पत्नी की एक गलती की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

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एक गलती, एक परिवार: राजस्थान की दर्दनाक कहानी

राजस्थान के जोधपुर जिले के बालेश्वर गांव में महेंद्र सिंह अपनी पत्नी आस्था देवी और बेटी करुणा के साथ रहता था। महेंद्र सिंह गांव में गोलगप्पे बेचता था, लेकिन उसकी दो बड़ी कमजोरियां थीं—शराब और जुआ। जितना भी पैसा कमाता, सब नशे और जुए में उड़ा देता। घर की हालत खराब थी, गरीबी का साया हर तरफ फैला था।

परिवार में तनाव और आस्था की चिंता

महेंद्र की पत्नी आस्था देवी परेशान रहती थी। उसका पति हर वक्त नशे में रहता, गुस्सैल था, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ता। बेटी करुणा 12वीं पास कर चुकी थी, घर पर सिलाई-कढ़ाई का काम करती थी। आस्था देवी को चिंता थी कि बेटी जवान हो चुकी है, उसकी शादी कैसे होगी, घर का खर्च कैसे चलेगा?

एक रात महेंद्र ने शराब के लिए पत्नी से झगड़ा किया। गुस्से में आकर गैस सिलेंडर लीक कर दिया, माचिस जलाने की धमकी दी। आस्था ने किसी तरह माचिस छीन ली और मजबूरी में शराब का इंतजाम किया। महेंद्र शराब पीकर सो गया, लेकिन घर की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं।

कमरे का किराया और एक नई गलती

आस्था देवी ने घर का एक कमरा किराए पर देने का फैसला किया, ताकि कुछ पैसे मिल जाएं। कई दिनों बाद गांव के स्कूल का चपड़ासी उत्तम सिंह किरायेदार बन गया। उत्तम सिंह हैंडसम, नौजवान था। आस्था देवी और उत्तम सिंह के बीच धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोनों के बीच अवैध संबंध शुरू हो गए। उत्तम सिंह हर बार पैसे देता, आस्था देवी उसके साथ समय बिताती।

राहुल की एंट्री और परिवार का बिखराव

उत्तम सिंह ने अपने दोस्त राहुल को भी कमरे में बुला लिया। राहुल अमीर खानदान का लड़का था, चोरी करके घर से भागा था। अब तीनों के बीच बातें होने लगीं। आस्था देवी ने राहुल को भी अपने जाल में फंसा लिया। दोनों लड़कों से पैसे लेकर वह अपने घर का खर्च चलाने लगी। बेटी करुणा नानी के घर चली गई थी, घर में अकेलापन था, और इस अकेलेपन में आस्था देवी ने गलत रास्ता चुन लिया।

बेटी करुणा की चाल

करुणा जब नानी के घर से लौटी, तो दोनों लड़कों की नजरें उस पर टिक गईं। राहुल ने उत्तम से कहा, “अगर यह लड़की भी हमारे जाल में फंस जाए तो अच्छा होगा।” करुणा समझदार थी, उसने पैसों की जरूरत बताई और उत्तम से ₹2000 मांगे। उत्तम ने पैसे दिए, लेकिन बदले में सेवा की मांग की। करुणा ने चालाकी से नींद की दवाइयां खरीदीं, माता-पिता के खाने में मिला दी, ताकि दोनों गहरी नींद में सो जाएं। फिर रात को दोनों लड़कों के पास गई और उनके साथ गलत काम किया।

अब करुणा भी अपनी मां के रास्ते पर चल चुकी थी। जब भी मौका मिलता, दोनों लड़कों के पास जाती, पैसे लेती, और मां भी यही करती थी। एक परिवार की नींव पूरी तरह से हिल चुकी थी।

अंतिम हादसा: सबकुछ खत्म

एक दिन करुणा को चक्कर आया, वह बेहोश हो गई। पिता महेंद्र सिंह ने उसे अस्पताल पहुंचाया। महिला डॉक्टर ने चेकअप किया, तो पता चला कि करुणा एक महीने की गर्भवती है। महेंद्र सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटी ने सबकुछ बता दिया—”पिताजी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। राहुल और उत्तम के साथ मैंने गलत काम किया है।” करुणा ने अपनी मां की भी पोल खोल दी—”मां भी इन दोनों लड़कों के साथ गलत रास्ते पर चल चुकी है।”

महेंद्र सिंह का सब्र टूट चुका था। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन मन ही मन बड़ा फैसला कर लिया। रात को सब सो गए, लेकिन महेंद्र सिंह जाग रहा था। उसने रसोई में जाकर गैस सिलेंडर लीक कर दिया, फिर चाकू लेकर दोनों लड़कों के कमरे में गया और उनका गला रेत दिया। घर में लौटकर माचिस की तिल्ली जलाकर रसोई में फेंक दी। धमाका हुआ, आस्था देवी और करुणा जलकर राख हो गईं।

महेंद्र सिंह पुलिस स्टेशन गया, खुद को सरेंडर किया, पूरी कहानी बता दी। पुलिस ने चारों लाशों को बरामद किया, पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। महेंद्र सिंह ने कहा, “मेरी पत्नी और बेटी ने मुझे धोखा दिया, दोनों लड़कों के साथ गलत रिश्ते कायम किए। इसी वजह से मैंने सबको मौत के घाट उतार दिया।”

समाज, सवाल और न्याय

महेंद्र सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। अब अदालत तय करेगी कि उसे क्या सजा मिलेगी। लेकिन सवाल यह है—क्या महेंद्र सिंह का कदम सही था? क्या एक गलती पूरे परिवार को खत्म कर सकती है? क्या गरीबी, लालच, नशा और गलत फैसले एक खुशहाल परिवार को बर्बाद कर सकते हैं?

यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, समाज के कई ऐसे परिवारों की है, जहां एक गलती, एक गलत रास्ता पूरे घर को तबाह कर देता है। रिश्तों की मर्यादा, भरोसे की नींव और सही फैसलों की अहमियत यही कहानी सिखाती है।