Sucherita Kukreti | Mamata Banerjee ED Raid: Bengal में Elections से पहले ही खेला हो गया? Mic On Hai

बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी बनाम बीजेपी – वोट चोरी, ईडी छापेमारी और सियासी आरोपों की बहस
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल चरम पर है। ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। हालिया घटनाक्रम में ईडी की छापेमारी, फाइल चोरी का आरोप, वोट चोरी की बहस और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के मुद्दे पर तीखी बहस हो रही है। आइए जानते हैं किसने क्या कहा और क्या है सियासत का असली सच:
ममता बनर्जी का आरोप: “बीजेपी वोट चोरी से जीतती है”
ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी लड़ाई ईडी से नहीं, सीधे बीजेपी से है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र में जबरन सत्ता हासिल की और अब वही कोशिश बंगाल में कर रही है। उनके अनुसार, “बीजेपी वोट चोरी से जीतती है और बंगाल में भी यही करने की कोशिश है।”
बीजेपी का पलटवार: “टीएमसी = टू मच करप्शन”
बीजेपी प्रवक्ता ने टीएमसी को “टू मच करप्शन” पार्टी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद का दुरुपयोग किया, फाइलें जबरन छीन लीं और पुलिस का गलत इस्तेमाल किया। साथ ही सवाल उठाया कि अगर आईपैक के ऑफिस में टीएमसी की फाइल थी, तो राज्य सरकार की फाइल वहां क्यों थी? उन्होंने कहा, “संविधान के तहत कोई भी मुख्यमंत्री ongoing investigation में दखल नहीं दे सकता।”
टीएमसी का बचाव: “केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग”
टीएमसी प्रवक्ता ने कहा कि 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया है। विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया, जैसे हेमंत सोरेन, केजरीवाल। एजेंसियां चुनाव से पहले ही एक्टिव होती हैं और चुनाव के बाद शांत हो जाती हैं। उन्होंने पूछा, “अगर ईडी को कार्रवाई करनी थी तो 2022-23 में क्यों नहीं की, चुनाव के समय ही क्यों?”
बहस में अन्य पक्ष
कुछ वक्ताओं ने कहा, “ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है, लेकिन उनके कई मंत्रियों पर शिकंजा कसा है।”
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “अगर किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप है तो उसे कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, कोर्ट में जाकर खुद को निर्दोष साबित करना चाहिए, न कि जांच एजेंसी की फाइलें छीनकर ले जाना चाहिए।”
विपक्ष ने बार-बार यह मुद्दा उठाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल बीजेपी अपने राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए करती है।
संविधान और लोकतंत्र की बात
बहस में बार-बार संविधान का हवाला दिया गया। सवाल उठाया गया कि क्या एक मुख्यमंत्री ongoing investigation में दखल दे सकता है? क्या संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना उचित है? क्या चुनावी समय ही जांच एजेंसियां एक्टिव होती हैं?
निष्कर्ष
बंगाल चुनाव में ईडी की छापेमारी, वोट चोरी के आरोप, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर सियासी बहस चरम पर है।
ममता बनर्जी बीजेपी को वोट चोरी का जिम्मेदार ठहरा रही हैं, जबकि बीजेपी टीएमसी को भ्रष्टाचार का पर्याय बता रही है।
सवाल यह है कि सच्चाई क्या है – एजेंसियों की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है या भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का पालन?
जनता की अदालत में फैसला होगा, लेकिन फिलहाल बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और बहस का माहौल गर्म है।
आगे क्या होगा, चुनावी नतीजे और कोर्ट के फैसले बताएंगे।
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