तीन बहनें, एक पत्नी और वह एक फैसला जिसने पूरी ज़िंदगी उजाड़ दी | कमलाकांत शाह मामले की कहानी

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तीन बहनें, एक पत्नी और वो एक फैसला जिसने पूरी जिंदगी उजाड़ दी

प्रस्तावना

मुंबई के सांताक्रूज उपनगर की गणेश कृपा सहकारी आवास सोसाइटी की इमारत में शाह परिवार रहता था। एक संपन्न, शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार, जिसकी खुशियाँ बाहर से देखने पर किसी स्वर्ग से कम नहीं थीं। लेकिन उनके घर की चारदीवारी के भीतर एक ऐसी कहानी पनप रही थी, जो इंसानियत, रिश्तों और विश्वास को तार-तार कर देने वाली थी।

कमलकांत शाह, कपड़ों के कारोबार में सफल, अपने परिवार के लिए समर्पित, जिम्मेदार और संवेदनशील व्यक्ति थे। उनकी पत्नी काजल शाह (जिसे कुछ लोग कविता के नाम से भी जानते थे), तीन बहनें, एक बेटा, एक बेटी और उनकी बुजुर्ग मां सरला देवी – यही उनका परिवार था।

परिवार की मजबूती और दरार

कमलकांत का बचपन संघर्षों से भरा था। पिता की मौत के बाद उन्होंने ही घर की जिम्मेदारी उठाई, बहनों को पढ़ाया-लिखाया, मां का ख्याल रखा और कारोबार जमाया। तीनों बहनों की शादी कराई, बेटा-बेटी को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया। घर में सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे रिश्तों में दरारें आने लगीं।

काजल और कमलकांत के बीच पिछले कुछ सालों से तनाव था। काजल अक्सर मायके चली जाती, बच्चों को लेकर महीनों गायब रहती, और जब लौटती तो घर में अजनबी सी लगती। बहनों को भी काजल का व्यवहार खटकता था। सरला देवी से उसकी बिल्कुल नहीं बनती थी। परिवार के लोग बार-बार समझाते, लेकिन काजल के मन में कुछ और ही चल रहा था।

अचानक मौतें और रहस्य

अगस्त 2022 में सरला देवी की अचानक मौत हो गई। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं, लेकिन उनकी बीमारी का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिला। डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए। परिवार ने दुखी मन से अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन मां की मौत के बाद कमलकांत की तबीयत भी बिगड़ने लगी।

शुरुआत पेट दर्द से हुई, फिर जोड़ों में दर्द, बाल झड़ना, कमजोरी – ये सब लक्षण थे, लेकिन कोई बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। घरेलू इलाज, डॉक्टर, अस्पताल – सब बेकार। आखिरकार डॉक्टरों ने हैवी मेटल टेस्ट कराया, जिसमें कमलकांत के शरीर में दो जानलेवा जहर पाए गए। डॉक्टरों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही दिनों में कमलकांत की भी मौत हो गई।

जांच और साजिश का खुलासा

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वही धीमा जहर मिला, जो सरला देवी की मौत का कारण था। अब शक गहराने लगा – क्या यह हादसा था या सुनियोजित साजिश?

परिवार के बाकी सदस्यों की जांच हुई। काजल की रिपोर्ट में भी वही जहर मिला, लेकिन कम मात्रा में। पुलिस ने कमलकांत की बहनों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि मां की मौत के बाद से काजल का व्यवहार बदल गया था। वह खाना खुद बनाती, दूध-पानी खुद देती, और घर की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले चुकी थी। बहनों को शक था कि मां और भाई की तबीयत बिगड़ने की वजह काजल ही है।

रिश्तों की परतें और एक नया किरदार

पुलिस ने काजल का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाला। उसमें एक नाम बार-बार सामने आया – हितेश जैन। हितेश, कमलकांत का बचपन का दोस्त, कपड़ों के कारोबार में उसका पार्टनर, परिवार का करीबी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि काजल भी हितेश से घंटों बात करती थी, व्हाट्सएप पर चैटिंग होती थी। पुलिस को शक हुआ कि काजल और हितेश के बीच सिर्फ दोस्ती नहीं, कुछ और भी था।

पूछताछ में काजल ने कबूल किया कि वह हितेश से प्यार करती थी। शादी के बाद कमलकांत से रिश्ते में दरार आई, तो हितेश उसका सहारा बन गया। दोस्ती, हमदर्दी, फिर इश्क – और आखिरकार दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए। कमलकांत ने उन्हें आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ लिया था। इसके बाद ही काजल मायके चली गई थी।

साजिश की शुरुआत

काजल ने हितेश के साथ मिलकर एक खतरनाक फैसला लिया – पति और उसकी मां को रास्ते से हटाना। मकसद था करोड़ों की संपत्ति, बीमा, और कंपनी में हिस्सेदारी। तलाक लेने से उसे कुछ नहीं मिलता, लेकिन अगर पति और मां दोनों मर जाएं तो सबकुछ उसके नाम हो जाता।

हितेश ने एक फर्जी कंपनी बनाई, जहरीली धातुएं मंगवाईं, जो आम दुकानों में नहीं मिलतीं। काजल ने खाना, दूध, पानी में धीमा जहर मिलाना शुरू किया। सरला देवी बीमार हो गईं, अस्पताल में भर्ती हुईं और मौत हो गई। कमलकांत को भी धीरे-धीरे जहर दिया जाने लगा। वह भी बीमार हुआ, अस्पताल गया, और आखिरकार उसकी भी मौत हो गई।

सबूत मिटाने की कोशिश

काजल ने खुद भी बहुत कम मात्रा में वही जहर लिया, ताकि रिपोर्ट में दिखे कि वह भी बीमार है। हितेश ने सबूत मिटाने की कोशिश की – फोन, लैपटॉप क्लीन किए, अपहरण की झूठी कहानी बनाई। लेकिन पुलिस ने सर्च हिस्ट्री, चैटिंग रिकॉर्ड, होटल के वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट – सब इकट्ठा कर लिए।

कोर्ट में लड़ाई और भावनात्मक अपील

मई 2024 में केस शुरू हुआ। काजल ने जमानत की अर्जी लगाई। कोर्ट में जब सारे सबूत रखे गए, तो जमानत खारिज हो गई। लेकिन काजल ने भावनात्मक अपील की – “मैं मां हूँ, मेरे बच्चे अकेले हैं।” अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ा और सितंबर 2024 में कोर्ट ने काजल को जमानत दे दी।

रिश्तों का सच और सबसे बड़ा धोखा

कमलकांत ने हमेशा काजल का साथ दिया, उसका सम्मान किया, लेकिन वही पत्नी उसकी सबसे बड़ी सजा बन गई। तीन बहनों ने भाई को खोया, परिवार उजड़ गया। हितेश, जो दोस्त था, वह भी विश्वासघात कर गया। काजल का लालच, हितेश की चालाकी और एक फैसले ने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया।

समाज के लिए संदेश

इस कहानी से यही सबक मिलता है कि रिश्तों में प्यार, विश्वास और इंसानियत सबसे जरूरी है। अगर नैतिकता, सहानुभूति और इंसानियत न हो, तो इंसान कितना भी पढ़ा-लिखा, समझदार या अमीर हो, वह दूसरों के लिए खतरा बन सकता है। सबसे बड़ा धोखा वही होता है जो अपने ही घर से मिलता है।

निष्कर्ष

तीन बहनें, एक पत्नी और एक फैसला – यही कहानी है शाह परिवार की। अगर लालच, स्वार्थ और धोखे की जगह रिश्तों में प्यार और समझदारी होती, तो शायद यह परिवार आज भी खुशहाल होता। रिश्तों को जहर से नहीं, प्यार से सींचें। इंसानियत और नैतिकता को कभी न भूलें।