पति को ‘गार्ड’ समझकर किया अपमान, वो शहर का सबसे बड़ा अफसर निकला! 😱

**रोहन और काजल: एक अंडरकवर हीरो की कहानी**

बनारस के एक पुराने मोहल्ले में शाम का धुंधलका छा रहा था। यह शहर अपनी गंगा आरती के लिए मशहूर था, लेकिन शर्मा सदन के छोटे से किराए के मकान में उस दिन आरती नहीं, बल्कि क्लेश का शोर गूंज रहा था। कमरे के कोने में बैठी काजल सुबक रही थी। उसके सामने जमीन पर टूटी हुई चूड़ियां बिखरी थीं, जो उसने गुस्से में तोड़ी थीं। दरवाजे पर खड़ा था रोहन—32 साल का एक साधारण सा आदमी, जिसने नीली वर्दी पहन रखी थी जिस पर लिखा था “नाइट वॉच सिक्योरिटी”।

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उसके कंधे झुके हुए थे, चेहरा उतरा हुआ था और हाथ में सब्जी का थैला था। देखने में वह दुनिया का सबसे साधारण इंसान लगता था। एक ऐसा आदमी जिसे कोई दूसरी बार मुड़कर ना देखे। लेकिन उस दिन, काजल का सब्र टूट गया।

“कब तक, रोहन? आखिर कब तक?” काजल ने चीखते हुए कहा। उसकी आवाज में दर्द और गुस्सा दोनों थे। “आज मेरी बुआ आई थीं। उन्होंने पूछा तुम्हारा पति क्या करता है। मुझे झूठ बोलना पड़ा कि तुम बैंक में क्लर्क हो। मुझे शर्म आती है यह बताने में कि मेरा पति रातभर दूसरों के घरों के बाहर डंडा लेकर पहरा देता है।”

रोहन ने चुपचाप सब्जी का थैला मेज पर रखा। उसने अपनी टोपी उतारी और शांत आवाज में कहा, “काजल, काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। मैं चोरी नहीं करता। मेहनत की रोटी लाता हूं।”

लेकिन काजल का गुस्सा कम नहीं हुआ। उसने ताना मारा, “मेहनत की रोटी? मेरे बहन के पति को देखो। उनके पास कार है, बंगला है। और हमारे पास क्या है? यह टूटा हुआ मकान और तुम्हारी ₹1,000 की नौकरी। मैंने तुमसे शादी करके अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली।”

रोहन के दिल पर जैसे किसी ने पत्थर रख दिया। वह चाहता तो काजल को बता सकता था कि वह कोई मामूली गार्ड नहीं, बल्कि भारत सरकार के खुफिया विभाग *इंटेलिजेंस ब्यूरो* का सीनियर ऑफिसर है। लेकिन देश की सुरक्षा और काजल की जान की हिफाजत के लिए उसे यह कड़वा घूंट पीना पड़ रहा था।

**सच छुपाने का बोझ**

अगले दिन, काजल के कजिन की शादी थी। उसने रोहन से साफ कह दिया, “अगर मेरी बेइज्जती नहीं करानी है, तो मत आना। मैं अकेली चली जाऊंगी।”

शाम को ग्रैंड होटल रोशनी से जगमगा रहा था। काजल ने अपनी सबसे भारी साड़ी पहनी थी ताकि गरीबी छिपा सके। वह रिश्तेदारों के बीच बैठी थी, लेकिन उसका ध्यान बार-बार दरवाजे पर जा रहा था। तभी उसके मामा जी, मिस्टर वर्मा, जोर से हंसते हुए बोले, “काजल बेटा, सुना है तेरे पतिदेव नहीं आए। क्या हुआ? आज नाइट शिफ्ट है या फिर यहां के गार्ड्स में शामिल होकर गेट पर खड़े हैं?”

सब लोग हंसने लगे। काजल का चेहरा शर्म से लाल हो गया। तभी दरवाजे से रोहन अंदर आया। उसने कोई सूट नहीं पहना था, बल्कि एक साधारण सफेद शर्ट और पैंट पहने हुए था।

मिस्टर वर्मा ने व्यंग्य किया, “लो भाई, आ गया हमारा हीरो। क्यों रोहन, गेट पर एंट्री रजिस्टर करवा के आए हो ना?”

काजल ने रोहन की तरफ देखा। उसकी नजरों में शिकायत थी।

रोहन चुपचाप काजल के पास आया और उसकी हथेली पर एक छोटी सी डिब्बी रख दी। “सालगिरह मुबारक हो, काजल। कल देना भूल गया था,” उसने धीमे से कहा।

काजल सन्न रह गई। उसने डिब्बी खोली। उसमें एक नाजुक सोने की चेन थी, जो रोहन ने अपनी कई महीनों की तनख्वाह से खरीदी थी।

**अचानक बदली परिस्थिति**

तभी होटल की बत्तियां बुझ गईं। हॉल में अंधेरा छा गया और अफरातफरी मच गई। जब लाइट वापस आई, तो स्टेज पर चार नकाबपोश खड़े थे। उनका लीडर चिल्लाया, “कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा। सब अपने फोन और गहने बैग में डाल दो। जल्दी!”

हॉल में डर का माहौल था। काजल डर के मारे रोहन से चिपक गई। “यह लोग कौन हैं? अब क्या होगा?”

रोहन ने काजल का हाथ कसकर पकड़ा। “जब तक मैं यहां हूं, तुम्हें कुछ नहीं होगा,” उसने कहा।

लेकिन अचानक रोहन ने काजल का हाथ छोड़ा और कहा, “मैं बाथरूम जा रहा हूं। यहीं रहना।”

काजल को यकीन नहीं हुआ। “इस वक्त तुम मुझे छोड़कर छिपने जा रहे हो? कायर कहीं के!”

रोहन ने कोई जवाब नहीं दिया और भीड़ में गायब हो गया।

**रोहन का असली रूप**

हॉल के बाहर, रोहन का एक अलग ही रूप जाग चुका था। वह अब कोई साधारण गार्ड नहीं था। उसने अपने ब्लूटूथ डिवाइस को ऑन किया और कहा, “कंट्रोल, यह ईगल है। होटल में छह घुसपैठिए हैं। मैं इसे हैंडल कर रहा हूं। पुलिस को बाहर ही रहने दो।”

अंदर, रोहन ने चालाकी से लाइट्स फ्लक्चुएट कीं और अपराधियों को अलग-अलग करके बेहोश कर दिया। कुछ ही मिनटों में, उसने चार अपराधियों को निहत्था कर दिया।

जब धुआं छंटा, तो हॉल में सिर्फ लीडर बचा था। रोहन ने उसे भी काबू में कर लिया। तभी पुलिस कमिश्नर अंदर आए और रोहन को सैल्यूट किया। “जय हिंद, सर। आपने अकेले ही स्थिति संभाल ली। हमें हेडक्वार्टर से खबर मिल गई थी कि *एजेंट डेल्टा* यहां मौजूद है।”

**सच का सामना**

काजल सन्न रह गई। घर पहुंचने के बाद उसने रोहन से पूछा, “कौन हो तुम? तुमने मुझसे इतना बड़ा सच क्यों छिपाया?”

रोहन ने अपनी असली पहचान बताई। “मैं एक गार्ड नहीं हूं, काजल। मैं *इंटेलिजेंस ब्यूरो* का सीनियर ऑफिसर हूं। मैंने यह सब तुम्हारी सुरक्षा के लिए किया। अगर दुश्मनों को पता चलता कि मैं कौन हूं, तो सबसे पहले तुम्हें निशाना बनाया जाता।”

काजल की आंखों में आंसू थे। उसने रोहन से माफी मांगी। “मैंने तुम्हें कितना जलील किया। तुम्हारी वर्दी को शर्मिंदगी समझा, जबकि वही वर्दी मेरा कवच थी।”

रोहन ने उसे सांत्वना दी। “गलती तुम्हारी नहीं, हालात की थी। लेकिन अब मेरा मिशन पूरा हो चुका है। अब हमें छिपने की जरूरत नहीं है।”

**एक नई शुरुआत**

अगले दिन, रोहन ने अपनी असली अफसर की वर्दी पहनी। मोहल्ले के लोग, जो उसे चौकीदार समझते थे, हैरान रह गए। काजल ने गर्व से उसका हाथ थाम रखा था।

रोहन ने मिस्टर वर्मा से कहा, “इंसान की पहचान उसके पद या पैसे से नहीं, उसके कर्म से होती है। जब मैं गार्ड था, तब भी मैं वही इंसान था जो आज हूं। फर्क सिर्फ आपकी नजरों में आया है।”

गाड़ी में बैठते वक्त काजल ने पूछा, “अब हम कहां जा रहे हैं?”

रोहन मुस्कुराया। “नई शुरुआत की तरफ।”

गाड़ी धूल उड़ाती हुई आगे बढ़ गई, लेकिन पीछे एक बड़ा सबक छोड़ गई—कभी भी किसी को उसके काम या कपड़ों से जज मत करो।

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