Dharmendra का गंगा में हुआ अस्थि विसर्जन, बेटे Sunny-Bobby ने नहीं इस शख्स ने निभाया आखिरी फर्ज़ !
हरिद्वार में धर्मेंद्र का अस्थि विसर्जन: भावुक विदाई
प्रारंभ
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर 2025 को हुआ, और उनके निधन के बाद से ही उनके चाहने वालों और परिवार में शोक का माहौल बना हुआ है। अब, 10 दिन बाद, देओल परिवार ने धर्मेंद्र को हरिद्वार में अंतिम विदाई दी है। इस अवसर पर, उनकी अस्थियों को मां गंगा की निर्मल धारा में प्रवाहित किया गया, जिससे उनके जीवन का एक अध्याय समाप्त हुआ।
अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया
धर्मेंद्र का अस्थि विसर्जन उत्तराखंड के पवित्र धाम हरिद्वार में एक प्राइवेट घाट पर किया गया। इस मौके पर परिवार के केवल छह सदस्य मौजूद थे। अस्थि विसर्जन की रस्म पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुई, जिसमें मंत्रों का उच्चारण भी किया गया। इस दौरान, धर्मेंद्र के पोते करण देओल ने दादा की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया, जबकि उनके बेटे सनी और बॉबी देओल इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए।
परिवार की भावनाएं
धर्मेंद्र के अस्थि विसर्जन के बाद परिवार के सभी सदस्य भावुक हो गए। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि बॉबी देओल सफेद रंग के कपड़ों में नजर आ रहे हैं, जबकि करण और अन्य पोते टॉवल लपेटे हुए हैं। सभी एक-दूसरे के गले लगते हुए भावुकता के क्षण साझा कर रहे हैं। इस दौरान, सभी ने गंगा में डुबकी भी लगाई, जो एक भारतीय परंपरा का हिस्सा है।
सुरक्षा व्यवस्था
धर्मेंद्र के अस्थि विसर्जन के दौरान होटल और प्रशासन की तरफ से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। यह सुनिश्चित किया गया कि यह अंतिम विदाई पूरी तरह से निजी और शांतिपूर्ण हो। पहले यह कहा जा रहा था कि अस्थि विसर्जन हरकी पौड़ी पर किया जाएगा, लेकिन बाद में परिवार ने प्राइवेट घाट पर ही इसे संपन्न करने का निर्णय लिया।

परिवार का एकजुट होना
धर्मेंद्र के निधन के बाद, पूरा देओल परिवार एकजुट होकर इस कठिन समय का सामना कर रहा है। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे का सहारा बनकर इस दुखद घटना को सहा है। सनी देओल ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के समय भी परिवार को एकजुट रखा और अब अस्थि विसर्जन के समय भी यही भावना देखने को मिली।
धर्मेंद्र की विरासत
धर्मेंद्र का जीवन और उनका करियर भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ गया है। उन्होंने कई यादगार फिल्में की हैं और अपनी अदाकारी से लाखों दिलों में जगह बनाई है। उनकी विरासत केवल उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार में भी उनकी यादें जीवित रहेंगी।
भावुक विदाई
धर्मेंद्र का अस्थि विसर्जन एक ऐसा क्षण था, जिसने सभी को भावुक कर दिया। हर किसी के मन में यह सवाल था कि क्या धर्मेंद्र को इस तरह अलविदा कहना सही था, लेकिन परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें जल्दी विदाई दी। हेमा मालिनी ने भी इस दौरान अपनी भावनाएं साझा कीं, जिसमें उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र कभी नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें कमजोर या बीमार देखे।
निष्कर्ष
हरिद्वार में धर्मेंद्र का अस्थि विसर्जन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह अंतिम विदाई केवल एक अभिनेता के लिए नहीं, बल्कि एक पिता, दादा और एक इंसान के लिए थी। धर्मेंद्र की यादें, उनकी फिल्में और उनका योगदान हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगा।
आज जब हम धर्मेंद्र को याद कर रहे हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि जीवन कितना अनमोल है और हमें अपने प्रियजनों के साथ बिताए हर पल का महत्व समझना चाहिए। धर्मेंद्र, आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे। आपकी यादें और आपकी विरासत हमें हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।
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