JNU Anti Modi Shah Slogans: नारेबाजी पर Umar Khalid के पिता क्या बोले, Kanhaiya Kumar का जिक्र

JNU में मोदी-शाह विरोधी नारेबाजी: उमर खालिद के पिता का बयान और कन्हैया कुमार का जिक्र

दिल्ली की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर चर्चाओं में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के बाद JNU कैंपस में मोदी और अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा में है। इसी घटनाक्रम पर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियासी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उमर खालिद के पिता का बयान

उमर खालिद के पिता ने कहा कि यह सिर्फ नारे थे, कोई आधिकारिक बयान नहीं। उन्होंने छात्रों के गुस्से को सामान्य विरोध बताया और कहा कि आजकल विरोध करने या नारे लगाने वालों पर एफआईआर दर्ज हो जाती है, जबकि गंभीर अपराधियों को जमानत मिल जाती है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट से उमर और शरजील को जमानत न मिलना एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी कहा कि उमर खालिद और कन्हैया कुमार दोनों 2016 की एफआईआर में आरोपी बनाए गए थे, लेकिन कन्हैया कुमार अब खुद को इस मामले से दूर रखते हैं। उन्होंने कन्हैया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दबाव के चलते वह अब इस मुद्दे पर बोलने से बच रहे हैं।

कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया

उमर खालिद के पिता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि सबूतों की कमी और दंगों के वक्त उमर की गैरमौजूदगी के बावजूद जमानत नहीं दी गई, जबकि उसी एफआईआर में शामिल कुछ अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई। उनका कहना है कि उमर पांच साल से जेल में हैं और मुकदमा भी शुरू नहीं हुआ। अब फिर से अपील करने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा।

उन्होंने कहा,
“हमारे बेटे के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, फिर भी उसे बिना मुकदमे के सालों से जेल में रखा गया है। यह हमारे लिए अन्याय है।”

कन्हैया कुमार का जिक्र

उमर खालिद के पिता ने कन्हैया कुमार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कन्हैया और उमर दोनों सहपाठी थे और दोनों पर 2016 में केस दर्ज हुआ था, लेकिन कन्हैया अब राजनेता हैं और कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं, इसलिए वह खुद को इस मुद्दे से दूर रख रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“कन्हैया की राजनीतिक मजबूरियां उनके पैरों की बेड़ियां बन गई हैं। वे अब अपने राजनीतिक हितों को ज्यादा महत्व देते हैं।”

कोर्ट से चार आरोपियों को रिहाई

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने हाल ही में चार आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान और मोहम्मद सलीम खान—को सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने कहा कि इनकी भूमिका सीमित थी, इसलिए इन्हें कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी गई। रिहाई के बाद जेल के बाहर उनके समर्थकों और परिवारजनों ने जश्न मनाया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं। वहीं, गुलफिशा फातिमा के मामले में कोर्ट ने माना कि उनकी भूमिका सीमित थी, इसलिए जमानत दी जा सकती है।

दिल्ली दंगे: पृष्ठभूमि

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में कुल 20 आरोपी थे, जिनमें से कई को जमानत मिल चुकी है, जबकि कुछ अभी भी जेल में हैं।

राजनीतिक नैरेटिव पर प्रतिक्रिया

उमर खालिद के पिता ने ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’, ‘लुटियंस गैंग’, ‘खान मार्केट गैंग’ जैसे शब्दों की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक द्वेष फैलाने के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा,
“जनता सब समझती है, नकारात्मक राजनीति और शत्रु बनाने की प्रवृत्ति गलत है। गणतंत्र की अस्मिता यही है कि राजनीति प्रतिद्वंदी हो सकती है, लेकिन शत्रु बनाने का नैरेटिव गलत है।”

निष्कर्ष:
JNU में नारेबाजी और दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत को लेकर बहस तेज है। उमर खालिद के पिता ने इसे न्यायिक अन्याय और राजनीतिक साजिश बताया है, वहीं कन्हैया कुमार की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। कोर्ट के ताजा फैसलों ने इन मामलों को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।