Badshah Ne Apni Pyari Hafiz-e-Quran Beti Ki Shadi Andhay Faqeer Se Kar Di

“करमजली से रहमत तक: सब्र, मोहब्बत और तकदीर की कहानी”

भूमिका

प्यारे दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसी हैरान कर देने वाली कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे।
यह कहानी है मुल्क ऐशा के एक गांव के बादशाह की, उसकी हाफिज कुरान बेटी गुलराना की, और उस अंधे-लंगड़े फकीर की, जिससे गुलराना का निकाह कर दिया गया।
मगर इस कहानी में सिर्फ जुल्म, दर्द और जिल्लत नहीं है—यह कहानी है सब्र, नेकनीयती, अल्लाह के करम और इंसानियत की।

बादशाह की सल्तनत और पहली बीवी

मुल्क ऐशा के उस गांव में बादशाह अपनी नेक बीवी के साथ रहता था।
बादशाह की जमीनें दूर-दूर तक फैली थीं। उसकी बीवी बहुत रहमदिल, परहेजगार और सबके साथ बराबर सलूक करने वाली थी।
बादशाह की महल की बूढ़ी नौकरानी अम्मा ज़ैनब को वह घर की बड़ी खातून समझती थी।
एक दिन बादशाह की बीवी ने ज़ैनब से कहा—”अम्मा, मैं अपनी औलाद को हाफिज कुरान बनाऊंगी। यह मेरी दिली ख्वाहिश है।”

खुशहाली से मातम तक

गांव में खुशहाली थी।
बादशाह और उसकी बीवी एक-दूसरे से बहुत मोहब्बत करते थे।
बीवी को सात महीने का गर्भ था।
सभी लोग आने वाली औलाद के इंतजार में थे।

फिर दो महीने बाद एक दिन ऐसा आया कि बादशाह की जिंदगी में अंधेरा छा गया।
बीवी ने एक खूबसूरत बेटी को जन्म दिया, मगर खुद दुनिया से रुख्सत हो गई।
बादशाह को अपनी बीवी की मौत का गहरा सदमा हुआ।
उसने बेटी को अपनी बीवी की मौत का जिम्मेदार मान लिया—”अगर यह पैदा न होती तो मेरी बीवी जिंदा होती।”

बादशाह ने बेटी की शक्ल तक नहीं देखी।
वह उससे नफरत करने लगा।
बेटी को अम्मा ज़ैनब के हवाले कर दिया गया।
अम्मा ज़ैनब प्यार से उसे “गुलेराना” कहती थी।
बादशाह उसे “करमजली” कहता था।

दूसरी शादी और सौतेली मां का जुल्म

लोगों ने बादशाह को समझाया, मगर उसका दिल न पिघला।
आखिरकार लोगों के मशवरे पर बादशाह ने दूसरी शादी कर ली।
मगर सौतेली मां ने गुलराना को कभी अपनी गोद में नहीं उठाया।
वह दिनभर बूढ़ी अम्मा ज़ैनब के पास ही रहती थी।

समय गुजरा, सौतेली मां ने भी एक बेटी को जन्म दिया—नूरजहां।
बादशाह और उसकी नई बीवी नूरजहां को बेहद प्यार करते थे।
गांव में मिठाई बांटी गई।
गुलेराना को पुराने कपड़े पहनाए जाते, तालीम से दूर रखा गया।
अम्मा ज़ैनब ने उसे मदरसे में कुरान की तालीम दिलाई।

गुलेराना सब्र करने वाली, नमाजी, तहज्जुद गुजार, हाफिजा-ए-कुरान बन गई।
वक्त के साथ दोनों बहनें जवान हो गईं—नूरजहां घमंडी, मगरूर; गुलराना नेक, सब्र करने वाली।

शादी की तैयारी और जुल्म की इंतिहा

सौतेली मां ने कहा—”पहले करमजली की शादी कर दो, ताकि इसका साया हमारी बेटी की शादी पर न पड़े।”
बादशाह ने अपने वजीर और नौकरों को हुक्म दिया—”कोई अंधा, लंगड़ा, लावारिस लड़का तलाश करो।”

नौकरों ने एक दूसरे गांव में फकीर बुढ़िया और उसके अंधे बेटे को पाया।
बुढ़िया ने सोचा—”चलो, बेटे की शादी तो होगी। अमीर खानदान से रिश्ता जुड़ जाएगा।”
बादशाह ने गुलराना का निकाह उस अंधे फकीर से कर दिया।
दहेज में एक कपड़ा तक न दिया।
गुलेराना अपनी सास और अंधे शौहर के साथ टूटी-फूटी झोपड़ी में आ गई।

सब्र और नेकनीयती की मिसाल

गुलेराना ने झोपड़ी में वजू किया, नमाज पढ़ी, दुआ की—”या अल्लाह, मेरे शौहर का साथ कभी न छोड़ूंगी।”
वह सास और शौहर की खिदमत करती, खुद कम खाती, कभी शिकायत न करती।
सास उसकी नेकनीयती से खुश थी।
शौहर अंधा जरूर था, मगर बहुत मोहब्बत करने वाला था।

दूसरी तरफ नूरजहां की शादी एक शहजादे से धूमधाम से हुई।
दहेज में जेवर, गाड़ियां, ऊंट, खजाना, बड़ा घर, हाथी-घोड़े मिले।
नूरजहां ससुराल में महारानी की तरह राज करने लगी।
गुलेराना अपनी सास से कहती—”अम्मा, हमें मेहनत-मजदूरी करनी चाहिए। भीख मांगना अच्छा नहीं लगता।”

मेहनत और बरकत

गुलेराना ने भीख के पैसों से फल खरीदे—आम और अनार।
रास्ते में बैठकर बेचने लगी।
लोगों को उसके फल पसंद आए।
सिर्फ दो आम और दो अनार बचे थे।

तभी अल्लाह वाले बुजुर्ग और उनकी बूढ़ी बीवी आए।
बूढ़ी ने आम खाने की फरमाइश की, मगर पैसे नहीं थे।
गुलेराना ने उन्हें पानी पिलाया, आम काटकर दिए, पैर दबाए।
बुढ़िया ने कहा—”बेटी, हमारे पास देने को कुछ नहीं, मगर दुआएं दे सकते हैं।”
बुजुर्ग ने चंद कंकर दिए और खूब दुआएं दीं।

गुलेराना ने कंकर झोपड़ी के चारों कोनों में रख दिए।
अगली सुबह देखा—झोपड़ी की जगह खूबसूरत महल, चारों तरफ हीरे-मोती, आला किस्म का खाना।
शौहर की आंखें ठीक हो गईं, अब वह अंधा नहीं रहा।

अल्लाह का करम और गांव में खुशहाली

गुलेराना ने गांव में कुरान खवानी रखी, गरीब बच्चों में खाना बांटा, मां-बाप और बहन को भी बुलाया।
मां-बाप को कोढ़ की बीमारी लग चुकी थी, गरीबी आ चुकी थी।
जब वे गुलराना के महलनुमा घर आए, तो शर्म से सिर झुका लिया।
बाप ने सोचा—”मैंने अपनी बेटी को करमजली समझा, मगर अल्लाह ने उसकी तकदीर में रहमत लिख दी।”

नूरजहां अपनी बहन की दौलत देखकर जलने लगी।
उसने भी आम-अनार बेचने की कोशिश की, मगर बुजुर्ग को ताने मारे, फल न दिए।
सुबह उठी तो महल की जगह बदबूदार झोपड़ी, चारों कोनों में कीड़े-मकोड़े।

सबक और माफी

नूरजहां ने अपनी बहन से आधी दौलत मांगी।
गुलेराना ने दे दी, मगर कुछ न कहा।
मां-बाप को घर में ले आई, खूब खिदमत की।
मां-बाप ने माफी मांगी—”बेटी, हमने तुझे करमजली समझा, तुझ पर जुल्म किए।”

गुलेराना ने कहा—”अब्बा जान, आज मुझे मालूम हुआ है कि बाप की मोहब्बत क्या होती है।”

बाप ने अपनी जमीनें दामाद के हवाले कीं।
गांव वाले उसे “छोटा बादशाह” कहने लगे।
गुलेराना सब्र, नेकनीयती, मोहब्बत और अल्लाह के करम की मिसाल बन गई।

संदेश

प्यारे दोस्तों, अल्लाह जो चाहे सब कर सकता है।
ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी उसी के हाथ में है।
किसी को ऊस कहना गुनाह है।
अल्लाह ने हर इंसान की तकदीर में बेहतरी लिखी है।
सब्र, नेकनीयती और इंसानियत ही असली दौलत है।

समाप्त