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विशेष रिपोर्ट: ‘कैप्टन बाबा’ के पापों का साम्राज्य – मर्चेंट नेवी ऑफिसर से 1500 करोड़ का ‘ढोंगी’ बनने तक की पूरी दास्तां

नासिक, महाराष्ट्र: आस्था जब अंधविश्वास में बदल जाती है, तो वह शोषण का सबसे आसान जरिया बन जाती है। महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने न केवल शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि समाज के उस रसूखदार तबके को भी बेनकाब कर दिया है जो अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए ‘ढोंगी बाबाओं’ के चरणों में नतमस्तक रहता है। यह कहानी है अशोक खरात की, जिसे लोग ‘कैप्टन बाबा’ के नाम से जानते थे, और जिसके आलीशान ऑफिस की दीवारों के पीछे महिलाओं के सम्मान और विश्वास की नीलामी हो रही थी।

कौन है अशोक खरात उर्फ कैप्टन बाबा?

अशोक खरात की शुरुआत एक बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से हुई थी। वह नासिक के मिररगांव का रहने वाला है। खरात ने लगभग 22 साल तक मर्चेंट नेवी में नौकरी की। इस दौरान उसने 150 से अधिक देशों की यात्रा की और कई भाषाओं पर पकड़ बनाई। समुद्र के लंबे सफर के दौरान उसने किताबें पढ़कर और लोगों के व्यवहार का अध्ययन कर ‘मन पढ़ना’ और ‘भविष्य बताना’ सीख लिया था।

रिटायरमेंट के बाद जब वह गांव लौटा, तो उसने अपनी इसी कला का उपयोग लोगों को प्रभावित करने के लिए किया। उसने एक ट्रस्ट बनाया और गांव में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया। जल्द ही उसकी ख्याति एक ‘पहुँचे हुए संत’ के रूप में फैल गई। लोग उसे सम्मान से ‘कैप्टन बाबा’ बुलाने लगे क्योंकि उसके पास मर्चेंट नेवी का गौरवशाली अतीत था।

सत्ता और रसूख का केंद्र बना ‘कैप्टन बाबा’ का दरबार

कैप्टन बाबा की प्रसिद्धि केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रही। जल्द ही उसके दरबार में महाराष्ट्र के बड़े नेताओं, सांसदों, विधायकों, और यहाँ तक कि आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों का जमावड़ा लगने लगा।

बताया जाता है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उनकी पत्नी, और कई कैबिनेट मंत्रियों ने भी इस बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई थी। अधिकारियों को अच्छी पोस्टिंग चाहिए थी, नेताओं को मंत्री पद की चाह थी और व्यापारियों को धन-समृद्धि की। इस रसूख का फायदा उठाकर बाबा ने देखते ही देखते 1500 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। उसके पास आलीशान बंगले, करोड़ों की गाड़ियां और सैकड़ों एकड़ जमीन है।

एआई (AI) वीडियो और ब्लैकमेलिंग का खेल

इस पूरे काले साम्राज्य का भांडा तब फूटा जब 18 फरवरी 2026 को शिरडी थाने में एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि नीरज जाधव नाम के व्यक्ति ने उसका एक आपत्तिजनक एआई (AI) वीडियो बनाया है और उसे वायरल करने की धमकी दे रहा है।

जब पुलिस ने नीरज जाधव को गिरफ्तार किया, तो उसने योगेश भालेराव का नाम लिया। योगेश की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल से जो सच सामने आया, उसने पुलिस के भी रोंगटे खड़े कर दिए। उसके मोबाइल में अशोक खरात उर्फ कैप्टन बाबा के कई आपत्तिजनक वीडियो थे। इन्हीं में से एक वीडियो सोशल मीडिया पर लीक हो गया, जिसमें बाबा अपने ऑफिस में एक महिला के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते और उसे तंत्र-मंत्र के नाम पर विवश करते दिखाई दे रहे थे।

150 से ज्यादा महिलाओं का यौन शोषण?

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, कैप्टन बाबा के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ आ गई। 17 मार्च 2026 को नासिक के सरकारवाड़ा थाने में एक 35 वर्षीय महिला ने हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज कराई। वह महिला एक संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसने बताया कि वह अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बाबा के कनाडा कॉर्नर स्थित ऑफिस गई थी। वहां उसे नशीला पानी पिलाया गया और बेहोशी की हालत में उसके साथ बलात्कार किया गया।

बाबा ने उसका वीडियो बना लिया था और उसे ब्लैकमेल कर बार-बार उसका शोषण करता रहा। पुलिस ने जब कैप्टन बाबा को गिरफ्तार कर उसके पास से लैपटॉप और डिजिटल उपकरण बरामद किए, तो शुरुआती जांच में ही 58 वीडियो मिले। सूत्रों के अनुसार, बाबा के पास 150 से अधिक ऐसी वीडियो क्लिप्स हैं, जिनमें समाज के बड़े घरों की महिलाएं—नेताओं और अधिकारियों की पत्नियां और रिश्तेदार—शामिल हैं।

एसआईटी (SIT) का गठन और राजनीतिक भूचाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 मार्च 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। पुलिस ने बाबा के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया था ताकि वह विदेश न भाग सके।

इस कांड की आंच राजनीति तक भी पहुँची। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का एक पुराना वीडियो (जुलाई 2021) वायरल हुआ जिसमें वह बाबा के पैर धोती नजर आ रही थीं। हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता था, लेकिन जन दबाव और नैतिक आधार पर उन्हें 20 मार्च 2026 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

बाबा के पास से हथियार और आपत्तिजनक सामग्री बरामद

गिरफ्तारी के समय पुलिस ने कैप्टन बाबा के पास से:

दो हाई-एंड लैपटॉप (जिनमें वीडियो स्टोर थे)

एक रिवॉल्वर और 21 जिंदा कारतूस

कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।

एसआईटी ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी कर अन्य पीड़ित महिलाओं से सामने आने की अपील की है, साथ ही यह आश्वासन दिया है कि उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

निष्कर्ष: आस्था या अंधा कुआं?

कैप्टन बाबा का यह मामला एक बार फिर समाज को आईना दिखाता है। आखिर क्यों पढ़े-लिखे अधिकारी और जिम्मेदार राजनेता ऐसे ढोंगी बाबाओं के जाल में फंस जाते हैं? क्या अच्छी पोस्टिंग या राजनीतिक पद के लिए अपनी नैतिकता को ताक पर रखना सही है?

अशोक खरात अब सलाखों के पीछे है, लेकिन उसके द्वारा बनाए गए 1500 करोड़ के साम्राज्य और बर्बाद की गई दर्जनों जिंदगियों का हिसाब होना अभी बाकी है। पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों का खुलासा होगा।