Meerut Kapsad Ruby Case: Paras, रूबी ने मां की हत्या पर पुलिस को क्या बताया? Chandrashekar Azad

मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण का सनसनीखेज मामला: पूरी कहानी हिंदी में
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कपसाड़ गांव में हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दलित महिला सुनीता की हत्या और उसकी बेटी रूबी के किडनैपिंग के मामले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। शुरुआती जांच में लग रहा था कि यह एक साधारण हत्या और अपहरण का मामला है, लेकिन अब जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आइए जानते हैं इस केस से जुड़ी हर एक डिटेल।
गांव में गुस्सा और मातम
घटना के बाद कपसाड़ गांव के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोग इंसाफ की मांग कर रहे हैं और शव का अंतिम संस्कार तक करने से इनकार कर दिया जब तक न्याय नहीं मिलता। खुद को दलितों का मसीहा मानने वाले नगिना के सांसद चंद्रशेखर आजाद भी इस मामले में सक्रिय हो गए। पुलिस ने उन्हें घटना स्थल पर जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बाइक से वहां पहुंचने की कोशिश की और सड़कों पर दौड़ते नजर आए। हालांकि, उन्हें घटना स्थल तक पहुंचने नहीं दिया गया।
घटना की शुरुआत
8 जनवरी 2026 की सर्द सुबह करीब 8 बजे सुनीता अपनी 21 साल की बेटी रूबी के साथ खेत में गन्ना काटने गई थी। तभी अचानक दो लड़के पीछे से आए और रूबी का हाथ पकड़कर उसे ले जाने लगे। सुनीता ने विरोध किया, तो हमलावरों ने गाली-गलौज की और गन्ना काटने वाले फरसे से सुनीता के सिर पर हमला कर दिया। सुनीता अधमरी हो गई और हमलावर रूबी को लेकर भाग गए। गांव वालों ने सुनीता को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी मौत हो गई। रूबी भी गायब थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। 48 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों समेत रूबी को खोज निकाला गया। जांच में पता चला कि पारस सोम, जिसने रूबी को अगवा किया था, उसे अपने रिश्तेदार के घर खतौली ले गया था। सुनीता की मौत की खबर मिलते ही दोनों घबरा गए और दिल्ली की ओर भाग निकले। वहां एक होटल में रात बिताई, फिर गुड़गांव पहुंचे और एक दोस्त के पास रुके। पारस सोम लगातार मीडिया के जरिए गांव के हालात पर नजर रखे हुए था। जैसे ही माहौल बिगड़ा, वह रूबी को लेकर ट्रेन से सहारनपुर पहुंच गया और अपनी बहन के घर रुका। शनिवार को हरिद्वार जाने की तैयारी की गई। इसी दौरान ट्रेन में एक सहयात्री के मोबाइल से परिवार को कॉल की गई, जिससे पुलिस को उनका सुराग मिल गया और पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रेम संबंध की सच्चाई
पुलिस कस्टडी में पारस सोम ने दावा किया कि रूबी से उसका तीन साल पुराना प्रेम संबंध था, जो कॉलेज के दिनों से शुरू हुआ था। दोनों ने घर से भागने का फैसला लिया था क्योंकि परिवार रूबी की शादी कहीं और तय कर चुका था। सुनीता के विरोध के दौरान हालात बेकाबू हो गए और हाथापाई में फरसे से हमला हुआ। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी में जुटी है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
रूबी के बयान का इंतजार
फिलहाल रूबी के बयान दर्ज नहीं हुए हैं। उसे आशा ज्योति केंद्र में महिला पुलिस की निगरानी में रखा गया है। मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज होने के बाद ही केस की धाराएं तय होंगी। अभी दोनों आरोपियों को सुनीता हत्याकांड में नामजद किया गया है और आगे की कार्रवाई युवती के बयान पर निर्भर करेगी।
साजिश की तैयारी पहले से
जांच में यह भी सामने आया कि रूबी को साथ ले जाने की साजिश दो महीने पहले ही हो चुकी थी। गुरुवार को जब रूबी खेत जा रही थी, तभी पारस सोम और सुनील सोम उसके पीछे-पीछे निकल पड़े। रूबी के तैयार होते ही मां सुनीता ने विरोध किया और यही विरोध इस वारदात की वजह बन गया। पुलिस आरोपियों के बयान पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रही है। अब सबकी निगाहें रूबी के बयान पर टिकी हैं क्योंकि उसी के आधार पर इस मामले की असली तस्वीर सामने आएगी।
बड़े सवाल
अब इस केस में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:
क्या सच में यह लव एंगल का मामला है?
क्या रूबी भी इस पूरे केस में मिली हुई थी?
क्या रूबी सच में पारस के साथ जाना चाहती थी या उसकी सच में किडनैपिंग हुई है?
क्या रूबी अपनी मां की हत्या में शामिल थी?
इन सवालों के जवाब रूबी के बयान के बाद ही सामने आएंगे।
सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद लगातार इस केस में सक्रिय हैं। उन्होंने ट्विटर पर अपना दर्द साझा किया और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने लिखा कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं बल्कि बहुजन समाज के विरुद्ध जातिगत हिंसा और महिलाओं की असुरक्षा का भयावह उदाहरण है। उन्होंने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा देने की मांग की।
अंतिम संस्कार और आगे की कार्यवाही
पीड़ित परिवार को ₹1 लाख की सहायता राशि दी गई और इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए घरवाले मान गए। आधी रात को सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया। अब रूबी मिल गई है और उसके बयान का इंतजार है। देखना होगा कि अपने बयान से वह इस पूरे केस को कौन सा एंगल देती है।
आपकी राय?
इस पूरे खुलासे पर आपकी क्या राय है? क्या यह सच में प्रेम प्रसंग का मामला है या इसके पीछे कोई और वजह है? हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।
सम्पूर्ण घटना ने समाज में जातिगत हिंसा, महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। आगे की जांच और रूबी के बयान के बाद ही इस केस की असली वजह सामने आएगी।
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