Prem ने फाड़े Papers | Anupama के सामने खुला Rajini और Parag का राज |

“अनुपमा – विश्वास, धोखा और प्रेम का सच”
भाग 1: साजिश का पर्दाफाश
अहमदाबाद की गलियों से लेकर मुंबई के चॉल तक, एक ऐसी साजिश रची जा रही थी, जिसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था। पराग कोठारी, रजनी, गौतम और वह बिल्डर – सब मिलकर एक ऐसा खेल खेल रहे थे जिसमें अनुपमा का सब कुछ दांव पर लगा था। लेकिन अब प्रेम के हाथ लग चुका था वह सबसे बड़ा और खौफनाक सबूत, जो इस पूरी कहानी का रुख हमेशा के लिए बदलने वाला था।
प्रेम, जो अब तक राही के प्यार में डूबा एक सीधा-सादा नौजवान था, अचानक शो का मुख्य हीरो और संकटमोचक बन गया। उसकी होशियारी और सूझबूझ ने दुश्मनों के अभेद्य किले में सेंध लगा दी थी – वह किला जिसे भेदना अब तक नामुमकिन लगता था। प्रेम ने उस बिल्डर की इंक्वायरी शुरू की, जिसके साथ पराग कोठारी ने इन्वेस्ट किया था। उसे लगा था यह सिर्फ एक बिजनेस डील होगी, लेकिन जब उसने फाइलों को खंगालना शुरू किया तो एक भयानक सच सामने आया।
फाइनेंसियल ट्रेल सीधे अहमदाबाद के कोठारी एंपायर को मुंबई के चोल प्रोजेक्ट से जोड़ती थी। प्रेम ने बिल्डर के ऑफिस में वेश बदलकर घुसने का जोखिम उठाया। वहां धूल खाई फाइलों और कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे एक ऐसा राज छुपा था, जो अनुपमा की दुनिया उजाड़ सकता था। कोठारी एंटरप्राइजेज और रजनी एसोसिएट्स के बीच हुए एग्रीमेंट की कॉपी मिल गई थी।
भाग 2: नक्शों और कागजों का सच
प्रेम के हाथ लगे ब्लूप्रिंट्स, नक्शे और ईमेल एक्सचेंज, जो चीख-चीखकर साबित करते थे कि जिस प्रोजेक्ट को रजनी पूर्वी छाया चोल रनोवेशन का नाम देकर अनुपमा को बेच रही है, वह असल में सरकारी पेपर्स, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की फाइलों और आर्किटेक्ट के प्लान में पूर्वी छाया लग्जरी टावर और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के नाम से रजिस्टर था। कहीं भी चोल शब्द या रनोवेशन का जिक्र नहीं था – सिर्फ डिमोलिशन यानी ध्वस्तकरण।
इसका मतलब था कि रजनी का सारा अपनापन, वुमेन एंपावरमेंट का नारा, सखी वाला रिश्ता – सब एक कोरा झूठ था। उसका मकसद चोल को सुधारना नहीं, बल्कि वहां के लोगों को जड़ से उखाड़ फेंकना था। रजनी का मास्टर प्लान था अनुपमा के भरोसे का फायदा उठाकर उससे एनओसी और पावर ऑफ अटर्नी पर साइन करवा लेना। एक बार साइन हो गए तो जमीन बिल्डर की हो जाएगी – फिर वहां बुलडोजर चलाने से कोई नहीं रोक पाएगा।
भाग 3: प्रेम की दौड़ – अहमदाबाद से मुंबई
प्रेम को समझ आ गया कि अब वक्त नहीं है। उसने तुरंत अहमदाबाद से मुंबई फोन लगाया – राही को। राही अनुपमा की बेटी है, और शायद वही अनुपमा को इमोशनली रोक सकती है। प्रेम ने घबराहट और अर्जेंसी के साथ राही को सबकुछ बता दिया – “मां को रोको, अभी इसी वक्त रोको। रजनी आंटी झूठ बोल रही हैं। मेरे पास पक्के सबूत हैं।”
राही के लिए यह सुनना किसी सदमे से कम नहीं था। लेकिन उसकी मुश्किल यह थी कि उसके पास मुंबई में दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं था। वह जाकर अनुपमा को बताएगी भी तो क्या अनुपमा मानेगी? रजनी का प्रभाव इतना ज्यादा था कि बिना ठोस सबूत के अनुपमा शायद प्रेम की बातों को गलतफहमी मान लेती।
प्रेम समझ गया कि फोन पर यह जंग नहीं जीती जा सकती। उसे फिजिकली मुंबई पहुंचना पड़ेगा – सबूतों के साथ।
भाग 4: मुंबई में धोखे का जाल
मुंबई में रजनी ने अपनी जीत पक्की मान ली थी। उसने एक बड़ा इवेंट ऑर्गेनाइज किया – फिल्म सिटी में भूमि पूजन या उद्घाटन समारोह। मीडिया, चोल वाले, मिठाइयां, ढोल नगाड़े – सब तैयार। अनुपमा इमोशनल होकर सोच रही थी कि वह अपने लोगों का भविष्य सुरक्षित करने जा रही है। उसे अंदाजा नहीं था कि वह कलम जिस पर साइन करने जा रही है, वह असल में चोल की मृत्यु का फरमान है।
रजनी अनुपमा के बगल में मुस्कुरा रही थी – लेकिन उस मुस्कान के पीछे एक भेड़िया छुपा था। वह बस साइन होने का इंतजार कर रही थी।
भाग 5: प्रेम की एंट्री – क्लाइमेक्स का तूफान
जैसे ही अनुपमा कलम पेपर पर रखने वाली थी, ठीक उसी पल वहां तूफान की तरह प्रेम की एंट्री होती है। “रुक जाइए मां!” प्रेम की यह आवाज पूरे समारोह में सन्नाटा फैला देती है। प्रेम की हालत खराब है – कपड़े अस्त-व्यस्त, पसीना बह रहा, आंखों में सच की आग।
वह अनुपमा के हाथ से पेन छीनकर दूर फेंक देता है। भारीभरकम फाइल टेबल पर पटकता है – अहमदाबाद से अपनी जान पर खेलकर लाया है। सबकी नजरें प्रेम पर हैं। वह अनुपमा को फाइल खोलकर दिखाता है – “मां, जिसे आप रनोवेशन एग्रीमेंट समझ रही हैं, उसके पीछे वाले पन्नों को पढ़िए। इसमें इन्वेस्टर का नाम पराग कोठारी है।”
वह गौतम की तस्वीरें दिखाता है – जो अहमदाबाद में बिल्डर के साथ सीक्रेट मीटिंग्स कर रहा था। रजनी की आंखों में आंखें डालकर पूछता है – “बताइए आंटी, क्या यह नक्शा चोल का है या मॉल का? क्या यह सच नहीं है कि आपने इन लोगों को बेघर करने का प्लान बनाया है?”
भाग 6: सच्चाई का सामना
रजनी पहले इंकार करती है, घबराती है, अपनी साख बचाने की कोशिश करती है। वह प्रेम को झूठा साबित करने की कोशिश करती है, अनुपमा से कहती है – “यह लड़का पागल हो गया है, राही के प्यार में है, बिजनेस की समझ नहीं है, पेपर्स को गलत पढ़ रहा है।”
लेकिन प्रेम के पास बैंक ट्रांजैक्शंस की कॉपियां, आर्किटेक्ट के ईमेल्स, सरकारी नोटिस – सबूत इतने पक्के हैं कि अनुपमा का भरोसा डगमगा जाता है। वह कागजों को पढ़ती है, उसके हाथ कांपते हैं। जब वह देखती है कि प्रोजेक्ट का नाम कोठारी टावर्स है, तो उसके पैरों तले जमीन निकल जाती है।
अनुपमा के लिए यह पल बहुत दर्दनाक है – एक तरफ पुराना दुश्मन पराग, जिसने उसे और उसके परिवार को पहले भी दर्द दिया था, दूसरी तरफ नई दोस्त रजनी, जिस पर उसने आंख बंद करके भरोसा किया था। दोनों ने मिलकर उसके भोलेपन और भरोसे का सौदा किया।
भाग 7: रिश्तों की नई परिभाषा
अनुपमा को अपनी गलती का एहसास होता है – वह फिर से लोगों को पहचानने में चूक गई। उसे याद आता है कि कैसे बा और वनराज कहते थे, “अनुपमा, तुम बहुत भोली हो, दुनिया तुम्हें बेवकूफ बनाती है।” आज वह ताने सच होते दिख रहे हैं।
इस खुलासे के बाद शो की दिशा और किरदारों के समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं। प्रेम अब सिर्फ प्रेमी या सपोर्टिंग किरदार नहीं रहा – वह अनुपमा का रक्षक और कोठारी परिवार का बागी बन गया है। राही को अब यकीन हो जाता है कि प्रेम सिर्फ उससे प्यार नहीं करता, बल्कि उसकी मां और उसके घर के लिए किसी से भी लड़ सकता है।
अनुपमा को प्रेम में अपना बेटा दिखाई देता है – वह सहारा जो समर के जाने के बाद वह मिस करती थी।
भाग 8: पराग, गौतम और रजनी की हार
अहमदाबाद में बैठे पराग और गौतम के लिए यह करारा तमाचा है। उन्हें लगा था कि उनका प्लान फूलप्रूफ है, मुंबई की अनुपमा को बेवकूफ बनाना आसान है, प्रेम तो बच्चा है, अपनी लव लाइफ में व्यस्त है। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि प्रेम उनके ही शहर में उनकी ही नाक के नीचे से सारे राज चुरा कर मुंबई ले जाएगा और ऐन मौके पर उनका खेल खत्म कर देगा।
इस हार से बौखलाकर पराग और भी खतरनाक हो सकता है – वह अपनी पावर का इस्तेमाल कर प्रेम को वापस बुलाने की कोशिश कर सकता है या अनुपमा पर कोई लीगल केस कर सकता है। लेकिन फिलहाल के लिए प्रेम ने बाजी मार ली है।
रजनी का किरदार अब पूरी तरह से ग्रे से ब्लैक यानी नेगेटिव हो जाएगा। अब वह खुलकर सामने आएगी, अनुपमा को चुनौती देगी – “यह जमीन, यह चोल मेरी ज़िद है और मैं इसे पाकर रहूंगी। देखूंगी तुम कब तक अपने लोगों को बचा पाती हो।”
भाग 9: नई जंग – मां बनाम बिजनेस वूमन
अब अनुपमा और रजनी के बीच सीधी और आरपार की जंग शुरू होगी। एक तरफ पैसे, पावर और सिस्टम वाली बिजनेस वूमन – दूसरी तरफ अपने परिवार, उसूलों और घर को बचाने वाली मां। शो अपने नए पड़ाव पर है, एक नई युग में प्रवेश कर रहा है। अब नेक्स्ट जनरेशन यानी प्रेम और राही ने कमान संभाल ली है।
प्रेम का यह इन्वेस्टिगेशन वाला रूप, डिटेक्टिव और हीरो वाला अवतार दर्शकों को बहुत पसंद आएगा। ऑडियंस चाहती थी कि कोई तो हो जो अनुपमा के लिए खड़ा हो, उसे गिरने से पहले थाम ले। इस बार धोखा होने से पहले ही पर्दाफाश होना ऑडियंस के लिए राहत और उत्साह की बात है।
भाग 10: वरुण का रोल और आगे की कहानी
वरुण का क्या रोल होगा? क्या उसे अपनी मां की साजिश के बारे में पता था या वह भी अनुपमा की तरह धोखे में था? अगर वरुण को पता था तो अनुपमा का दिल फिर टूटेगा, अगर वरुण अनजान था तो वह अपनी मां के खिलाफ कैसे खड़ा होगा? क्या वह राही का साथ देगा या अपनी मां का? यह देखना दिलचस्प होगा।
अंतिम संदेश
अब कहानी में रोमांच चरम पर है। प्रेम की दौड़, उसका डिटेक्टिव बनना, अनुपमा का उस कड़वे सच से सामना – सबकुछ देखने लायक होगा। क्या अनुपमा इस धोखे को बर्दाश्त कर पाएगी? क्या वह अपने टूटे हुए भरोसे को समेटकर रजनी को जवाब दे पाएगी? या फिर हमें अनुपमा का वह रूद्र रूप देखने को मिलेगा जो अच्छे-अच्छों की बोलती बंद कर देगा?
क्या प्रेम वक्त पर पहुंच पाएगा या राइटर्स कोई और खेल खेलेंगे? क्या आप प्रेम के इस नए अवतार को देखने के लिए एक्साइटेड हैं? क्या आपको लगता है कि इस घटना के बाद अनुपमा और अनुज के मिलने के रास्ते भी खुल सकते हैं?
समाप्त
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