सुबह-सुबह शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट पर एक चाय वाला खड़ा था।
उसके कपड़े फटे-पुराने थे, हाथ में चाय के गिलास थे और आँखों में ऐसी मासूमियत थी जिसे देखकर हर कोई यही सोचता कि यह आदमी बहुत गरीब है। लेकिन असलियत किसी ने सोची भी नहीं थी।
वह आदमी, जो असल में कंपनी का मालिक था, धीरे-धीरे ऑफिस के अंदर बढ़ता है।
रिसेप्शन पर बैठे गार्ड ने उसे देखा और झुंझलाकर बोला,
“ऐ चाय वाले, यहाँ क्या कर रहा है? यह कोई ठेला लगाने की जगह है क्या? चल हट यहाँ से।”
वह आदमी मुस्कुरा कर बोला,
“भाई साहब, मैंने सोचा कर्मचारियों को चाय पिला दूं। सुबह-सुबह सबको अच्छी लगेगी।”
गार्ड ने हँसते हुए उसे अंदर जाने दिया। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस आदमी को वह चाय वाला समझ रहा है, वही इस कंपनी का असली मालिक है जिसने अभी कुछ ही दिन पहले यह कंपनी खरीदी है।
जैसे ही वह आदमी अंदर पहुँचा, कुछ कर्मचारी हँसने लगे।
एक कर्मचारी बोला,
“देखो-देखो यह कौन है? लगता है भटक कर अंदर आ गया। अरे भाई, यहाँ इंटरव्यू देने आया है क्या या फ्री की चाय पिलाने?”
तभी एक लड़की रिया, जो इस कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर थी, सामने आई।
स्टाइलिश कपड़े, हाथ में महँगा फोन और चेहरे पर अहम।
उसका स्वभाव थोड़ा रूखा और अहंकारी था। उसने उस चाय वाले को ऊपर से नीचे तक घूरा और तुरंत ताना मारा,
“क्या हाल बना रखा है तुमने? फटे पुराने कपड़े पहनकर यहाँ आ गए। यह कोई चाय खाना है क्या? बाहर निकलो।”
वह आदमी हल्की सी मुस्कान लिए बोला,
“मैडम, मैंने सोचा आप सबके लिए चाय ले आऊं।”
लेकिन रिया को उसके मासूम जवाब से और ज्यादा गुस्सा आया।
रिया उसकी ट्रे से एक चाय का कप उठाती है, एक घूंट लेती है और तुरंत चेहरा बिगाड़ लेती है,
“उफ, क्या बेकार चाय है यह!”
फिर गुस्से में कप उठाती है और सीधे उसके मुँह पर फेंक देती है।
गर्म चाय उसके चेहरे पर छलक जाती है।
वह थोड़ा पीछे हटता है लेकिन कुछ नहीं कहता।
रिया कहती है,
“यह ले, पहले खुद का हाल देख, फिर दूसरों को चाय पिलाना।”
ऑफिस का माहौल ठहाकों से भर गया।
सब हँस रहे थे।
एक कर्मचारी ने कहा,
“आज तो मजा आ गया। चाय वाले की औकात दिखा दी मैडम ने।”
किसी ने ताली बजाई।
किसी ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

लेकिन तभी एक युवक अर्जुन, जो उस कंपनी में काम करता था और दिल से साफ इंसान था, आगे बढ़ा।
अर्जुन ने गुस्से में कहा,
“बस करो आप सब लोग। यह क्या मजाक बना रखा है तुम लोगों ने? इंसान गरीब है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी इज्जत से खिलवाड़ करो।”
लेकिन रिया ने अर्जुन की बात काट दी।
रिया हँसते हुए बोली,
“ओह, तो अब तुम इसके वकील बन गए हो अर्जुन? तुम्हें शायद पता नहीं, ये गरीब लोग बस एक्टिंग करते हैं। इन्हें हमारे पैसे चाहिए।”
इतना कहकर रिया ने उस चाय वाले को थप्पड़ भी मार दिया।
पूरा ऑफिस हँसी से गूंज उठा।
वह आदमी जिसे कोई पहचान नहीं पाया, बस चुपचाप “सॉरी मैडम, मेरी गलती है। मैं चला जाता हूँ।” कहता है।
उसने अपनी ट्रे उठाई और धीरे-धीरे ऑफिस से बाहर निकल गया।
किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस आदमी को सबने चाय वाला समझकर अपमानित किया, वही असल में इस पूरी कंपनी का मालिक है।
उसने हाल ही में यह कंपनी खरीदी थी और आज वो यहाँ आया था, अपने कर्मचारियों की असली तस्वीर देखने।
**अगले दिन जैसे ही कर्मचारी ऑफिस पहुँचे, सब अपने-अपने काम में लग गए।**
रिया कॉन्फिडेंट अंदाज में ऑफिस आई।
हाथ में महँगा बैग, आँखों में घमंड और चेहरे पर वही मुस्कान जैसे उसे अपने किए पर कोई पछतावा ही ना हो।
रिया सहेली से हँसते हुए बोली,
“कल तो मजा आ गया था। उस चाय वाले की औकात बता दी। ऐसे लोगों को लाइन में रखना ही सही है।”
उसकी सहेली भी हँसते हुए बोली,
“हाँ, तूने तो कमाल कर दिया। सबको हँसाकर लोटपोट कर दिया।”
वहीं दूसरी ओर अर्जुन चुपचाप बैठा था।
उसका चेहरा गंभीर था।
उसे अंदर से बहुत बुरा लग रहा था।
अर्जुन मन में सोच रहा था,
“पता नहीं वह बेचारा कहाँ होगा। कितनी बेइज्जती की सबने उसकी। उम्मीद करता हूँ उसने यह सब दिल पर ना लिया हो।”
कुछ देर बाद एक बड़ी घोषणा होती है।
एचआर डिपार्टमेंट का मैसेज आता है।
सभी कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि आज सुबह 11:00 बजे कंपनी के नए मालिक स्वयं ऑफिस आ रहे हैं।
सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है।
ऑफिस में हलचल मच गई।
एक कर्मचारी बोला,
“अरे वाह, नया मालिक आने वाला है!”
दूसरा बोला,
“सुना है कोई बहुत बड़ा बिजनेसमैन है जिसने यह कंपनी खरीदी है। चलो देखते हैं कौन है। शायद हमारी तरक्की की भी बात करें।”
रिया भी बहुत उत्साहित हो गई।
उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“वाह, नया मालिक आएगा। मुझे तो उससे मिलकर ही मजा आ जाएगा। अगर वह इंप्रेस हो गया तो हो सकता है प्रमोशन भी मिल जाए।”
ठीक 11:00 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल का दरवाजा खुलता है।
अंदर कदम रखता है वही आदमी, वही चाय वाला।
लेकिन इस बार उसके चेहरे पर अलग ही रौब था।
अब उसने महँगा सूट पहन रखा था।
बाल सलीके से संवरे थे।
उसकी चाल में आत्मविश्वास था।
उसके साथ दो-तीन लोग थे जो उसके असिस्टेंट लग रहे थे।
पूरा ऑफिस स्तब्ध रह गया।
सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
एक कर्मचारी हैरान होकर बोला,
“यह तो वही चाय वाला है ना?”
दूसरा कर्मचारी बोला,
“हाँ वही, लेकिन यह यहाँ सूट पहनकर मालिक के साथ क्यों आया?”
तभी एचआर ने घोषणा की,
“सभी लोग ध्यान दें। मिलिए हमारे नए मालिक मिस्टर आर्यन वर्मा से!”
पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
लेकिन कुछ कर्मचारियों के चेहरे पीले पड़ गए, खासकर रिया का।
आर्यन वर्मा यानी वही चाय वाला मंच पर खड़े हुए।
उन्होंने गहरी साँस ली और बोले,
“दोस्तों, मैं आपका नया मालिक हूँ। मैंने हाल ही में इस कंपनी को खरीदा है और कल मैं आप सबके बीच एक साधारण चाय वाले के रूप में आया था।”
यह सुनते ही सबका दिल धड़कने लगा।
कमरा सन्नाटे से भर गया।
आर्यन आगे बोले,
“हाँ, कल मैं फटे पुराने कपड़े पहनकर आया था। मैंने चाय की ट्रे उठाई थी और मैं यह देखना चाहता था कि मेरे कर्मचारी इंसानियत को कैसे देखते हैं।”
सबके सिर झुक गए।
कल जो लोग हँस रहे थे, अब उनके चेहरे शर्म से लाल हो गए थे।
अर्जुन की आँखों में संतोष था क्योंकि उसने ही अकेला उस चाय वाले का साथ दिया था।
लेकिन रिया तो कुर्सी पर पसीना-पसीना हो गई थी।
वो मन ही मन सोच रही थी,
“हे भगवान, यह तो वही था। मैंने इसके साथ क्या कर दिया? चाय फेंकी, थप्पड़ मारा और यह सबका मालिक है!”
आर्यन ने अपनी आवाज और मजबूत करते हुए कहा,
“कल मैंने देखा इंसानियत का चेहरा कैसा होता है। कुछ लोग दूसरों की इज्जत करना जानते हैं और कुछ लोग सिर्फ औकात देखकर सामने वाले को तौलते हैं। लेकिन याद रखो, इज्जत और इंसानियत से बड़ा कोई दर्जा नहीं होता।”
उन्होंने सबकी तरफ देखा, खासकर रिया की तरफ।
रिया की आँखें नीचे झुकी हुई थीं।
पूरे ऑफिस में सन्नाटा छा गया।
सबके दिल में डर बैठ गया कि अब मालिक सजा सुनाएंगे।
जिसे कल सबने चाय वाला समझकर अपमानित किया, आज वही मालिक बनकर सबके सामने खड़ा था और अब उसकी अगली बात सबकी किस्मत तय करने वाली थी।
कॉन्फ्रेंस हॉल में सन्नाटा पसरा है।
सबकी आँखें झुकी हुई हैं।
मालिक आर्यन वर्मा सबके सामने खड़े हैं।
उनके चेहरे पर गंभीरता है लेकिन आँखों में गहराई।
सच सामने आ चुका था।
जिसे कल सबने चाय वाला समझकर अपमानित किया, वही आज इस कंपनी का मालिक था।
आर्यन ने धीरे-धीरे बोलना शुरू किया,
“कल मैंने देखा कि कुछ लोग दूसरों की इज्जत करने में विश्वास रखते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग औकात और कपड़ों से इंसान को तौलते हैं।”
उन्होंने गहरी नजर रिया पर डाली,
“खासकर तुम रिया, तुम्हें अपनी पोजीशन पर बहुत घमंड है, है ना? कल तुमने जो किया वह सिर्फ एक इंसान का नहीं, बल्कि इंसानियत का अपमान था।”
रिया की आँखों से आँसू बहने लगे।
वो काँपते हुए बोली,
“सर, मुझसे गलती हो गई। मैंने आपको पहचान नहीं पाया।”
आर्यन की आवाज और सख्त हो गई,
“यही तो समस्या है। अगर मैं अमीर दिखता, अच्छे कपड़े पहनकर आता तो तुम मेरे सामने झुक कर बात करती। लेकिन जब मैं फटे पुराने कपड़े पहनकर आया तो तुमने मुझे इंसान समझने से भी इंकार कर दिया। क्या यही तुम्हारी परवरिश है? क्या यही तुम्हारी सोच है?”
पूरा हॉल खामोश था।
हर किसी की साँसे अटक गई थीं।
आर्यन ने अचानक अर्जुन की तरफ देखा।
उनकी आँखों में नरमी आ गई।
लेकिन इस भीड़ में एक इंसान ऐसा था जिसने इंसानियत को जिंदा रखा।
सबकी नजरें अर्जुन की तरफ घूम गईं।
अर्जुन थोड़े शर्माते हुए खड़ा हुआ।
आर्यन मुस्कुराते हुए बोले,
“तुमने कल अकेले खड़े होकर सही बात कही। जब पूरी भीड़ गलत काम कर रही थी, तब तुमने हिम्मत दिखाई। यही असली काबिलियत है। ऐसे लोग ही असली लीडर होते हैं।”
अर्जुन भावुक हो गया।
उसकी आँखों में आँसू थे।
अर्जुन धीरे से बोला,
“सर, मैंने तो बस इंसानियत निभाई थी।”
“नहीं अर्जुन, तुमने इंसानियत से कहीं ज्यादा किया। तुमने पूरी कंपनी को आईना दिखाया और मैं चाहता हूँ कि ऐसे लोग मेरी टीम में सबसे ऊँचे पद पर हों।”
आर्यन ने उसी समय घोषणा की,
“आज से अर्जुन को सीनियर मैनेजर बनाया जाता है और वह सीधे मेरे साथ काम करेगा।”
हॉल तालियों से गूंज उठा।
अर्जुन भावुक होकर खड़ा रह गया।
अब बारी आई रिया की।
आर्यन ने गहरी साँस ली और बोले,
“रिया, तुम्हारे साथ क्या करना चाहिए, यह मैं अच्छे से जानता हूँ। अगर चाहूँ तो अभी इसी वक्त तुम्हें नौकरी से निकाल दूँ। लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम्हें तुम्हारी गलती का एहसास हो।”
रिया सिसकते हुए बोली,
“सर, मुझे माफ कर दीजिए। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।”
आर्यन ने कहा,
“माफी शब्दों से नहीं मिलती, कर्मों से मिलती है। आज से तुम्हें अपनी पोजीशन से हटाकर जूनियर लेवल पर काम करना होगा। वहाँ बैठकर तुम सीखोगी कि इज्जत किसे कहते हैं।”
रिया फूट-फूट कर रो पड़ी।
उसके सारे सपने, घमंड और अभिमान पल भर में टूट गए थे।
बाकी सभी कर्मचारी भी कांप गए।
सब सोचने लगे,
“हे भगवान, हमने भी कल उस चाय वाले की हँसी उड़ाई थी। अब अगर मालिक को याद आ गया तो हमारी भी छुट्टी हो जाएगी।”
आर्यन ने सबकी ओर देखा और कहा,
“बाकियों के लिए भी एक चेतावनी है। यह कंपनी सिर्फ काम के लिए नहीं है, यह परिवार है और इस परिवार में हर इंसान की इज्जत की जाएगी। चाहे वह ऑफिस बॉय हो, चपरासी हो या मैनेजर। अगर किसी ने दोबारा किसी को नीचा दिखाने की कोशिश की तो उसके लिए यहाँ कोई जगह नहीं होगी।”
पूरा ऑफिस खामोश हो गया।
कुछ कर्मचारियों की आँखों में आँसू थे।
कई लोग पछता रहे थे कि उन्होंने भी मजाक में उस चाय वाले का अपमान किया था।
आर्यन ने धीरे से कहा,
“दोस्तों, याद रखो कपड़े, पैसे और पद से इंसान बड़ा नहीं होता। असली महानता दिल से होती है और यही सबक मैं आज आप सबको देना चाहता था।”
उस दिन के बाद ऑफिस का पूरा माहौल बदल गया।
अब कोई भी किसी की औकात या कपड़ों से तुलना नहीं करता था।
सब एक-दूसरे की मदद करने लगे।
अर्जुन सबसे प्रेरणा देने वाला इंसान बन गया।
रिया भी अब पूरी तरह बदल चुकी थी।
वह विनम्रता से छोटे काम करने लगी और धीरे-धीरे सबका विश्वास जीतने की कोशिश करने लगी।
कभी-कभी जिंदगी हमें आईना दिखाने के लिए अजीब खेल खेलती है।
कल तक जो लोग खुद को बड़ा समझते थे, आज वही दूसरों से माफी मांग रहे थे।
और जिसने खुद को छोटा दिखाकर सबकी असली तस्वीर देखी, वही असल में सबसे बड़ा निकला।
News
बस अड्डे का वह बच्चा — शहीद के बेटे की कहानी
बस अड्डे का वह बच्चा — शहीद के बेटे की कहानी बस अड्डा सुबह से ही शोरगुल से भरा था।…
गर्मियों की सुबह थी, करीब 9 बजे। आईपीएस साक्षी राजपूत अपने कार से एक गुप्त मिशन के लिए जा रही थीं।
आईपीएस साक्षी राजपूत की कहानी – वर्दी की असली ताकत गर्मियों की सुबह थी, करीब 9 बजे। आईपीएस साक्षी राजपूत…
Kajal Aggarwal’s recent accident has shaken her entire family to the core. The actress is currently unconscious and admitted to the ICU
Kajal Aggarwal’s Accident Leaves Family Devastated: Mother Breaks Down in ICU Kajal Aggarwal’s recent accident has shaken her entire family…
चौराहे पर सुनील और समोसे का ठेला – एक इंसानियत भरी कहानी (हिंदी में)
चौराहे पर सुनील और समोसे का ठेला – एक इंसानियत भरी कहानी (हिंदी में) मुंबई के एक व्यस्त चौराहे पर…
फिर वे अपना एटीएम कार्ड निकालकर राधा के हाथ में रखते हैं, “बैंक जाओ, इससे 500 रुपये निकालना। अंश के लिए दूध और घर के लिए थोड़ा राशन ले आना।”
राधा और बैंक – इज्जत का असली मतलब (हिंदी कहानी) एक दुबली-पतली दस साल की लड़की, राधा, अपने पाँच महीने…
कहानी: इज्जत, इंसानियत और किस्मत की सच्ची जीत
कहानी: इज्जत, इंसानियत और किस्मत की सच्ची जीत दिल्ली के एक पौश इलाके में राजीव मल्होत्रा का आलीशान बंगला था।…
End of content
No more pages to load






