Raipur | मासूम सी दिखने वाली इस औरत के कारनामे देख खुद पुलिस भी हैरान हो गई ||

विश्वासघात की पराकाष्ठा: एक महत्वाकांक्षी पत्नी और खूनी /प्रेम/ जाल

अपराध की दुनिया का एक शाश्वत नियम है—अपराधी चाहे कितना भी चतुर क्यों न हो, वह अपने पीछे कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ जाता है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में घटी यह घटना इसी सच्चाई की तस्दीक करती है, जहाँ एक पत्नी की महत्वाकांक्षा और /अ/वै/ध/ प्रेम ने एक निर्दोष पति की जान ले ली।

हसेरा गाँव का सीधा-साधा परिवार

रायपुर के खरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक छोटा सा गाँव है—खसेरा। इसी गाँव में 27 वर्षीय किशोर सारथी रहता था। किशोर एक मेहनती इंसान था, जो मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता था। उसकी पत्नी का नाम रोशनी था, जिसकी उम्र 25 साल थी। रोशनी न केवल सुंदर थी, बल्कि वह शिक्षित भी थी।

किशोर स्वयं ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था, लेकिन अपनी पत्नी रोशनी के प्रति उसका प्रेम अगाध था। वह चाहता था कि रोशनी पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी प्राप्त करे। किशोर का मानना था कि यदि रोशनी की सरकारी नौकरी लग गई, तो उनके भविष्य की पीढ़ियों का जीवन संवर जाएगा। इसी नेक इरादे के साथ, वह दिन-भर पसीना बहाता और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा रोशनी की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर खर्च करता था।

27 फरवरी की वह काली रात

घटना की शुरुआत 27 फरवरी 2026 की रात लगभग 9:00 बजे होती है। रोशनी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत किशोर से कहा, “आप मेरे मायके चले जाइए और मेरी बहन को यहाँ ले आइए। वह यहाँ रहेगी तो मुझे घर के कामों में मदद मिल जाएगी और मैं अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे सकूँगी।”

अपनी पत्नी की खुशी के लिए किशोर तुरंत तैयार हो गया। वह अपनी बाइक उठाकर ससुराल (बिठिया गाँव) के लिए निकल पड़ा। लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी जब किशोर वापस नहीं लौटा, तो रोशनी ने रात 11:00 बजे उसके फोन पर कॉल किया। किशोर का फोन स्विच ऑफ था। रोशनी ने अपने मायके फोन किया, तो पता चला कि किशोर वहां पहुँचा ही नहीं था। पूरी रात तलाश जारी रही, लेकिन किशोर का कहीं पता नहीं चला।

एक्सीडेंट या सोची-समझी /ह/त्या/?

अगली सुबह, 28 फरवरी 2026 को माठ गाँव के पास ‘सगोन वाटिका’ के किनारे राहगीरों को एक शव दिखाई दिया। पहचान होने पर पता चला कि यह किशोर सारथी का शव था। थोड़ी दूरी पर उसकी क्षतिग्रस्त बाइक पड़ी थी। पहली नज़र में यह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना लग रही थी।

रोशनी और किशोर का बड़ा भाई, भागवत सारथी, घटनास्थल पर पहुँचे। रोशनी अपने पति के शव को देखकर फूट-फूटकर रोने लगी। लेकिन भागवत को कुछ अटपटा लगा। किशोर की बाइक टूटी हुई थी, लेकिन उसका मोबाइल गायब था। भागवत ने पुलिस से कहा, “साहब, मेरे भाई की मौत दुर्घटना नहीं है। यदि एक्सीडेंट होता, तो उसका मोबाइल वहीं मिलता। उसका फोन स्विच ऑफ क्यों है?”

भागवत की तहरीर पर खरोरा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ /ह/त्या/ का मामला दर्ज किया और जाँच शुरू की।

सीडीआर (CDR) ने खोला राज

पुलिस ने सबसे पहले किशोर के फोन की कॉल डिटेल्स खंगाली, लेकिन वहां कुछ संदिग्ध नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने रोशनी के मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) निकाली। यहीं से कहानी ने एक नया मोड़ लिया।

जाँच में पता चला कि रोशनी पिछले एक साल से ‘लीलेश उर्फ मोरू’ नाम के एक युवक के साथ लगातार संपर्क में थी। लीलेश रोशनी के मायके का ही रहने वाला था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जिस रात किशोर घर से निकला था, उसके तुरंत बाद रोशनी और लीलेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर रोशनी को हिरासत में लिया।

/अ/वै/ध/ संबंधों की /वि/कृ/त/ कहानी

शुरुआत में रोशनी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और खुद को बेगुनाह बताया। लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और सीडीआर के सबूत सामने रखे, तो वह टूट गई। रोशनी ने जो सच उगला, उसने पुलिसकर्मियों को भी स्तब्ध कर दिया।

रोशनी ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद ही उसे महसूस होने लगा था कि उसका पति किशोर केवल एक मजदूर है और वह उसके बड़े सपनों को पूरा नहीं कर पाएगा। करीब एक साल पहले जब वह अपने मायके गई थी, तो उसकी मुलाकात लीलेश से हुई। जल्द ही उनके बीच /अ/वै/ध/ संबंध (Extra-marital affair) विकसित हो गए।

किशोर को जब इस बात का शक हुआ, तो घर में झगड़े शुरू हो गए। किशोर उसे समझाने की कोशिश करता था, लेकिन रोशनी और लीलेश एक साथ रहने का फैसला कर चुके थे। उन्होंने किशोर को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इस साजिश में लीलेश ने अपने दो दोस्तों, अजय राज और देवेंद्र कुमार को भी शामिल किया।

साजिश और /ह/त्या/ का अंजाम

रोशनी ने ही तय किया था कि 27 फरवरी की रात वह किशोर को मायके भेजेगी। जैसे ही किशोर घर से निकला, रोशनी ने लीलेश को सिग्नल दे दिया। लीलेश और उसके दोस्तों ने एक ‘थार’ गाड़ी किराए पर ली और किशोर का पीछा करना शुरू किया।

माठ गाँव के पास सुनसान जगह पाकर लीलेश ने थार गाड़ी से किशोर की बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। किशोर सड़क किनारे गिरकर तड़पने लगा। अपराधी वहां से भागे नहीं, बल्कि किशोर की मौत होने तक वहीं खड़े रहे। उसकी मृत्यु सुनिश्चित करने के बाद, उन्होंने उसकी देह को घसीटकर सड़क किनारे फेंक दिया और उसका मोबाइल छीन लिया ताकि किसी को शक न हो।

न्याय की प्रक्रिया

पुलिस ने रोशनी के बयान के आधार पर लीलेश, अजय राज और देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से किशोर का मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी भी बरामद कर ली गई। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता चार्जशीट तैयार की और उन्हें जेल भेज दिया गया।

निष्कर्ष: यह घटना हमें सिखाती है कि /अ/नै/ति/क/ इच्छाएं और /अ/वै/ध/ संबंध न केवल परिवारों को तबाह करते हैं, बल्कि इंसान को अपराधी बना देते हैं। किशोर ने अपनी पत्नी के लिए जो त्याग किया था, उसके बदले में उसे केवल मौत मिली। समाज में बढ़ते इस तरह के अपराधों के प्रति हमें सजग रहने की आवश्यकता है।