जब इंटरव्यू में मिली गर्भवती पत्नी और तलाकशुदा पति: एक नई शुरुआत
दिल्ली की एक बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग में सुबह-सुबह हलचल थी। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। उसी भीड़ में एक महिला थी, जिसका नाम था आशा। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। उसके हाथों में एक बायोडाटा था, जो बार-बार कांप रहा था। पेट में पल रहा बच्चा और दिल में बसी बेचैनी उसे लगातार परेशान कर रही थी। आशा को नौकरी की सख्त जरूरत थी। उसके पास कोई और रास्ता नहीं था।
आशा धीरे-धीरे इंटरव्यू रूम की तरफ बढ़ी। दरवाजा खोला और सामने देखा तो एक शख्स सूट-बूट में बैठा था, उसकी नजरें बायोडाटा पर थीं। आशा ने डरते-डरते अपनी फाइल उसे थमाई। इंटरव्यूअर ने बायोडाटा पर नजर डाली और फिर उसकी तरफ देखा।
“नाम?” उसने पूछा।
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“आशा… आशा सिंह,” आशा ने धीरे से जवाब दिया।
इतना सुनते ही इंटरव्यूअर के हाथ रुक गए। उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। वह बायोडाटा पर लिखे नाम को बार-बार देखने लगा। जैसे कोई पुरानी यादें उसके सामने आ गई हों। आशा भी उसकी तरफ देखने लगी। उसकी आंखों में आंसू थे। वह पहचान चुकी थी कि सामने बैठा शख्स कोई और नहीं, बल्कि उसका तलाकशुदा पति राहुल है। दो साल पहले दोनों अलग हो गए थे। तलाक उनके जीवन की सबसे बड़ी चोट बन गया था।

राहुल ने आशा की तरफ देखा और उसकी नजर उसके पेट पर पड़ी। उसकी सांसें तेज हो गईं। “यह… यह क्या है आशा?” उसकी आवाज में दर्द और हैरानी थी।
आशा ने आंखें झुका लीं। “यह… हमारा बच्चा है, राहुल। जिस दिन तुम मुझे छोड़कर गए थे, उसी दिन मुझे पता चला था।”
राहुल की दुनिया एक पल में बदल गई। उसने कुर्सी से उठकर कमरे में टहलना शुरू कर दिया। उसके अंदर सालों पुराना दर्द फिर से जाग गया। उसने खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन आंखों से आंसू निकल आए।
“तुमने मुझसे छुपाया, आशा?” राहुल ने कांपती आवाज में पूछा। “क्या तुम जानती हो, मैंने क्या झेला है? हर रात तुम्हारे बारे में सोचता था। तुम्हारी यादें मुझे चैन नहीं लेने देती थीं।”
आशा ने आंसू पोंछे। “राहुल, मैं मजबूर थी। तुम्हारे जाने के बाद मुझे लगा कि मैं अकेली सब कुछ संभाल सकती हूं। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। इस बच्चे के लिए मुझे नौकरी चाहिए।”
राहुल ने गहरी सांस ली और अपनी भावनाओं को काबू किया। “तो अब तुम नौकरी मांगने आई हो? क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें नौकरी दूंगा? क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें इतनी आसानी से जाने दूंगा?”
आशा के दिल में उम्मीद की किरण जगी। राहुल ने अपनी आंखें बंद कीं और फिर कहा, “नहीं आशा, तुम्हें नौकरी नहीं मिलेगी। लेकिन तुम्हारा पति तुम्हें वापस ले जाएगा।”
आशा ने हैरान होकर उसकी तरफ देखा। “राहुल, क्या कह रहे हो?”
राहुल की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “यह हमारा बच्चा है, आशा। इसे परिवार चाहिए। मैं तुम्हें और इस बच्चे को अकेला नहीं छोड़ सकता। एक बार गलती कर चुका हूं, दोबारा नहीं करूंगा।”
आशा की आंखों से आंसू बहने लगे। वह राहुल की तरफ बढ़ी। राहुल ने उसे गले लगा लिया। दोनों का मिलन एक बार फिर हुआ, लेकिन इस बार उनके बीच कोई कड़वाहट नहीं थी, बल्कि एक नई शुरुआत की उम्मीद थी।
उस दिन इंटरव्यू खत्म नहीं हुआ, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। उस कमरे में सिर्फ एक नौकरी का आवेदन पत्र नहीं था, बल्कि दो टूटे हुए दिलों को जोड़ने का एक मौका था। और उस बायोडाटा पर लिखी कहानी ने सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक परिवार को वापस लाने का काम किया।
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