पति-पत्नी और ऑटो ड्राइवर के बीच बना अजीब संबंध/सच्ची घटना

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राजस्थान के धौलपुर जिले के दौनारी गांव में सोन सिंह ठाकुर नाम का एक किसान रहता था। उसके चार बेटियां और एक बेटा था। बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी, और अब उसके बेटे रविकांत की शादी हो चुकी थी। रविकांत की पत्नी रजनी थी, जो हथियारी गांव की रहने वाली थी। दोनों के दो बच्चे थे – बेटा सात साल का और बेटी पाँच साल की। परिवार खुशहाल था और रविकांत मेहनत मजदूरी करता था, स्टाइल लगाने का काम करता था।

साल 2024 में रविकांत के दोस्त ने उसे बेंगलुरु जाकर काम करने का सुझाव दिया। पैसे ज्यादा मिलते थे वहां। रविकांत ने अपनी पत्नी रजनी से बात की, जिसने उसे जाने की अनुमति दी और कहा कि वह घर संभाल लेगी। रविकांत बेंगलुरु चला गया। वह बीच-बीच में घर आता रहता था, पर ज्यादातर समय दूर रहता था।

रविकांत के जाने के बाद रजनी अक्सर ऑटो स्टैंड पर जाती। वहां एक ऑटो ड्राइवर शाहरुख खान था, जिसकी उम्र लगभग 22 साल थी। शाहरुख खान को रजनी पहली बार रेलवे स्टेशन पर मिली थी जब वह रविकांत को छोड़कर आई थी। उस दिन रजनी ने शाहरुख से कहा था, “जहां तुम्हारा मन कहे, वहीं मुझे ले चलो।” यह बात शाहरुख के दिल को छू गई। वह रजनी के पीछे-पीछे आने लगा और उसकी राह देखने लगा।

कुछ दिन बाद रजनी फिर ऑटो स्टैंड पर आई और शाहरुख से बोली, “मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा है।” शाहरुख ने कहा, “आपने ही तो कहा था कि जहां तुम्हारा मन कहे, वहीं ले चलो।” दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। शाहरुख ने रजनी के लिए सामान भी खरीदा। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और फिर प्यार हो गया।

रजनी ने शाहरुख को बताया कि वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं, लेकिन वह अपने पति रविकांत से खुश नहीं है। शाहरुख ने कहा कि वह उससे प्यार करता है और चाहता है कि वे साथ रहें। रजनी ने शाहरुख से कहा कि नया साल आने वाला है और वह चाहती है कि शाहरुख उसे ऐसा गिफ्ट दे जो किसी प्रेमी ने नहीं दिया हो – उसका पति रविकांत इस दुनिया से चला जाए ताकि वे दोनों खुश रह सकें।

शाहरुख को यह बात सुनकर झटका लगा, लेकिन उसने रजनी की इच्छा पूरी करने का फैसला किया। दिसंबर 2025 में जब रविकांत बेंगलुरु से वापस आया, तो रजनी ने उसे बुलाया। रविकांत रेलवे स्टेशन पर उतरा, वहां शाहरुख की ऑटो मिली जिसने उसे घर छोड़ा। रविकांत ने शाहरुख को घर पर रुकने के लिए कहा।

अगले दिन रजनी ने रविकांत को बाजार जाने को कहा। रविकांत और शाहरुख बाजार गए, जहां शाहरुख ने रविकांत को शराब पिलाई। धीरे-धीरे रविकांत नशे में हो गया। मौका पाकर शाहरुख ने पत्थर से रविकांत को मारना शुरू कर दिया। जब उसने सुनिश्चित किया कि रविकांत मर चुका है, तो शव को जंगल में एक खाई में फेंक दिया।

रजनी ने अपने चचेरे भाई संजय को फोन करके बताया कि रविकांत बाजार गया था और वापस नहीं आया। संजय ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुट गई। 27 दिसंबर को रजनी ने नाटक किया कि जैसे रविकांत का भूत उसके सामने आ गया हो और उसे जंगल में उस जगह लेकर गई जहां शव पड़ा था। पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पुलिस ने शाहरुख खान को गिरफ्तार किया। पूछताछ में शाहरुख ने स्वीकार किया कि उसका रजनी के साथ एक साल से संबंध था और उसने रजनी के कहने पर रविकांत की हत्या की। पुलिस ने रजनी को भी गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।

रविकांत के बच्चे अब बिना पिता के रह गए। उनकी मां जेल में थी और उनका भविष्य अनिश्चित था। यह घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बनी। लोगों ने रजनी और शाहरुख की निंदा की और इस बात पर सवाल उठाए कि कैसे एक परिवार इतना बर्बाद हो सकता है।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि विश्वासघात और लालच किसी भी रिश्ते को तबाह कर सकते हैं। साथ ही यह भी कि अपराध के अंजाम कितने भयानक होते हैं, खासकर जब परिवार के अंदर ही कोई ऐसा कदम उठाता है। न्याय व्यवस्था ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की, लेकिन खोई हुई जिंदगी और टूटे हुए परिवार की भरपाई मुश्किल थी।

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