महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/तालाब में नहा रही थी/सभी लोग दंग रह गए/

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बेटी की एक गलती की वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा: वाराणसी की सच्ची घटना

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रामनगर गांव की यह कहानी है, जहां मानसी देवी नामक एक विधवा महिला अपनी बेटी गौरी के साथ रहती थी। पति की लंबी बीमारी के बाद तीन साल पहले मौत हो गई थी और घर की सारी जिम्मेदारी अब मानसी देवी के कंधों पर थी। आधा एकड़ जमीन में वह अपने पशुओं के लिए चारा उगाती थी, दो गायें थीं जिनके दूध से घर का खर्च चलता था। बेटी गौरी 11वीं कक्षा की तेज और संस्कारी छात्रा थी।

संघर्ष और अकेलापन

पति के गुजरने के बाद मानसी देवी ने अपने जीवन को संभाल लिया था। वह मेहनती थी, लेकिन आर्थिक तंगी हमेशा बनी रहती थी। गौरी पढ़ाई में अव्वल थी, उसकी टीचर भी उसकी तारीफ किया करती थीं। लेकिन कोई नहीं जानता था कि भविष्य में मां-बेटी के बीच एक बड़ा हादसा होने वाला है।

वाशिंग मशीन की समस्या और मिस्त्री सोहन लाल

एक दिन मानसी देवी की वाशिंग मशीन खराब हो गई। पड़ोसन मेघा से मिस्त्री सोहन लाल का नंबर मिला। सोहन लाल घर आया, मशीन ठीक की लेकिन पैसे मांगने लगा। मानसी देवी के पास पैसे नहीं थे, उसने कहा कि 15 दिन में लौटा देगी। सोहन लाल ने मना किया, तो मानसी देवी ने इशारों में उसे शारीरिक संबंध का प्रस्ताव दिया। सोहन लाल मान गया, मशीन ठीक की और दोनों ने कमरे में संबंध बनाए। मानसी ने कहा, “हर बार तुम्हें पैसे देने होंगे।” सोहन लाल तैयार हो गया।

पैसों के लिए गलत रास्ता

मानसी देवी अब अक्सर सोहन लाल को खेत में बुलाती, पैसे लेती और संबंध बनाती। बेटी गौरी की स्कूल फीस के लिए भी पैसे चाहिए थे। मानसी ने दुकानदार हरपाल सिंह से मांगे, लेकिन उसने भी शर्त रखी – पैसे के बदले संबंध। मानसी ने शर्त मान ली। अब वह कभी सोहन लाल, कभी हरपाल से पैसे लेकर गलत रास्ते पर चल पड़ी थी।

बेटी गौरी का संदेह

गौरी को अपनी मां के व्यवहार पर शक होने लगा। एक दिन पड़ोसन नीलम ने गौरी को बताया कि उसकी मां का चरित्र ठीक नहीं है, वह कई मर्दों के साथ संबंध बनाती है। गौरी को गहरा सदमा लगा। उसने मां से पूछा, मां ने गुस्से में उसे थप्पड़ मार दिया और कहा, “मैं जो करती हूं, तुम्हारे लिए करती हूं।” गौरी चुप हो गई, लेकिन भीतर ही भीतर टूट गई।

समाज का दबाव

गौरी जब स्कूल जाती, सहेलियां उसे चिढ़ातीं – “तुम्हारी मां गलत काम करती है।” गौरी को यह बात बर्दाश्त नहीं हुई। उसके मन में गुस्सा और नफरत भर गई। तीन दिन तक वह चुप रही, लेकिन भीतर ही भीतर उसकी भावनाएं उबल रही थीं।

हादसा: बेटी की एक गलती

15 दिसंबर 2025 की रात, मां-बेटी ने साथ खाना खाया। रात को गौरी को नींद नहीं आई। गुस्से में, दुख में, समाज और सहेलियों की बातों से परेशान होकर उसने रात 11:30 बजे रसोई से धारदार चाकू उठाया और अपनी मां के कमरे में जाकर उस पर वार कर दिया। मानसी देवी चीखती-चिल्लाती बाहर भागी, पड़ोसी इकट्ठा हुए। लेकिन तब तक गौरी ने अपनी मां को मौत के घाट उतार दिया था।

पुलिस और सच का खुलासा

पड़ोसी सौरभ सिंह ने पुलिस को खबर दी। पुलिस आई, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गौरी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में गौरी ने अपनी मां की सारी करतूतों का पर्दाफाश किया – “गांव की लड़कियां मुझे चिढ़ाती थीं, मुझे गुस्सा आता था, इसलिए मैंने मां को मार दिया।”

समाज के लिए सबक

यह कहानी बताती है कि एक महिला के गलत फैसलों, समाज के दबाव और बेटी की भावनाओं के टकराव ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया। मां ने मजबूरी में गलत रास्ता चुना, बेटी ने गुस्से में बड़ी गलती कर दी। समाज की बातें बच्चों के मन पर गहरा असर डालती हैं।

सावधान रहें, बच्चों की भावनाओं को समझें, और कभी भी गलत रास्ता न चुनें।