बेटा DM बनकर लौटा तो माँ-बाप रोड के किनारे भीख मांग रहे थे बेटे ने देखा फिर जो हुआ, इंसानियत रो पड़ी

.
.

बेटे का अफसर बनना और मां-बाप का कष्ट

यह कहानी एक साधारण लड़के की है जो जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने सपनों को पूरा करता है, लेकिन जब वह सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचता है, तब उसे अपने माता-पिता की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में हमें कभी भी अपने परिवार की अहमियत को नहीं भूलना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

राजस्थान के जैसलमेर जिले के एक छोटे से गांव मोहनगढ़ में एक लड़का पैदा हुआ जिसका नाम था आकाश। आकाश का परिवार बहुत ही गरीब था, और उसके माता-पिता ने बहुत संघर्ष किया था ताकि आकाश अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके। आकाश के पिता मोहन सिंह एक किसान थे, और उनकी मां शारदा देवी घर के कामकाज में व्यस्त रहती थीं। आकाश ने अपने माता-पिता की कड़ी मेहनत और संघर्षों को देखा था, और उसका एक ही सपना था कि वह अपनी मेहनत से अपने परिवार की गरीबी को दूर कर सके।

जब आकाश छोटे थे, तो उन्होंने अपने पिता को खेतों में काम करते हुए देखा था और उनकी मां को दिन-रात काम करते हुए। आकाश के लिए यह कठिनाई एक प्रेरणा थी। उन्होंने न केवल पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया, बल्कि उनके माता-पिता के सपनों को पूरा करने का भी प्रण लिया। आकाश ने अपनी कड़ी मेहनत से अपनी जिंदगी को एक नया मोड़ दिया और कुछ ही सालों में वह विदेश में जाकर पढ़ाई पूरी की और डीएम बन गया।

आकाश जब विदेश से लौटा, तो उसकी इच्छा थी कि वह अपने माता-पिता को सरप्राइज दे और उनके चेहरे पर मुस्कान देखे। उसने किसी से कोई संपर्क नहीं किया और सीधे अपने गांव जाने का फैसला किया। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही, उसने टैक्सी ली और बिना किसी को बताए गांव का रास्ता बताया।

गांव में लौटते हुए, आकाश की आंखों के सामने बचपन की तस्वीरें घूमने लगीं। उसने अपनी मां को सुबह अंधेरे में चूल्हा जलाते हुए और अपने पिता को फटे कपड़ों में खेतों में काम करते हुए देखा था। आज वह अफसर बनकर लौट रहा था, लेकिन उसकी यह यात्रा केवल सफलता की नहीं, बल्कि एक सच्चे बेटे की खोज की भी थी।

रास्ते में, गाड़ी एक मंदिर के पास रुकी और आकाश ने बाहर देखा कि कुछ भिखारी मंदिर के बाहर बैठे थे। उसकी नजरें उन भिखारियों पर पड़ीं, और अचानक उसकी नजरें एक बुजुर्ग व्यक्ति पर टिक गईं। वह व्यक्ति फटे कपड़े पहने हुए, धूल से सने हुए हाथ फैलाए बैठा था। आकाश ने पहले तो अपनी नजरें हटा लीं, लेकिन फिर एक अजीब सा एहसास हुआ और उसने फिर से उस बुजुर्ग व्यक्ति को देखा।

उसकी धड़कन तेज हो गई और वह मंदिर की सीढ़ियों की ओर बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वह बुजुर्ग व्यक्ति के पास पहुंचा, उसकी दुनिया रुक गई। सामने बैठा वह व्यक्ति उसका अपना पिता, मोहन सिंह था। आकाश को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका पिता अब सड़कों पर भीख मांग रहा था। आकाश की आंखों में आंसू थे, और वह घुटनों के बल बैठकर अपने पिता के पास पहुंचा।

पिता ने धीरे से सिर उठाया, और दोनों के बीच एक लम्बी चुप्पी थी। आकाश के लिए यह पल इतना दर्दनाक था कि उसे यह समझ में ही नहीं आया कि वह क्या कहे। उसके दिल में लाखों सवाल थे, लेकिन पिता ने बस इतना कहा, “बेटा, अब घर हमारा नहीं रहा।”

यह शब्द सुनकर आकाश का दिल टूट गया। उसकी सारी मेहनत, सारी सफलता अब बेकार लगने लगी। उसने सोचा था कि वह अपने माता-पिता को आराम दे पाएगा, लेकिन यह तो उसकी सबसे बड़ी हार थी। आकाश को यह समझ में आ गया कि उसके माता-पिता ने उसके लिए कितनी कठिनाइयां सहीं, लेकिन उसने कभी उनका ख्याल नहीं रखा।

पिता ने आगे बताया कि जब आकाश विदेश गया, तब घर की स्थिति बदलने लगी। बहू के आने के बाद घर में हालात खराब होने लगे। धीरे-धीरे उन्हें घर से बाहर किया गया और वह सड़क पर आ गए। आकाश को यह सुनकर दुख हुआ, लेकिन वह अपने माता-पिता को घर वापस नहीं ले जा सका।

आकाश ने अपने पिता से पूछा कि मां कहां हैं, और वह बिना कुछ कहे उन्हें एक झुग्गी की ओर इशारा कर दिया। आकाश वहां गया और देखा कि उसकी मां उसी झुग्गी में बैठी थी। वह बहुत थकी हुई, चुपचाप आंसू पोंछ रही थी। आकाश को यह देख कर बहुत दुख हुआ, लेकिन उसके पास कोई शब्द नहीं थे।

इस घटना ने आकाश की पूरी जिंदगी बदल दी। वह डीएम था, सरकारी अधिकारी था, लेकिन वह सिर्फ एक बेटा था, जो अपने माता-पिता को अकेला छोड़ आया था। उसने ठान लिया कि अब वह अपने माता-पिता को उनका हक दिलाएगा। उसने अपनी पत्नी और घर की बाकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया और अपने माता-पिता के लिए एक नया घर खरीद लिया।

आकाश ने अपनी पत्नी को तलाक देने का फैसला किया, क्योंकि उसने अपने माता-पिता के साथ जो किया, वह कभी माफ नहीं कर सकता था। आकाश ने अपने माता-पिता के लिए एक नया घर खरीदा और उन्हें वहां आराम से रहने दिया। उसकी मां ने पहली बार उस घर में चूल्हा जलाया और आकाश ने महसूस किया कि असली सफलता सिर्फ पद और पैसों में नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के सम्मान में होती है।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में सफलता पाने से पहले हमें अपने परिवार, विशेषकर अपने माता-पिता की कद्र करनी चाहिए। जो प्यार और त्याग हमारे माता-पिता हमें देते हैं, वह अनमोल होता है और उसे कभी भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।