UP News: Raebareli में मिट्टी का बर्तन बनाने वाले गरीब को एक करोड़ पचीस हजार की नोटिस से हड़कंप

“रहने को छत नहीं और नोटिस करोड़ों का”: रायबरेली के गरीब कुम्हार को GST विभाग ने भेजा 1.25 करोड़ का नोटिस

रायबरेली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ तालाब से मिट्टी खोदकर बर्तन बनाने वाले एक गरीब कुम्हार, मोहम्मद सईद को जीएसटी (GST) विभाग ने 1 करोड़ 25 लाख 25 हजार 297 रुपये का नोटिस भेजा है। यह नोटिस मिलने के बाद से अनपढ़ सईद और उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज होने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई के डर से कांप रहा है।

तालाब से मिट्टी चोरी कर पाल रहे परिवार

मोहम्मद सईद हरचंदपुर के रहने वाले हैं और किराए के एक कच्चे मकान में रहते हैं। उनके पास अपनी एक बिस्वा जमीन भी नहीं है। वे सुबह-सुबह दूसरों के तालाबों से चोरी-छिपे मिट्टी खोदकर लाते हैं और फिर उसके बर्तन बनाकर बाजार में बेचते हैं। उनके परिवार में बूढ़ी माँ, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे हैं। सईद बताते हैं कि वे अंगूठा छाप हैं और उन्हें ठीक से पढ़ना भी नहीं आता।

क्या है पूरा मामला?

सईद के पास जो नोटिस आया है, वह ‘केंद्रीय माल एवं सेवा कर (GST) विभाग, हाजीपुर (बिहार)’ के कार्यालय से भेजा गया है। नोटिस के अनुसार, सईद के नाम पर ‘भारत एंटरप्राइजेज’ नाम की कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसके जरिए करोड़ों का टर्नओवर दिखाया गया है और उस पर जीएसटी की चोरी का आरोप है।

सईद का कहना है कि वे कभी लखनऊ से आगे नहीं गए, तो बिहार के पटना या हाजीपुर में उनकी कंपनी कैसे चल सकती है?

धोखाधड़ी का शिकार हुए सईद?

सईद ने बताया कि कुछ समय पहले उनका आधार कार्ड खो गया था। साथ ही, कुछ लोगों ने उन्हें ‘लोन दिलाने’ और ‘घोड़ा-तांगा दिलाने’ का झांसा देकर उनके कागजात लिए थे और फॉर्म भरवाए थे। आशंका जताई जा रही है कि किसी जालसाज ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी फर्म बना ली और करोड़ों का ट्रांजेक्शन कर लिया।

विभाग की लापरवाही या बड़ी साजिश?

सईद के घर की हालत देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि वह व्यक्ति करोड़ों का व्यापार नहीं कर सकता। उनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है, छप्पर पर पॉलिथीन डालकर वे गुजारा कर रहे हैं। ऐसे में जीएसटी विभाग द्वारा बिना किसी जमीनी जांच के इतना बड़ा नोटिस भेजना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सईद का दर्द:

“साहब, हम मिट्टी के बर्तन बनाकर बच्चों को पालते हैं। हमारे पास न जमीन है, न पैसा। अगर सरकार ने जांच नहीं की और पुलिस हमें ले गई, तो मेरे बच्चों का क्या होगा? यह नोटिस देखकर मेरी रातों की नींद उड़ गई है।”

अब आगे क्या?

फिलहाल पीड़ित सईद ने स्थानीय थाने में इसकी सूचना दी है और गुहार लगाई है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए। यह मामला उन तमाम गरीब लोगों के लिए एक चेतावनी है जिनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जालसाज फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या रायबरेली प्रशासन और जीएसटी विभाग अपनी गलती सुधारते हैं या सईद को इस फर्जीवाड़े की सजा भुगतनी पड़ती है।

ब्यूरो रिपोर्ट: पंकज सिंह, एबीपी न्यूज़

दिनांक: 24 फरवरी, 2026