Jab Bahu Ko Faalij Hua To Saas Ne Aisa Qadam Uthaya

शीसब्र और मोहब्बत की मिसाल – मरियम की कहानी

यह कहानी एक साधारण लड़की मरियम और उसके पति अहमद की है, जिनकी जिंदगी में दुख, दर्द, मोहब्बत और सब्र के कई रंग हैं। यह कहानी हमें बताती है कि कैसे मुश्किल हालात में इंसान का सब्र और ईमानदारी उसे हारने नहीं देती, और कैसे लालच व खुदगर्जी रिश्तों को बर्बाद कर देती है।

पहला भाग: अहमद और मरियम की मुलाकात

अहमद पाकिस्तान के एक छोटे से शहर में रहता था। बचपन में ही उसके पिता का इंतकाल हो गया था, और घर की सारी जिम्मेदारियां उसके कंधों पर आ गई थीं। अहमद मेहनती था, मगर घर के खर्चे बढ़ते जा रहे थे। उसने सोचा कि अगर वह पाकिस्तान में ही रहा, तो परिवार की जरूरतें पूरी नहीं होंगी। इसलिए उसने विदेश जाने का फैसला किया।

कुछ साल बाद अहमद अपनी बहन की शादी के लिए पाकिस्तान लौटा। शादी के बाद एक दिन वह छत पर बैठा था, तभी उसकी नजर पड़ोस की लड़की मरियम पर पड़ी, जो कपड़े सुखा रही थी। मरियम बहुत मासूम और सादगी पसंद थी। उसके माता-पिता बचपन में ही गुजर चुके थे और वह अपने चाचा-चाची के साथ रहती थी। अहमद की दिल में उसके लिए मोहब्बत जाग उठी। कुछ समय बाद अहमद ने अपनी मां से मरियम से शादी की इच्छा जताई। मां ने पहले इंकार किया, मगर अहमद की जिद के आगे झुक गई। अहमद और मरियम की शादी हो गई।

शादी के बाद दोनों बहुत खुश थे। मरियम की मासूमियत और नेक दिल रवैया ने अहमद का दिल जीत लिया। मगर अहमद की मां उनकी खुशियों से जलती थी। वह हमेशा मरियम को ताने देती और उसकी छोटी-छोटी गलतियों को बड़ा बना देती। लेकिन अहमद और मरियम ने हर मुश्किल को मिलकर पार किया।

दूसरा भाग: मुश्किलों की शुरुआत

पांच साल बाद, अहमद और मरियम के घर दो प्यारी बेटियों ने जन्म लिया। अहमद अपनी बेटियों और बीवी के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहा था। मगर घर के खर्चे बढ़ने लगे, इसलिए अहमद फिर से विदेश चला गया। मरियम बेटियों के साथ घर पर रही। अहमद ने हर महीने पैसे भेजने शुरू किए ताकि घरवालों को कोई परेशानी न हो।

एक दिन अचानक मरियम को तेज बुखार और कमजोरी महसूस हुई। उसकी हालत बहुत खराब हो गई। अहमद की मां ने बेटे को फोन किया और बताया कि मरियम की हालत बहुत खराब है। अहमद परेशान हो गया और मां से कहा कि वह मरियम का अच्छे से इलाज करवाए, जितना भी खर्च आएगा, वह भेज देगा।

मगर अहमद की मां ने पैसे अपने ऐशो-आराम और बेटियों पर खर्च कर दिए। मरियम को स्टोर रूम में बंद कर दिया गया, जहां उसकी छोटी बेटियां ही उसका ख्याल रखती थीं। खाना कम मिलता, दवाएं नहीं दी जातीं। अहमद को हर बार झूठी रिपोर्ट्स भेजी जातीं, ताकि उसे लगे कि मरियम का इलाज हो रहा है।

तीसरा भाग: जुल्म की इंतहा और अहमद की वापसी

अहमद दिन-रात मेहनत करता रहा, डबल शिफ्ट लगाता रहा, ताकि ज्यादा पैसे भेज सके। मगर उसे नहीं पता था कि उसकी मां और बहनें मरियम का इलाज नहीं करवा रहीं, बल्कि पैसे अपनी मौज-मस्ती में उड़ा रही हैं। मरियम की हालत दिन-ब-दिन खराब होती गई। उसकी बेटियों ने भी कई बार भूखे पेट रात गुजारी।

एक दिन छोटी बेटी ने अहमद को फोन कर रोते हुए बताया कि दादी और फूफी कह रही हैं कि वह अम्मी को मार देंगी। अहमद के पैरों तले जमीन निकल गई। उसने फौरन पाकिस्तान आने का फैसला किया।

जब अहमद अचानक घर पहुंचा, तो उसने देखा कि उसकी मां और बहन मरियम को मारने की कोशिश कर रही थीं। अहमद ने उन्हें रोक लिया और मरियम को अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने बताया कि अगर सही वक्त पर इलाज होता, तो मरियम जल्दी ठीक हो जाती। अहमद ने वादा किया कि वह अपनी बीवी का इलाज करवाएगा और उसकी हर जरूरत का ख्याल रखेगा।

चौथा भाग: सब्र, मोहब्बत और इंसाफ

अहमद ने अपनी मां और बहन को घर से अलग कर दिया। बहन अपने ससुराल चली गई और मां अलग रहने लगी। अहमद ने मरियम का इलाज करवाया और दो साल में वह फिर से स्वस्थ हो गई। मरियम ने घर के कामकाज संभाल लिए और बेटियों की परवरिश में जुट गई।

अहमद ने महसूस किया कि उसने अपनी बीवी और बच्चों को अपनी मां और बहनों के हवाले छोड़कर बहुत बड़ी गलती की थी। अब वह खुद उनकी जिम्मेदारी निभाने लगा। मरियम ने भी अपने बच्चों को सब्र, मोहब्बत और इंसाफ का पाठ पढ़ाया।

अंतिम भाग: कहानी का सबक

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जिंदगी में सब्र और ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत है। मुश्किल हालात में अपने फरायज और जिम्मेदारियां निभाना ही इंसान की असली पहचान है। लालच, खुदगर्जी और हसद इंसान को बर्बाद कर देती है। रिश्तों में मोहब्बत, इंसाफ और ताबुन होना चाहिए।

अगर अहमद ने वक्त रहते सही फैसला न लिया होता, तो मरियम और उसकी बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती। मगर सब्र, मोहब्बत और इंसाफ की वजह से वह अपने परिवार को बचा सका। हमें भी चाहिए कि अपने रिश्तों की कदर करें, दूसरों के साथ इंसाफ करें और मुश्किलों में सब्र से काम लें।

समाप्त