Meerut Abduction Case: मां की हत्या कर दलित बेटी उठा ले गए दबंग,भड़के लोगों ने एंबुलेंस तोड़ी, बवाल !

मेरठ के कपसाड़ में दलित युवती का अपहरण और मां की हत्या: दहशत, गुस्सा और सवाल

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में दिनदहाड़े दलित युवती के अपहरण और उसकी मां की निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है। यह घटना न सिर्फ महिला सुरक्षा, बल्कि दलित समुदाय की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

घटना का पूरा विवरण

समय: गुरुवार सुबह करीब 8 बजे
मामला:

दलित युवती अपनी मां के साथ खेत में काम करने जा रही थी।
पहले से घात लगाए दबंग युवकों ने युवती को जबरन अगवा करने की कोशिश की।
विरोध करने पर धारदार हथियार से मां पर हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।
युवती को जबरन बाइक पर बैठाकर आरोपी फरार हो गए।

पीड़िता की स्थिति:

घायल मां को अस्पताल में भर्ती कराया गया, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
युवती का अब तक कोई सुराग नहीं।

आरोप:

नामजद आरोपी: पारस सोम, सुनील (विनोद का राजपूत), और अन्य अज्ञात।
आरोपियों ने परिवार को धमकी भी दी थी।

समाजिक तनाव:

पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
गांव में भारी तनाव, भीम आर्मी और अन्य सामाजिक संगठनों की सक्रियता।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

FIR दर्ज, चार नामजद समेत कई अज्ञात पर अपहरण और हत्या का मामला।
पुलिस ने पांच टीमें गठित की हैं, छापेमारी जारी।
एसएसपी का बयान:

“लड़की की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।”

परिजनों की मांग:

जब तक लड़की बरामद नहीं होती और दोषी गिरफ्तार नहीं होते, अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
आर्थिक सहायता, सुरक्षा और न्याय की मांग।

अस्पताल में हंगामा

इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद परिजनों ने शव को चोरी-छुपे ले जाने पर पुलिस-प्रशासन पर नाराजगी जताई।
अस्पताल परिसर में भीम आर्मी समेत ग्रामीणों का हंगामा।

गंभीर सवाल

महिला सुरक्षा:

अपराधी इतनी बेखौफी से वारदात कैसे कर रहे हैं?

दलित उत्पीड़न:

क्या दलित परिवारों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

प्रशासनिक संवेदनशीलता:

पीड़ित परिवार की बात क्यों नहीं सुनी जा रही?
अपराधियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों?

निष्कर्ष

यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी है।
महिला सुरक्षा, दलित अधिकार और कानून-व्यवस्था—तीनों पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
अब पूरा गांव, समाज और राज्य प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकाए बैठा है।

क्या सरकार और पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाएंगे?
क्या बेटियों की सुरक्षा और दलित सम्मान के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
अपनी राय जरूर साझा करें।

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