विदेशी पर्यटक शातिर महिला के जाल में फंसा टेक्सी ड्राइवर , फिर उसने जो किया देख कर सभी के होश उड़ गए
दिल्ली की गलियों में गुनाह का जाल: मनोज की कहानी
दिल्ली, सपनों का शहर। यहाँ की चौड़ी सड़कों पर जहाँ लाखों की गाड़ियाँ दौड़ती हैं, उन्हीं सड़कों के किनारे तंग गलियों में करोड़ों बदनसीब जिंदगियाँ भी सिसकती हैं। इन्हीं में से एक गली थी उत्तम नगर की, जहाँ मनोज अपने परिवार के साथ रहता था। मनोज कोई आम टैक्सी ड्राइवर नहीं था। उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एमए किया था। उसकी आँखों में कभी एक प्रोफेसर बनने का सपना था, लेकिन किस्मत ने उसे गरीबी और जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा दिया।
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पिता की अचानक मौत के बाद घर की सारी जमा पूँजी इलाज में खत्म हो गई, और सिर पर कर्ज का भारी बोझ था। नौकरी के लिए दर-दर भटकने के बाद भी मनोज को हर जगह से निराशा ही मिली। आखिरकार, उसने अपनी डिग्रियाँ पुराने संदूक में बंद कर दी और एक पुरानी टैक्सी किराए पर ले ली। दिन-रात मेहनत के बाद भी उसकी जिंदगी में कुछ नहीं बदलता था। घर की तंग गलियों, सीलन भरी दीवारें और बीमार माँ-बेहनों की जिम्मेदारी ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया था।
एक दिन, मनोज की टैक्सी में एक खूबसूरत अमेरिकी महिला, सुशान, बैठी। सुनहरे बाल, नीली आँखें और चेहरे पर ऐसी मुस्कान जो किसी को भी अपना बना ले। वह खुद को पर्यटक बता रही थी, भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता समझने आई थी। रास्ते में उसने मनोज की अंग्रेजी और पढ़ाई से प्रभावित होकर पूछा, “तुम जैसे पढ़े-लिखे लड़के टैक्सी क्यों चला रहे हो?” मनोज ने अपनी दुखभरी हकीकत सुशान को बता दी।
सुशान ने मनोज को दोस्ती, प्यार और दौलत का सपना दिखाया। उसने कहा, “अगर तुम मेरा साथ दो तो मैं तुम्हें हर महीने पाँच लाख रुपये दूँगी।” मनोज की आँखों में चमक आ गई। गरीबी और मजबूरी ने उसे शॉर्टकट अपनाने के लिए मजबूर कर दिया। वह नहीं जानता था कि सुशान एक अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम रैकेट की मास्टरमाइंड थी, जो भारत में अपना जाल फैलाने आई थी।
मनोज ने अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना कर दिया और सुशान के साथ मिलकर ठगी का साम्राज्य खड़ा किया। वे अमेरिका और यूरोप के बुजुर्गों को फोन करके लॉटरी, टैक्स, वायरस जैसे बहाने बनाकर लाखों डॉलर ठगते थे। पैसा अब पानी की तरह बहने लगा। मनोज की जिंदगी बदल गई—नई कार, बड़ा फ्लैट, माँ का इलाज, बहन की शादी। लेकिन यह सब झूठी कमाई थी।
एक दिन, गुरुग्राम की एक तेज-तर्रार सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंजलि शर्मा उनके जाल में फँस गई। पर अंजलि ने हार नहीं मानी। उसने दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल में शिकायत की, अपनी तकनीकी समझ से सारे सुराग ढूँढ निकाले। पुलिस ने मनोज और सुशान के फार्महाउस पर छापा मारा। सुशान तो खतरे की भनक लगते ही अमेरिका भाग गई, लेकिन मनोज पकड़ा गया।
जब पुलिस ने मनोज को गिरफ्तार किया, उसकी दुनिया एक पल में बिखर गई। माँ सदमे में, बहन समाज में शर्मसार। जिस दौलत के लिए उसने अपना जमीर बेचा था, वही उसके परिवार के लिए अपमान का कारण बन गई। कोर्ट में मनोज ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और उसे सख्त सजा मिली।
यह कहानी हमें सिखाती है कि शॉर्टकट और आसान पैसा का रास्ता हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। मेहनत का रास्ता भले ही लंबा हो, लेकिन उसी में सच्ची और स्थायी सफलता छुपी है।
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