जनरल का रहस्यमयी रोग और चमत्कारी बच्चा .

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कहानी: जनरल का रहस्यमयी रोग और चमत्कारी बच्चा

अस्पताल का गलियारा रात के समय बिल्कुल शांत था। कुछ कमरों से बस मॉनिटरिंग मशीनों की धीमी आवाज आ रही थी, लेकिन सब कुछ शांत था। सबसे आखिरी कमरे में जनरल विक्रम सिंह नामक अधिकारी कमजोर पड़े हुए थे, लगभग बिना किसी हरकत के। कई दिनों से डॉक्टर उनकी बीमारी का कारण जानने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हर जांच का नतीजा बेअसर रहा था। जनरल का शरीर लगातार ठंडा पड़ता जा रहा था, जैसे कोई अदृश्य शक्ति धीरे-धीरे उनकी सारी ऊर्जा खींच रही हो।

उनकी पत्नी बिस्तर के पास बैठी, अपने पति का हाथ थामे, किसी चमत्कार के लिए प्रार्थना कर रही थी। लेकिन उस रात, चमत्कार एक ऐसी दिशा से आया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

आरव, एक 9 साल का लड़का, अपनी दादी के साथ अस्पताल के गलियारे में धीरे-धीरे चल रहा था। वह अस्पताल में काम करने वाली सफाई कर्मचारी की पोती था और आज वह भी एक पुरानी कपड़े की थैली लेकर चल रहा था, जिसमें तीन रंग के चावल थे—सफेद, लाल और काले। ये चावल उसके परिवार की पारंपरिक विरासत थे, और वह जानता था कि इनका इस्तेमाल केवल उन्हीं बीमारियों के इलाज में किया जाता है जिनका कोई वैज्ञानिक स्पष्टीकरण नहीं होता।

पहला संकेत

जब आरव अस्पताल के गलियारे में चल रहा था, वह जनरल विक्रम सिंह के कमरे के पास से गुजरते हुए रुक गया। उसे महसूस हुआ कि कुछ अजीब सा था, जैसे कोई उसे भीतर से बुला रहा हो। उसकी दादी ने उसे वापस खींचने की कोशिश की, लेकिन आरव ने धीरे से सिर हिलाया और दरवाजे की ओर एक कदम बढ़ा दिया।

जैसे ही दरवाजा खुला, आरव ने देखा कि जनरल विक्रम सिंह लेटे हुए थे, उनके शरीर से ठंडी हवा निकल रही थी। कमरे में एक अजीब सी खामोशी थी, और जनरल की पत्नी चिंतित नजरों से अपने पति को देख रही थी। उसने देखा कि आरव और उसकी दादी कमरे में खड़े थे, लेकिन उससे पहले कि वह कुछ कह पाती, आरव झिझकते हुए अंदर चला गया।

आरव का दिल तेज़ी से धड़क रहा था, और उसकी दादी ने भी उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह चुपचाप जनरल के पास गया। उसने अपने हाथ में पकड़े चावलों की थैली को देखा, जो धीरे-धीरे कंपन करने लगी थी, जैसे उसमें कोई शक्ति समाई हो।

पारंपरिक उपचार

आरव ने थैली से तीन रंग के चावल निकाले और उन्हें धीरे-धीरे जनरल के शरीर पर रखा। जैसे ही चावल जनरल के शरीर से छुए, कमरे में एक हल्की सी ठंडी हवा चली और एक अजीब सी हलचल महसूस होने लगी। जनरल की पत्नी ने आश्चर्य से देखा, जबकि उसकी दादी अविश्वास में खड़ी थी।

आरव ने अपनी आंखें बंद की और महसूस किया कि चावल धीरे-धीरे अपने आप हिलने लगे, जैसे वे जनरल की बीमारी को सोख रहे हों। उसकी दादी ने आरव को घबराते हुए देखा, लेकिन आरव शांत था। वह जानता था कि यह चमत्कारी उपचार था, और अब उसका कदम पीछे हटने का नहीं था।

चमत्कार की शुरुआत

कुछ ही देर में, जनरल के शरीर से एक हल्की सी कंपन महसूस हुई। उनकी सांसें धीमी थीं, लेकिन अब एक सुधार का संकेत मिलने लगा। उनकी पत्नी ने धीरे-धीरे उनका हाथ थाम लिया, और आरव ने एक लंबी सांस ली।

अचानक, जनरल की पत्नी की आंखों में आंसू आ गए, और उन्होंने कहा, “क्या यह सच है? क्या मेरे पति ठीक हो रहे हैं?” आरव ने सिर झुका लिया और कहा, “यह अभी शुरू हुआ है, लेकिन जल्दी ठीक हो जाएंगे।”

जनरल विक्रम सिंह की स्थिति में सुधार होने लगा था। उनके शरीर का तापमान धीरे-धीरे सामान्य होने लगा, और उनकी सांसों में एक स्थिरता महसूस होने लगी। आरव ने चावलों के दाने की रेखा को ठीक उसी स्थान पर रखा, जहां से उन्हें लगा कि सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।

रहस्यमय ऊर्जा

आरव ने महसूस किया कि चावल अब पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो रहे थे। उनके हाथों में एक अजीब सी ऊर्जा महसूस हो रही थी, जैसे चावल जनरल के शरीर से सारी नकारात्मक ऊर्जा खींच रहे हों। एक पल के लिए, जनरल की पत्नी ने उनके चेहरे पर रौशनी देखी, जैसे वह पूरी तरह से ठीक हो गए हों।

आरव की दादी ने अपने पोते को देखा, लेकिन वह अभी भी चौंकी हुई थी। वह जानती थी कि यह कोई साधारण इलाज नहीं था, लेकिन उसे आरव पर पूरा भरोसा था।

अंतिम चरण और चमत्कारी सुधार

आरव ने अपने हाथों को जनरल के कंधे पर रखा और धीरे-धीरे चावल के दानों को उसके शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। जैसे ही चावल के दाने जनरल के शरीर से बाहर निकले, एक ठंडी हवा कमरे में फैल गई, और जनरल विक्रम सिंह की हालत में अचानक सुधार आया।

उनकी सांसों का धीमा होना अब खत्म हो चुका था, और उनका चेहरा हल्का और स्वस्थ दिखने लगा। जनरल की पत्नी ने राहत की लंबी सांस ली और कहा, “क्या यह सच है? क्या वह ठीक हो गए हैं?” आरव ने धीमे से जवाब दिया, “अब सब ठीक है।”

एक नई शुरुआत

आरव ने अपनी दादी की ओर देखा, और वह जानता था कि उसने कुछ ऐसा किया था, जो कोई डॉक्टर नहीं कर सकता था। जनरल विक्रम सिंह ठीक हो गए थे, और उनकी पत्नी ने बच्चे को गले लगा लिया।

यह घटना अस्पताल में एक चमत्कारी इलाज के रूप में प्रसिद्ध हो गई, और आरव का नाम सभी के बीच फैल गया। उसकी दादी ने भी उसे आशीर्वाद दिया और बताया कि यह उसकी शक्ति थी, जो पारंपरिक उपचार से आई थी।

यह कहानी इस बात को दर्शाती है कि कभी-कभी हमें अतीत से बहुत कुछ सीखने की जरूरत होती है, और पारंपरिक ज्ञान भी कभी-कभी आधुनिक चिकित्सा से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।