाड़ें महल की दीवारों को हिला रही थीं। वे भागकर एक गहरे जंगल में पहुँचे, जहाँ उनकी मुलाकात एक बूढ़े फकीर से हुई।
फकीर पहले तो जिन्नों और उनकी दुनिया से नफरत करता था, लेकिन जब उसे पता चला कि खादिम ने ही बरसों पहले उसकी मां की जान बचाई थी, तो उसका दिल पिघल गया। फकीर ने अपनी रूहानी ताकतों से उनकी मदद की। खादिम ने बताया— “राजा की जान उस महल के सबसे गहरे तहखाने में रखे एक काले जादुई पत्थर में है।”
तीनों वापस महल पहुँचे। राजा उन्हें मारने के लिए झपटा, लेकिन फकीर ने अपनी शक्तियों से उसे रोका। लड़की और खादिम तहखाने में पहुँचे और उस पत्थर को खोज निकाला। लड़की ने पूरी ताकत से उस पत्थर को जमीन पर दे मारा। पत्थर के टुकड़े-टुकड़े होते ही एक जोरदार धमाका हुआ और राजा धुएं में बदल गया। उसी क्षण खादिम का कुत्ता रूप खत्म हो गया और वह फिर से एक सुंदर राजकुमार बन गया।
एक नई शुरुआत
कहानी का अंत बहुत सुखद रहा। खादिम ने इंसानों की बस्ती के पास एक सुंदर और शांत घर बनाया। वह लड़की उसकी अर्धांगिनी बनी और उन्होंने अपने माता-पिता को भी अपने पास बुला लिया। वह फकीर भी उनके साथ रहने लगा और अपनी शक्तियों से दुखी लोगों की मदद करता रहा। जिस वादे ने एक समय जीवन को अंधकार में डाल दिया था, उसी ने अंत में दो नेक रूहों को मिला दिया और बुराई का अंत किया।
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