मेरठ का ‘खूनी सिंदूर’: सरहद का रक्षक घर में हारा, पत्नी ने 6 लाख में दी फौजी पति की सुपारी—एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मर्डर मिस्ट्री

मेरठ, उत्तर प्रदेश | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

इंसान अपनी रक्षा के लिए सबसे सुरक्षित जगह किसे मानता है? यकीनन, अपने घर की चारदीवारी को। लेकिन क्या हो जब वही चारदीवारी आपकी कब्र बन जाए? और क्या हो जब आपकी पीठ में छुरा घोंपने वाला कोई अनजान दुश्मन नहीं, बल्कि वह इंसान हो जिसके साथ आपने सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाई हों? उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के इंचोली थाना क्षेत्र के धनपुर गांव से सामने आई यह दास्तान महज़ एक अपराध नहीं है, बल्कि रिश्तों के कत्ल और विश्वासघात की वो चरम सीमा है, जो किसी की भी रूह कंपा दे।

यह कहानी है नैन सिंह की, जो भारतीय सेना के गौरव—सीमा सुरक्षा बल (BSF) में एक जांबाज जवान थे। नैन सिंह ने अपना पूरा जीवन देश की सरहदों की हिफाजत में लगा दिया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस घर की शांति के लिए वे सीमा पर जागते थे, उसी घर के भीतर उनकी मौत की बिसात बिछाई जा रही थी।

धनपुर गांव: वह काली रात और खौफनाक सन्नाटा

तारीख थी 27 और 28 मार्च 2026 की दरमियानी रात। मेरठ के इंचोली थाना क्षेत्र का धनपुर गांव गहरी नींद में सोया हुआ था। ग्रामीण इलाकों में रात का सन्नाटा वैसे ही बहुत गहरा होता है, लेकिन उस रात का सन्नाटा कुछ अलग ही गवाही दे रहा था। नैन सिंह, जो पश्चिम बंगाल के मालदा में 78वीं वाहिनी में तैनात थे, 6 मार्च को ही छुट्टी लेकर घर आए थे। उन्हें 2 अप्रैल को अपनी ड्यूटी पर वापस लौटना था।

रात के करीब 1:40 बजे का वक्त रहा होगा। अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज ने गांव के सन्नाटे को चीर दिया। पड़ोसियों ने आवाज सुनी, लेकिन किसी ने बाहर निकलकर देखने की जहमत नहीं उठाई। सबको लगा शायद कोई पटाखा होगा या खेतों में कोई आवाज हुई होगी। लेकिन वह आवाज किसी पटाखे की नहीं, बल्कि उस फौजी की जिंदगी के आखिरी लम्हे की चीख थी, जिसे धमाके के शोर में दबा दिया गया था।

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सुबह का खौफनाक मंजर: जब बिस्तर बना लहूलुहान

अगली सुबह जब काफी देर तक नैन सिंह के घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को चिंता हुई। जब किसी ने खिड़की से अंदर झांका, तो वहां का नजारा देखकर पूरे गांव के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांबाज फौजी नैन सिंह अपने बिस्तर पर खून से लथपथ पड़े थे। उनकी सांसें थम चुकी थीं। जिस फौजी ने सरहद पर दुश्मनों की गोलियों का सामना किया, वह अपने ही घर में निहत्था और बेबस मार दिया गया था।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। इंचोली थाना प्रभारी बजरंग प्रसाद और एसएसपी मेरठ अविनाश पांडे अपनी पूरी टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पुलिस को जो पहली बात खटकी, वह यह थी कि घर के दरवाजे पर कोई टूट-फूट नहीं थी। यानी कातिल को घर के अंदर आने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ा; दरवाजा या तो पहले से खुला था या किसी ने अंदर से खोला था।

एक मुकम्मल साजिश: घर को ‘खाली’ करने का खेल

पुलिस ने जब परिवार के सदस्यों के बारे में पूछताछ की, तो एक अजीब संयोग सामने आया। वारदात वाली रात नैन सिंह घर में बिल्कुल अकेले थे। उनकी पत्नी कोमल देवी अपने दोनों बच्चों (रिमी और आयुष) को लेकर मायके गई हुई थी। पिता गरीब दास किसी काम से बाहर थे, मां अपनी बेटी के ससुराल गई थी और छोटा भाई अपनी पत्नी के साथ मोदीनगर गया था।

इतने बड़े परिवार का एक साथ घर से बाहर होना और केवल नैन सिंह का अकेले घर पर रहना, पुलिस के लिए एक बड़ा सुराग बन गया। जब कोमल को खबर मिली, तो वह रोती-बिलखती ससुराल पहुंची। उसका विलाप इतना गहरा था कि किसी को शक नहीं हुआ। परिवार ने पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए चार पड़ोसियों पर शक जताया और पुलिस ने उन पर मुकदमा भी दर्ज कर लिया।

तकनीक ने बेनकाब किया ‘बेवफा’ चेहरा

एसएसपी अविनाश पांडे के नेतृत्व में जब पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो कहानी पूरी तरह बदल गई। पुलिस ने पाया कि कोमल के मोबाइल से वारदात वाले दिन एक नंबर पर 10 से ज्यादा बार लंबी बातचीत हुई थी। वह नंबर गुलशन कुमार का था, जो रिश्ते में नैन सिंह का मौसेरा भाई लगता था।

पुलिस ने जब गुलशन को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और उसने जो सच उबला, उसने रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर दिया।

अवैध संबंध, अपमान और 6 लाख की सुपारी

गुलशन ने कबूल किया कि जब नैन सिंह बॉर्डर पर तैनात होते थे, तब कोमल और उसके बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनके बीच अवैध संबंध बन गए। दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन नैन सिंह उनकी राह का सबसे बड़ा कांटा थे। कुछ समय पहले नैन सिंह को इस अफेयर की भनक लग गई थी, जिसके बाद उन्होंने कोमल को कड़ी फटकार लगाई थी और गुलशन के साथ उनका भारी झगड़ा भी हुआ था।

बेइज्जती और डर के चलते कोमल और गुलशन ने नैन सिंह को रास्ते से हटाने का फैसला किया। कोमल ने इस खौफनाक साजिश के लिए अपने मायके और ससुराल के गहने बेचकर और गिरवी रखकर 6 लाख रुपये जुटाए। यह पैसे उसने गुलशन को दिए। गुलशन ने इस काम के लिए अपने तीन दोस्तों—राहुल, गुड्डू और मोंटू को सुपारी दी।

वारदात का विवरण: कांपते हाथ और आखिरी गोली

27 मार्च की रात कोमल ने ही शूटरों को घर की लोकेशन दी और यह सुनिश्चित किया कि घर खाली रहे। रात के अंधेरे में गुलशन और उसके तीन दोस्त घर में दाखिल हुए। गुड्डू सबसे पहले कमरे में गया, लेकिन एक हट्टे-कट्टे फौजी को सोता देख उसके हाथ कांपने लगे और वह पीछे हट गया। तब राहुल आगे बढ़ा और उसने अवैध तमंचे से नैन सिंह के सिर में गोली मार दी। नैन सिंह को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला।

न्याय की प्रक्रिया और उजड़ता बचपन

पुलिस ने कोमल, गुलशन और तीनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कोमल का चेहरा बेनकाब हुआ, तो पूरा गांव थू-थू करने लगा। नैन सिंह के पिता गरीब दास के लिए यह देखना असहनीय था कि जिस बहू को उन्होंने बेटी माना, वही उनके बेटे की कातिल निकली।

सबसे दर्दनाक पहलू उन दो मासूम बच्चों का है, जिनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और मां सलाखों के पीछे अपनी उम्र गुज़ारेगी। एक जांबाज फौजी की शहादत तो देश के काम आती, लेकिन उसकी ऐसी ‘हत्या’ ने समाज के नैतिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है।


निष्कर्ष: नैन सिंह की यह कहानी हमें सिखाती है कि भरोसा करना अच्छी बात है, लेकिन अंधे भरोसे की कीमत कभी-कभी जान देकर चुकानी पड़ती है। जब रिश्तों में वासना और लालच प्रवेश कर जाते हैं, तो इंसानियत दम तोड़ देती है। मेरठ पुलिस की मुस्तैदी ने एक ‘ब्लाइंड मर्डर’ को सुलझाकर अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया, लेकिन नैन सिंह के परिवार को जो घाव मिले हैं, वे कभी नहीं भर पाएंगे।