पालतू बिल्ली की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

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पालतू बिल्ली की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा

 आज मैं आपको एक ऐसी घटना सुनाने जा रहा हूं, जो एक पालतू जानवर की वजह से पूरे परिवार की जिंदगी बदल कर रख देती है। यह घटना उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक छोटे से गांव, अमानपुर की है, जहां एक साधारण किसान परिवार की जिंदगी अचानक से उलट-पुलट हो गई।

राजकुमार और उसकी बेटी रेनू

गांव में रहने वाला राजकुमार एक मेहनती किसान था, जिसकी खेती-बाड़ी से वह अच्छे पैसे कमाता था। उसकी 15-16 एकड़ ज़मीन थी, और वह अपनी आटा चक्की की दुकान भी चलाता था। उसका परिवार अच्छा-खासा खुशहाल था। उसकी पत्नी सुधा देवी और इकलौती बेटी रेनू के साथ उसका घर हमेशा हंसी-खुशी से भरा रहता था।

रेनू नजदीकी कॉलेज में बीए फाइनल ईयर की छात्रा थी। वह हर रोज़ सुबह के आठ बजे कॉलेज के लिए निकल जाती और फिर दोपहर के तीन-चार बजे के आसपास वापस घर लौट आती थी। रेनू को जानवरों से बहुत लगाव था, खासकर बिल्लियों और कुत्तों से। इस आदत से राजकुमार को काफी परेशानी होती थी, और वह अपनी बेटी को हमेशा चेतावनी दिया करता था कि जानवरों से इतना लगाव मत रखो, क्योंकि कभी न कभी ये धोखा दे सकते हैं। लेकिन रेनू हमेशा अपनी पिता की बातों को नजरअंदाज कर देती थी और अपने जानवरों के प्रति स्नेह को बरकरार रखती थी।

कुत्ते के बच्चे का हादसा

एक दिन रेनू जैसे ही अपनी स्कूटी से कॉलेज जा रही थी, रास्ते में अचानक एक कुत्ते का बच्चा स्कूटी के सामने आ गया। रेनू ने ब्रेक लगाया, लेकिन स्कूटी उस कुत्ते के बच्चे के ऊपर चढ़ गई। रेनू को इस घटना से बहुत गहरा दुख हुआ, क्योंकि उसने जानवर की जान ली थी। वह उस कुत्ते के बच्चे को उठाकर घर ले आई और उसकी पूरी देखभाल की। दवाइयों का इंतजाम किया और कई दिन उसकी देखभाल की, लेकिन कुछ ही दिन में कुत्ते का बच्चा मर गया। यह घटना रेनू के लिए बहुत बड़ी मानसिक परेशानी बन गई। उसे लगा कि उसने उस कुत्ते की जान ले ली है, और वह लगातार उदास रहने लगी।

राजकुमार का समझाना और सुधा देवी की चिंता

राजकुमार ने अपनी बेटी की उदासी देखी और उसे समझाया। वह उसे फिर से बताता है, “बेटी, जानवरों से इतना लगाव मत रखो। देखो, कुत्ते का बच्चा मर गया, और तुम्हें कितनी तकलीफ हो रही है। यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है। तुम्हारे पास और भी बहुत से अच्छे दोस्त हो सकते हैं।” लेकिन रेनू ने इस बार अपने पिता की बातों को समझा और उसने खुद को इस मानसिक दबाव से बाहर निकालने की कोशिश की।

पालतू बिल्ली का इलाज और उसकी देखभाल

कुछ दिनों बाद, एक सुबह रेनू अपने बगीचे में पौधों को पानी दे रही थी। उसी दौरान उसकी नजर एक घायल बिल्ली पर पड़ी। यह बिल्ली बगीचे में पड़ी हुई थी और घायल अवस्था में थी। रेनू ने तुरंत उस बिल्ली को उठाया और घर के अंदर ले आई। उसने उसका इलाज शुरू किया और डॉक्टर से दवाई भी दिलवाई। कुछ ही दिनों में वह बिल्ली स्वस्थ हो गई और रेनू ने उसे अपना पालतू बना लिया। रेनू ने उस बिल्ली को दूध पिलाया और उसे अपने घर में अच्छे से रखा।

राजकुमार ने भी धीरे-धीरे उस बिल्ली से लगाव करना शुरू कर दिया। वह भी बिल्ली के साथ खेलने लगा और उसे देखकर अब उसे कोई परेशानी नहीं होती थी।

रेनू की मुलाकात पवन से

एक दिन रेनू की कॉलेज में एक लड़के से मुलाकात हुई, जिसका नाम पवन था। दोनों के बीच धीरे-धीरे दोस्ती हो गई, और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। पवन और रेनू एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। पवन अक्सर रेनू के घर आने लगा, और राजकुमार ने पवन को बहुत पसंद किया, क्योंकि वह एक ईमानदार और मेहनती लड़का था। वह पढ़ाई में भी अच्छा था।

राजकुमार ने अपनी बेटी रेनू से कहा, “बेटी, यह लड़का बहुत अच्छा है। तुम इसे पसंद करती हो, तो मैं इसके माता-पिता से मिलना चाहता हूं।” रेनू ने पवन के माता-पिता के बारे में पूरी जानकारी दी, और राजकुमार ने पवन के घर जाकर उसके माता-पिता से मुलाकात की। मुलाकात के बाद, दोनों परिवारों ने रेनू और पवन का रिश्ता पक्का कर लिया, और यह तय हुआ कि दोनों की शादी 20 दिनों के अंदर हो जाएगी।

रेनू और पवन की शादी

24 अगस्त 2025 को रेनू और पवन की शादी बड़े धूमधाम से हुई। रेनू अपनी पालतू बिल्ली को भी अपने दहेज के रूप में पवन के घर ले आई। जब बिल्ली पवन के घर पहुंची, तो पवन के पिता, ईशम सिंह को यह थोड़ी अजीब लगी क्योंकि वह जानवरों से दूर रहते थे और उन्हें जानवरों से नफरत थी। लेकिन पवन ने अपने पिता को यह समझाया कि रेनू को यह बिल्ली बहुत पसंद है, और आखिरकार ईशम सिंह मान गए।

पालतू बिल्ली का खतरनाक हादसा

कुछ दिन बाद, एक दिन रेनू की पालतू बिल्ली घर से बाहर निकल गई। बाहर एक कुत्ता बैठा हुआ था और उसने उस बिल्ली को काट लिया। बिल्ली खून से लथपथ घर लौटी। रेनू ने जल्दी से उसका इलाज किया, लेकिन वह जानती थी कि इस बार कुछ बड़ा हो सकता है।

रेबीज और परिवार की मौत

कुछ दिन बाद, रेनू के ससुर, ईशम सिंह को उस बिल्ली ने काट लिया। पहले तो उसे लगा कि यह मामूली खरोंच है, लेकिन कुछ दिन बाद उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी और उसकी धड़कनें तेज हो गईं। रेनू और पवन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उसे रेबीज हो चुका है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि यह रेबीज पालतू बिल्ली द्वारा काटे जाने के कारण हुआ था।

ईशम सिंह की मौत के बाद पवन भी रेबीज के लक्षण दिखाने लगा। उसकी हालत भी बिगड़ने लगी और फिर एक दिन पवन भी दम तोड़ गया। रेनू का पूरा परिवार टूट चुका था। उसकी जिंदगी में दुखों का कोई अंत नहीं था।

किसी पालतू जानवर के कारण सब कुछ खत्म हो गया

इस घटना ने रेनू को गहरे सदमे में डाल दिया। वह सोचने लगी कि अगर उसने कभी जानवरों से इतना लगाव न रखा होता तो आज उसका परिवार साथ होता। यह घटना एक कड़ी सीख देती है कि कभी-कभी हमारी छोटी सी गलती पूरे परिवार की जिंदगी बदल सकती है।