Badshah ne Rajkumari ki Shaadi Andhe Fakir se Kyun Kar Di?

शहजादी रुक्सार और फकीर इब्राहिम की दास्तान

अध्याय 1: महल की रौनक और बेगम का आखिरी ख्वाब

प्राचीन काल की बात है, एक समृद्ध राज्य में सुल्तान अजीजुद्दीन का शासन था। सुल्तान के पास अपार धन-दौलत और हजारों एकड़ जमीन थी। उनकी प्रजा खुशहाल थी, क्योंकि सुल्तान एक न्यायप्रिय और दयालु शासक थे। उनकी बेगम फरीदा अपनी नेकी और रहमदिली के लिए पूरे राज्य में मशहूर थीं।

बेगम फरीदा जब गर्भवती हुईं, तो महल में खुशियों का ठिकाना न रहा। बेगम की खास देखभाल महल की सबसे पुरानी मुलाजिम बीबी ज़ैनब करती थीं, जिन्हें सब प्यार से ‘अम्मा ज़ैनब’ कहते थे। एक दोपहर, बेगम फरीदा ने अम्मा ज़ैनब से अपने दिल की बात कही, “अम्मा, मेरे घर जो भी औलाद आएगी, मैं उसे हाफिज़ा-ए-कुरान बनाऊंगी। मैं चाहती हूँ कि मेरी औलाद दुनियावी तालीम के साथ-साथ खुदा की तालीम में भी अव्वल हो।”

वक्त गुजरता गया और वह दिन आया जिसका सबको इंतजार था। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। बेगम फरीदा ने एक बेहद खूबसूरत शहजादी को जन्म दिया, जिसके चेहरे पर चांद जैसा नूर था। मगर शहजादी के दुनिया में आते ही बेगम फरीदा ने अपनी आखिरी सांस ली।

सुल्तान अजीजुद्दीन अपनी बीवी से बेपनाह मोहब्बत करते थे। बेगम की मौत ने उन्हें पत्थर बना दिया। सुल्तान ने अपनी नन्ही बेटी को गोद लेने के बजाय उससे नफरत करना शुरू कर दिया। वे कहते, “यह बच्ची मनहूस है, इसने आते ही अपनी मां को खा लिया।”

अध्याय 2: नफरत का साया और सौतेली मां का जुल्म

शहजादी का नाम अम्मा ज़ैनब ने ‘रुक्सार’ रखा। रुक्सार महल के एक कोने में अम्मा ज़ैनब की देखरेख में बड़ी होने लगी। सुल्तान ने कभी मुड़कर अपनी बेटी का हाल नहीं पूछा। कुछ समय बाद, राज्य की भलाई और बच्ची की देखभाल के नाम पर सुल्तान ने ‘मेहरूख’ नाम की एक सुंदर स्त्री से निकाह कर लिया।

मेहरूख देखने में तो सुंदर थी, मगर उसका दिल काला था। जब सुल्तान ही रुक्सार को नहीं चाहते थे, तो मेहरूख ने उसे अपनी दासी से भी बदतर समझना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद मेहरूख ने एक बेटी ‘नूरजहां’ को जन्म दिया। नूरजहां सुल्तान की लाडली बन गई। उसके लिए महलों में जश्न मनाए गए, मिठाइयां बांटी गईं, जबकि रुक्सार को नूरजहां के पुराने और उतरे हुए कपड़े पहनने पड़ते थे।

अम्मा ज़ैनब ने छिप-छिपकर रुक्सार को मदरसे भेजा। रुक्सार अपनी दिवंगत मां की इच्छा पूरी करते हुए हाफिज़ा-ए-कुरान बनी। वह पांच वक्त की नमाज पढ़ती और हर तहज्जुद में अपने पिता की मोहब्बत के लिए दुआ करती।

अध्याय 3: एक ज़ालिम बाप का फैसला

जब दोनों शहजादियां जवान हुईं, तो सुल्तान और मेहरूख ने उनकी शादियों का फैसला किया। मेहरूख ने सुल्तान के कान भरे, “हुजूर, यह रुक्सार मनहूस है। अगर इसकी शादी किसी अच्छे घर में की, तो यह उस घर को भी तबाह कर देगी। इसके लिए तो कोई अंधा, लंगड़ा फकीर ही ठीक रहेगा।”

नफरत में अंधे सुल्तान ने यही किया। उन्होंने अपने वजीरों को हुक्म दिया कि पूरे शहर में सबसे लाचार और गरीब फकीर ढूंढो। वजीरों को एक गांव में एक बुढ़िया मिली जो अपने अंधे बेटे ‘इब्राहिम’ के साथ भीख मांगती थी। सुल्तान ने बिना सोचे-समझे शहजादी रुक्सार का निकाह उस फकीर इब्राहिम से कर दिया।

निकाह के वक्त रुक्सार ने एक आंसू नहीं बहाया। उसने इसे खुदा की मर्जी मानकर स्वीकार कर लिया। अम्मा ज़ैनब ने रोते हुए उसे कुछ खाने का सामान और कपड़े दिए। रुक्सार अपने अंधे शौहर इब्राहिम और अपनी सास के साथ उनकी टूटी-फूटी झोपड़ी में चली गई।

अध्याय 4: झोपड़ी में जन्नत और सब्र का इम्तिहान

शहजादी रुक्सार, जो महलों में पली थी, अब एक ऐसी झोपड़ी में थी जहां बैठने को चटाई तक न थी। फर्श पर सूखी घास बिछी थी। लेकिन रुक्सार ने कभी शिकायत नहीं की। वह सुबह उठकर कुरान की तिलावत करती, जिससे झोपड़ी का कोना-कोना महक उठता।

उसने देखा कि उसकी सास और शौहर भीख मांगकर गुजारा करते हैं। रुक्सार का स्वाभिमान जाग उठा। उसने अपनी सास से कहा, “अम्मा, भीख मांगना बंद कीजिए। हम मेहनत करेंगे।” रुक्सार ने अपनी सास के जमा किए हुए चंद सिक्कों से मंडी से फल खरीदे और एक पेड़ के नीचे बैठकर बेचने लगी।

एक दिन, तपती दोपहर में एक बुजुर्ग जोड़ा उसके पास आया। वे बहुत भूखे और प्यासे थे। रुक्सार ने उन्हें पानी पिलाया और अपने बचे हुए फल उन्हें खिला दिए। वे बुजुर्ग असल में अल्लाह के नेक बंदे (वली) थे। उन्होंने रुक्सार की सेवा से खुश होकर उसे दुआएं दीं।

बुजुर्ग ने अपने झोले से कुछ कंकर निकाले और रुक्सार को देते हुए कहा, “बेटी, ये कंकर अपनी झोपड़ी के चारों कोनों में रख देना और कुछ अपने संदूक में रख लेना।”

अध्याय 5: खुदा का मोजज़ा और पलटती कहानी

रुक्सार ने वह कंकर घर लाकर इब्राहिम को दिखाए। इब्राहिम ने कहा, “शायद वे खुदा के फरिश्ते थे, उनकी दी हुई चीज बरकत वाली होगी।” रुक्सार ने उन कंकरों को झोपड़ी के कोनों में रख दिया।

अगली सुबह जब रुक्सार की आंख खुली, तो वह दंग रह गई। वह अब घास के बिस्तर पर नहीं, बल्कि मखमली गद्दे पर थी। उसकी झोपड़ी एक आलीशान महल में तब्दील हो चुकी थी। दीवारों पर हीरे-जवाहरात जड़े थे।

तभी इब्राहिम कमरे में आया। रुक्सार चीख पड़ी, “इब्राहिम! तुम… तुम देख सकते हो?” इब्राहिम ने अपनी आंखें मलीं और रोते हुए कहा, “हाँ रुक्सार! मुझे सब दिखाई दे रहा है। खुदा ने तुम्हारी नेकी का सिला दे दिया है।”

इब्राहिम अब एक साधारण फकीर नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे सुंदर और प्रतापी युवक लग रहा था। उनके महल के बाहर अब गरीबों की लंबी कतारें लगने लगीं, जिन्हें रुक्सार और इब्राहिम दिल खोलकर दान देते थे।

अध्याय 6: घमंड का अंत और हकीकत का सामना

दूसरी तरफ, सुल्तान अजीजुद्दीन ने अपनी छोटी बेटी नूरजहां की शादी एक बड़े राजकुमार अहमद से की थी। सुल्तान को लगा था कि नूरजहां वहां महारानी बनकर राज करेगी। लेकिन नूरजहां के घमंडी स्वभाव और बदतमीजी ने उसके ससुराल को नर्क बना दिया था। राजकुमार अहमद ने तंग आकर उसे महल से निकाल दिया और सुल्तान का सारा धन युद्ध में बर्बाद हो गया।

सुल्तान अब दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। तभी उन्होंने सुना कि पड़ोस के गांव में एक बहुत ही नेक और अमीर ‘इब्राहिम शाह’ और उनकी मलिका ‘रुक्सार’ रहते हैं। सुल्तान को यकीन नहीं हुआ कि यह उनकी वही बेटी है।

सुल्तान अजीजुद्दीन अपनी बीवी मेहरूख और बेटी नूरजहां के साथ उस महल के दरवाजे पर पहुंचे, जहां कुरानखानी (दावत) हो रही थी। जब उन्होंने अपनी बेटी रुक्सार को देखा, तो उनकी आंखों से पछतावे के आंसू बहने लगे।

रुक्सार ने अपने पिता को देखते ही उनके पैर छुए। सुल्तान ने रोते हुए कहा, “बेटी, जिसे मैं मनहूस समझता था, वही आज पूरे खानदान की लाज बचा रही है। मुझे माफ कर दो।”

रुक्सार ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब्बू जान, मां के जाने में मेरा कसूर नहीं था, वह खुदा का हुक्म था। और इस फकीर के पास मेरी किस्मत नहीं, खुदा की रहमत थी।”

इब्राहिम और रुक्सार ने सुल्तान और उनके परिवार को अपने पास रखा। नूरजहां और मेहरूख का घमंड टूट चुका था। वे भी अब नेकी की राह पर चलने लगे।

शिक्षा:

यह कहानी हमें सिखाती है कि इंसान अपनी किस्मत लेकर पैदा होता है। किसी को मनहूस कहना सबसे बड़ा गुनाह है। जो अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और सब्र करते हैं, वक्त आने पर खुदा उनकी झोपड़ी को भी महलों से बेहतर बना देता है।