पत्नी की एक गलती की वजह से पति ने कर दिया कारनामा/पत्नी के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

धोखे की दहलीज: एक हेड कांस्टेबल और रूबी की दास्तां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का सरसोल गांव, जहाँ की हवाओं में वैसे तो शांति थी, लेकिन कुछ घरों के भीतर तूफान पनप रहे थे। इसी गांव में रहने वाला यशपाल, जो नजदीकी थाने में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात था, एक ऐसा व्यक्ति था जिसने वर्दी की मर्यादा को ताक पर रख दिया था।

एक बिखरता हुआ परिवार

यशपाल का जीवन दो पहलुओं में बंटा था। बाहर वह एक रसूखदार पुलिस वाला था, लेकिन भीतर से वह बुरी आदतों का गुलाम बन चुका था। गलत तरीके से कमाया गया धन वह जुए और अनैतिक गतिविधियों में उड़ा देता था। अक्सर वह हफ्तों तक घर नहीं आता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी रूबी और बेटा बिट्टू थे। बिट्टू शहर के एक हॉस्टल में रहकर आठवीं की पढ़ाई कर रहा था, इसलिए घर में रूबी अक्सर अकेली रहती थी।

रूबी और यशपाल के बीच अक्सर झगड़े होते थे। रूबी चाहती थी कि यशपाल घर पर समय बिताए, लेकिन यशपाल उसे डरा-धमका कर चुप करा देता था। जब रूबी को पता चला कि यशपाल शहर के अनैतिक अड्डों पर अपना समय और पैसा बर्बाद कर रहा है, तो उसके भीतर का खालीपन और विद्रोह जाग उठा। उसने खुद को उपेक्षित महसूस किया और धीरे-धीरे एक गलत रास्ते की ओर कदम बढ़ा दिए।

एक पड़ोसी और बढ़ती नजदीकियां

10 दिसंबर 2025 की सुबह, जब रूबी की रसोई का गैस सिलेंडर खत्म हुआ, तो वह मदद के लिए अपनी सहेली साधना के घर गई। वहाँ उसकी मुलाकात साधना के पति तेजपाल सिंह से हुई, जो पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था। तेजपाल की नजरें रूबी की सुंदरता पर टिक गईं और उसने उसे अपने जाल में फंसाने की योजना बनाई।

तेजपाल ने सहानुभूति जताते हुए रूबी से कहा, “यशपाल तुम्हें समय नहीं देता, तुम कितनी अकेली हो।” रूबी, जो पहले से ही भावनात्मक रूप से टूटी हुई थी, उसकी बातों में आ गई। शाम को जब तेजपाल सिलेंडर लेकर रूबी के घर पहुँचा, तो बातों-बातों में लेनदेन और अनैतिक समझौतों का सिलसिला शुरू हो गया। रूबी ने उसे पैसे दिए और बदले में साथ रहने का वादा लिया।

गुमराह रास्तों का अंतहीन सिलसिला

यशपाल की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर रूबी और तेजपाल के बीच अनैतिक संबंध बन गए। धीरे-धीरे इस खेल में तेजपाल के दो दोस्त, दीपक और कालू भी शामिल हो गए। रूबी अब पूरी तरह से भटक चुकी थी। उसे लगने लगा था कि यशपाल को कभी पता नहीं चलेगा।

कुछ समय बाद, रूबी का मन इन लोगों से भर गया और उसकी नजर अपने घर के सामने खुली एक नई मोबाइल शॉप के मालिक रवि पर पड़ी। रवि एक नौजवान और आकर्षक लड़का था। रूबी ने मोबाइल रिचार्ज करवाने के बहाने उसे भी अपने प्रलोभन में ले लिया। अब रूबी का घर एक तरह से अनैतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया था।

वो काली रात और खौफनाक अंजाम

5 जनवरी 2026 की रात, रवि रूबी के घर पर मौजूद था। तभी अचानक बिना बताए तेजपाल, दीपक और कालू भी वहाँ पहुँच गए। रूबी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे जबरदस्ती अंदर घुस गए। वहाँ रवि को देखकर वे भड़क गए और बहस होने लगी। माहौल तनावपूर्ण था, तभी एक अप्रत्याशित घटना घटी।

घर के मुख्य दरवाजे पर एक और दस्तक हुई। रूबी ने जब दरवाजा खोला, तो सामने यशपाल खड़ा था। वह ड्यूटी से अचानक लौट आया था और उसने शराब पी रखी थी। घर के भीतर अनजान पुरुषों को देखकर यशपाल का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। चारों युवक—तेजपाल, दीपक, कालू और रवि—यशपाल को धक्का देकर वहां से भागने में सफल रहे।

लेकिन यशपाल के भीतर का राक्षस जाग चुका था। उसने अपनी पत्नी रूबी को पकड़ लिया। उसने चिल्लाकर कहा, “तूने मेरे घर को क्या बना दिया है?” गुस्से और प्रतिशोध की आग में जलते हुए यशपाल ने रूबी को कमरे में ले जाकर उसके हाथ-पांव बांध दिए। उसने रसोई से लाल मिर्च का पाउडर लाकर उसे प्रताड़ित करना शुरू किया। रूबी की चीखें उसके मुंह में ठूंसे गए कपड़े की वजह से बाहर नहीं निकल पा रही थीं।

अंततः, यशपाल ने सब्जी काटने वाले चाकू से रूबी का गला रेत दिया।

आत्मसमर्पण और कानून

हत्या करने के बाद यशपाल सीधे थाने पहुँचा और अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर रूबी का शव बरामद किया। यशपाल का तर्क था कि उसने अपने स्वाभिमान और घर की मर्यादा बचाने के लिए यह कदम उठाया, लेकिन कानून की नजर में वह एक हत्यारा था।

आज यशपाल सलाखों के पीछे है और बिट्टू का भविष्य अंधकारमय हो चुका है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब परिवार में संवाद खत्म हो जाता है और मर्यादाएं लांघी जाती हैं, तो अंत केवल विनाश ही होता है।

सीख: धोखा और अनैतिकता कभी सुख नहीं देती, वे केवल तबाही का रास्ता खोलती हैं।