पिता से परेशान होकर बेटी ने उठाया गलत कदम /जिसको देखकर S.P साहब के होश उड़ गए/
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पिता से परेशान होकर बेटी ने उठाया गलत कदम — जिसने देखकर एस.पी. साहब के होश उड़ गए
आज मैं आपको एक ऐसी घटना बताने जा रहा हूं, जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। यह घटना राजस्थान के अलवर जिले के एक छोटे से गांव, इंद्रगढ़ की है। यहां एक परिवार था, नाथूराम, उसकी पत्नी कांता देवी और उनकी बेटी तान्या। यह परिवार एक सामान्य सा था, परंतु नाथूराम की शराब की लत ने उनकी ज़िन्दगी को एक अजनबी मोड़ पर ला खड़ा किया।
नाथूराम और कांता देवी की कहानी
नाथूराम एक मेहनतकश आदमी था जो खेतों में काम करता था। वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करता। पर कुछ सालों बाद उसे शराब की लत लग गई। धीरे-धीरे उसका पूरा जीवन शराब में ही घुलने लगा। वह जितनी मेहनत करता, उतना ही पैसा शराब की बोतलों में उड़ाने लगा। वह अब तकदीर से लड़ने की बजाय शराब के नशे में डूब चुका था।
कांता देवी, नाथूराम की पत्नी, एक समझदार और स्नेही महिला थी। वह नाथूराम की लत को लेकर चिंतित थी, लेकिन अपने पति के लिए उसने कभी हार नहीं मानी। वह घर का सारा काम करती थी और नाथूराम की हर बात को मानती थी। उसे उम्मीद थी कि एक दिन नाथूराम अपनी लत को छोड़ देगा।

तान्या, नाथूराम और कांता की एकमात्र बेटी थी। वह पढ़ाई में बहुत होशियार और संस्कारी थी। वह 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी और स्कूल में हमेशा टॉप करती थी। तान्या का सपना था कि वह एक दिन बड़ी अफसर बनेगी, ताकि अपनी मां और पिता की मदद कर सके। लेकिन उसका जीवन एक अजीब मोड़ पर था, जिसको देखकर एस.पी. साहब के भी होश उड़ गए थे।
नाथूराम की शराब और कांता देवी का संघर्ष
एक दिन, कांता देवी ने नाथूराम से कहा, “देखो, अब हमारी बेटी बड़ी हो रही है। हमें उसकी शादी के लिए पैसे बचाने होंगे, लेकिन हमारे पास तो कुछ भी नहीं है। घर में गरीबी इतनी है कि हम तीन वक्त का खाना भी ठीक से नहीं खा पाते।”
नाथूराम ने गुस्से में आकर जवाब दिया, “देखो कांता, मैं अपनी मेहनत से जो भी कमाता हूं, वह सब शराब में उड़ जाता है। हमारे पास पैसा नहीं है, लेकिन अगर तुम भी मेरे साथ काम करने लगोगी तो हमारी हालत सुधर सकती है।”
कांता देवी ने उसकी बात मानी और तय किया कि वह भी मजदूरी का काम करेगी। इसी बीच, गांव में एक मिस्त्री रतन सिंह आया। रतन सिंह, जो कि गांव के सरपंच के घर का निर्माण कर रहा था, वह कांता देवी की खूबसूरती को देखकर उसके पीछे पड़ गया। वह जानता था कि नाथूराम शराब पीने में व्यस्त रहता है, इसलिए उसने कांता देवी को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई।
रतन सिंह और दिलावर सरपंच का काला चेहरा
रतन सिंह ने कांता देवी को एक दिन मजदूरी का काम देने के बहाने अपने पास बुलाया। जैसे ही वह वहां पहुंची, रतन सिंह ने कांता देवी के साथ गलत इरादे रखने शुरू कर दिए। कांता देवी ने उसे कई बार मना किया, लेकिन रतन सिंह ने उसे धमकाकर चुप करवा लिया। इस घटना को जानने के बाद कांता देवी बहुत दुखी हुई, लेकिन उसने अपनी बेटी तान्या को कुछ नहीं बताया।
इसी दौरान, दिलावर सरपंच, जो कि एक बुरा आदमी था, भी कांता देवी पर बुरी नजर डालने लगा। उसने कांता को अपनी हवस का शिकार बनाने का प्रयास किया। उसने नाथूराम को शराब और पैसों का लालच देकर कांता देवी को अपने पास बुलाया और उसका शोषण किया। कांता देवी बहुत मजबूर थी, और उसकी हिम्मत टूट चुकी थी।
तान्या का गुस्सा और उसका निर्णय
एक दिन जब तान्या ने अपनी मां कांता देवी को बहुत परेशान देखा, तो उसने उसकी वजह पूछी। कांता देवी ने उसे सिर्फ इतना ही बताया कि वह मेहनत मजदूरी से थक गई है। लेकिन तान्या की नजरों से यह बात छुपी नहीं रही। उसे महसूस हुआ कि कुछ गड़बड़ है, और उसने अपनी मां से सच्चाई जानने की ठानी।
एक दिन जब तान्या ने अपने पिता नाथूराम से सच्चाई पूछी, तो उसने अपने पति और मां के बारे में सब कुछ जान लिया। तान्या का दिल टूट चुका था, और उसकी आंखों में गुस्सा और नफरत भरी हुई थी। उसने ठान लिया कि अब उसे यह सब खत्म करना ही होगा।
तान्या और कांता देवी का फैसला
तान्या और कांता देवी ने नाथूराम की बुरी आदतों को खत्म करने का फैसला किया। एक रात, जब नाथूराम शराब पीकर गहरी नींद में सो रहा था, तान्या ने कुल्हाड़ी उठाई और अपने पिता के सिर में मारी। कांता देवी ने भी उसके पेट में चाकू मार दिया। इस खौफनाक घटना के बाद दोनों ने घर छोड़ दिया और पुलिस के पास जाकर सरेंडर कर दिया।
पुलिस के सामने सच्चाई
कांता देवी और तान्या को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने नाथूराम की लाश बरामद की और दोनों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। अब यह मामला अदालत में था, और एस.पी. साहब भी इस अपराध को लेकर हैरान थे। उन्होंने इस कहानी को पूरी तरह से सुना और यह निर्णय लिया कि इस केस को प्राथमिकता दी जाएगी।
न्याय का इंतजार
कांता देवी और तान्या के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी थी। सब लोग इस बात का अनुमान लगा रहे थे कि क्या न्याय मिलेगा या नहीं। एस.पी. साहब ने अपने स्तर पर हर पहलू को ध्यान में रखा, और यह मामला एक सुनामी जैसा बन गया। इस कहानी का अंत अब भविष्य में ही तय होगा, लेकिन जो भी होगा, एक बात तो तय है कि यह काले धंधे और बुराई के खिलाफ एक संदेश देने वाला होगा।
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