शामली के इतिहास में पहली बार मिली ऐसी सजा | अजय पाठक फैमिली हत्याकांड |

शामली का वो ‘काला’ नया साल: भजन गायक अजय पाठक और उनके परिवार के कत्ल की खौफनाक दास्तां
प्रस्तावना: उत्तर प्रदेश के शामली जिले का आदर्श मंडी इलाका, साल 2019 के अंत में एक ऐसी सनसनीखेज वारदात का गवाह बना जिसने मानवीय रिश्तों और विश्वास की धज्जियां उड़ा दीं। एक मशहूर भजन गायक, उनकी पत्नी और दो मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह कहानी है धोखे, लालच और प्रतिशोध की, जिसे एक ऐसे शख्स ने अंजाम दिया जिसे परिवार ने अपना माना था।
1. एक खुशहाल परिवार और रहस्यमयी सन्नाटा
शामली की पंजाबी कॉलोनी की पहली गली में अजय पाठक का दो मंजिला मकान था। अजय पाठक कोई साधारण नाम नहीं थे; वह एक प्रतिष्ठित भजन गायक थे। उनके परिवार में पत्नी स्नेहलता, 16 साल की बेटी वसुंधरा और 11 साल का बेटा भागवत था। घर के नीचे के हिस्से में अजय के बुजुर्ग चाचा दर्शन लाल पाठक रहते थे।
31 दिसंबर 2019 की सुबह जब पूरा देश नए साल के स्वागत की तैयारी कर रहा था, पाठक निवास में एक अजीब सी खामोशी छाई थी। चाचा दर्शन लाल सुबह उठे, लेकिन रोज की तरह ऊपर से नाश्ता नहीं आया। उन्होंने देखा कि घर के मुख्य दरवाजों पर बाहर से ताले लटके थे। उन्हें लगा कि शायद अजय परिवार सहित अपने ससुराल करनाल चले गए होंगे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि अजय की तीन गाड़ियों में से ‘फोर्ड इकोस्पोर्ट’ गायब है और सबका फोन बंद आ रहा है, तो उनकी चिंता बढ़ गई।
2. ताला टूटा और रूह कांप गई
जब दोपहर तक भी अजय के भाई और रिश्तेदारों का उनसे संपर्क नहीं हो पाया, तो शक गहरा गया। पड़ोसियों की मौजूदगी में जब घर का ताला तोड़ा गया, तो अंदर का मंजर किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था।
बेडरूम का दृश्य: फर्श पर खून के धब्बे थे। बेड पर रजाई के नीचे अजय पाठक और उनकी पत्नी स्नेहलता के खून से लथपथ शव पड़े थे। उन पर तेज धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
बच्चों का कमरा: बच्चों के कमरे में बेड खून से सना था, लेकिन बच्चे वहां नहीं थे।
ग्राउंड फ्लोर का रहस्य: जब नीचे के एक बंद कमरे का ताला तोड़ा गया, तो वहां बेटी वसुंधरा का शव मिला। लेकिन 11 साल का मासूम भागवत अब भी लापता था।
3. पुलिस की तफ्तीश और सीसीटीवी का सुराग
शामली पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे। फॉरेंसिक टीम और स्निफर डॉग्स को बुलाया गया। घर से जेवरात, पैसे और मोबाइल फोन गायब थे। पुलिस ने जांच शुरू की तो सीसीटीवी फुटेज में एक अहम सुराग मिला। 30 दिसंबर की शाम को एक युवक घर के अंदर जाता दिखा, जो रात भर वहीं रहा और अगली सुबह करीब 7:30 बजे अजय की फोर्ड इकोस्पोर्ट गाड़ी लेकर निकला। गाड़ी की डिग्गी में कुछ भारी सामान रखा गया था।
पुलिस ने जब भजन मंडली के सदस्यों की जांच की, तो पता चला कि अजय का प्रिय शिष्य हिंमाशु सैनी गायब है।
4. पानीपत हाईवे पर जलती गाड़ी और मासूम का अंत
तफ्तीश के दौरान हरियाणा के पानीपत हाईवे पर एक जलती हुई इकोस्पोर्ट कार की सूचना मिली। जब पुलिस वहां पहुँची, तो उन्होंने एक युवक को भागने की कोशिश करते हुए पकड़ा—वह हिमांशु सैनी ही था।
जब कार की डिग्गी खोली गई, तो पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए। डिग्गी के अंदर 11 साल के भागवत का अधजला शव था। हिमांशु ने मासूम को मारकर उसे ठिकाने लगाने के लिए गाड़ी में आग लगा दी थी।
5. कत्ल की वजह: कर्ज, अपमान और तीन थप्पड़
पुलिस की पूछताछ में हिमांशु ने जो बताया वह चौंकाने वाला था। हिमांशु ने अपनी बहन की शादी के लिए बैंक से 4-5 लाख का लोन लिया था। उसने अजय पाठक के पास भी अपनी ‘कमेटी’ के करीब 60,000 रुपये जमा कर रखे थे। बैंक के नोटिस आने पर जब उसने अजय से अपने पैसे मांगे, तो बात बिगड़ गई।
30 दिसंबर की रात, डिनर के बाद जब हिमांशु ने फिर से पैसों की बात की, तो अजय पाठक ने उसे सबके सामने डांटा और तीन थप्पड़ जड़ दिए। हिमांशु ने इस अपमान को दिल पर लगा लिया। उसने तय किया कि वह इस बेइज्जती का बदला पूरे परिवार को खत्म करके लेगा।
6. कत्ल का खौफनाक तरीका
रात करीब 3 बजे, जब सब सो रहे थे, हिमांशु ने घर में रखी एक सजावटी तलवार और चाकू उठाया।
उसने सबसे पहले अजय पाठक और फिर स्नेहलता की हत्या की।
इसके बाद वह वसुंधरा के कमरे में गया। 16 साल की वसुंधरा ने डटकर मुकाबला किया (पोस्टमार्टम में उसकी उंगलियों में कातिल के बाल फंसे मिले), लेकिन वह भी नहीं बच सकी।
अंत में उसने सोते हुए मासूम भागवत का गला दबाकर हत्या कर दी।
उसने योजना बनाई थी कि वह बारी-बारी से सारे शव ठिकाने लगाएगा, इसीलिए उसने ताला लगाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की।
7. न्याय की जीत: ऐतिहासिक फैसला
इस केस की सुनवाई शामली की स्पेशल कोर्ट में हुई। 14 गवाहों और ठोस फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर, अदालत ने इस अपराध को ‘विरल से विरलतम’ (Rarest of Rare) माना।
मई 2024 में, शामली के इतिहास में पहली बार, कोर्ट ने हिमांशु सैनी को फांसी की सजा सुनाई।
निष्कर्ष और सीख: अजय पाठक हत्याकांड हमें सिखाता है कि कभी-कभी सबसे करीबी व्यक्ति ही सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है। छोटी सी रकम और क्षणिक क्रोध ने एक हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया। यह मामला आज भी शामली के लोगों के जेहन में ताजा है, जो हमें रिश्तों में सतर्कता और क्रोध पर नियंत्रण की अहमियत याद दिलाता है।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए फांसी की सजा ही एकमात्र समाधान है? अपनी राय कमेंट्स में जरूर साझा करें।
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